मरीजों को सरकार देगी 1100 रुपए प्रतिमाह पेंशन
नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। यूएन और डब्लूएचए ने बिहार में फाइलेरिया (Filariasis) की दिशा में मिली प्रगति की सराहना की है। यह जानकारी जदयू के के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दी है। उन्होंने कहा कि यह पिछले दो दशकों में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने और स्वास्थ्य परामर्श को बढ़ावा देने के लिए सुव्यवस्थित प्रयास का परिणाम है। उनके मुताबिक इस साल पहली बार बिहार के अररिया, मधेपुरा और सुपौल ने प्रशिक्षण एसेसमेंट सर्वे (TAS-1) को पूरा किया है। इसके बाद अब यह अभियान निगरानी चरण में प्रवेश कर गया। एक और कदम उठाते हुए बिहार सरकार ने फाइलेरिया के मरीजों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर 1100 रुपए प्रतिमाह राशि देने की भी घोषणा की है।
फाइलेरिया: DOT प्रणाली लागू
उनके अनुसार राज्य के प्रत्येक खंड में स्वास्थ्य व्यवस्था स्थापित की गई थी और स्वास्थ्य कर्मियों, टेलीकॉम और आशा कार्यकताओं को प्रभावी ढंग से प्रशिक्षित और बढ़ावा दिया गया। इसके अलावा बिहार सरकार ने डायरेक्टली ऑब्जर्व्ड इन्वेस्टमेंट (डीओटी) प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू किया है, जिसके तहत केवल औषधियों का वितरण नहीं किया गया है, बल्कि स्वास्थ्य कार्यशालाओं की निगरानी में दवाओं का सेवन भी सुनिश्चित किया गया है। इससे फाइलेरिया रोगियों को उपचार में सफलता मिली। यह उपलब्धि केवल सरकार की नहीं है, बल्कि लाखों स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं और वैज्ञानिकों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि बिहार आने वाले वर्षों में भी स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई टीमें बनेंगी।
फाइलेरिया: सामाजिक सुरक्षा पेंशन
खबरों के मुताबिक बिहार सरकार ने फाइलेरिया के मरीजों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर सामाजिक सुरक्षा पेंशन मद से 1100 प्रतिमाह सहयोग देने की घोषणा की है। इसके लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों का पंजीकरण शुरू कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार इच्छुक मरीज आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो के साथ अस्पताल पहुंचकर आवेदन कर सकते हैं। योजना का उद्देश्य हाथीपांव से पीड़ित मरीजों को आर्थिक सहायता के साथ बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ना है।
