नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। IIT गुवाहाटी के वैज्ञानिकों के शोध ने नवाचार का नया अध्याय खोला है। उसने साफ पेयजल के लिए ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे मात्र 20 रुपये में एक हजार लीटर पानी साफ हो सकेगा। यह कम्युनिटी स्केल वॉटर ट्रीटमेंट सिस्टम हर दिन 20 हजार लीटर फ्लोराइड और आयरन युक्त दूषित भूजल को साफ कर सकता है। यह तकनीक कम लागत पर दूरदराज के गांवों और कस्बों में सुरक्षित पीने का पानी पहुंचाने में बेहद कारगर साबित हो सकती है।
साफ पानी: परीक्षण रहा सफल
जानकारी के मुताबिक इस सिस्टम को चलाने में निगरानी की जरूरत बहुत कम है और इसका जीवनकाल करीब 15 साल है। हालांकि इसमें हर छह महीने में इलेक्ट्रोड बदलने की आवश्यकता होती है, जिसे समय पर बदलने के लिए एक सेफ्टी अलर्ट सिस्टम भी जोड़ा गया है। इस तकनीक को काकाटी इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा असम के चांगसारी इलाके में पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग के सहयोग से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर स्थापित किया गया है जहां लगातार 12 सप्ताह तक इसका सफल परीक्षण किया गया। इस दौरान बेहतर नतीजे सामने आए। टेस्ट में यह सिस्टम 94 फीसद आयरन और 89 फीसद फ्लोराइड को पानी से हटाने में सफल रहा जिससे पानी भारतीय मानकों के अनुसार सुरक्षित हो गया।
साफ पानी: उन्नत होगी तकनीक
भविष्य की संभावनाओं पर बात करते हुए प्रोफेसर मिहिर कुमार पुरकैत ने बताया है कि हम इस सिस्टम को सौर या पवन ऊर्जा से चलाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। इसके साथ ही इलेक्ट्रोकोएगुलेशन प्रक्रिया में बनने वाली हाइड्रोजन का भी उपयोग करने की योजना है। साथ ही, रियल-टाइम सेंसर और ऑटोमैटिक कंट्रोल जैसी स्मार्ट तकनीकों को जोड़कर हम इसे और भी कम देखरेख में चलने योग्य बना सकेंगे ताकि यह दूर-दराज और जरूरतमंद इलाकों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सके। वैज्ञानिक इस सिस्टम को अन्य जल शुद्धिकरण तकनीकों के साथ जोड़ने पर काम कर रहे हैं, ताकि इसकी कार्यक्षमता और बढ़ाई जा सके।
साफ पानी: गांवों तक होगी पहुंच
इस बारे में किए अध्ययन के नतीजे प्रतिष्ठित जर्नल एसीएस ईएसएंडटी वाटर में प्रकाशित हुए हैं। इस तकनीक का विकास IIT गुवाहाटी के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर मिहिर कुमार पुरकैत, डॉक्टर अन्वेशन, डॉक्टर पियाल मंडल और रिसर्च स्कॉलर मुकेश भारती ने मिलकर किया है। आईआईटी गुवाहाटी की यह पहल न केवल विज्ञान की दृष्टि से बड़ी उपलब्धि है बल्कि उन लोगों के लिए भी राहत की उम्मीद है जो आज भी साफ पानी के इंतजार में हैं। यह तकनीक गांव-गांव में स्वच्छ जल की रोशनी लेकर आ सकती है।
इंसुलिन पर मिला दो पेटेंट
IIT गुवाहाटी ने एडवांस इंसुलिन उत्पादन प्रणाली के लिए दो भारतीय पेटेंट हासिल किए हैं जो लागत में कमी ला सकता है। विश्व भर में 537 मिलियन से अधिक वयस्क मधुमेह से प्रभावित हैं तथा अनुमान है कि 2050 तक 8 में से एक वयस्क को मधुमेह हो सकता है। इस नवाचार से इंसुलिन की पहुंच और सामर्थ्य में बदलाव आ सकता है। प्रोफेसर वीरंकी वेंकट दासू इस शोधकार्य को लीड कर रहे थे तो अंशुमान साहू, प्रबीर कुमार दास, डॉ. एमएसआरसी मूर्ति और प्रो. संजुक्ता पात्रा का सहयोग मिला।
