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Medsafetyweek: भारत दवाओं के सुरक्षित उपयोग के पक्ष में

Medsafetyweek: भारत दवाओं के सुरक्षित उपयोग के पक्ष में

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। भारतीय फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम के राष्ट्रीय समन्वय केंद्र (NCC-PVPI), भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) ने दुनिया भर के 130 साझेदार संगठनों के साथ 3-9 नवंबर, 2025 तक आयोजित दसवें ग्लोबल मेडसेफ्टीवीक अभियान में भाग लिया। इस अवसर पर आईपीसी के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेल्वन ने कहा कि अनुसंधान से पता चलता है कि दुनिया भर में सभी संदिग्ध दुष्प्रभावों में से केवल 5-10 प्रतिशत ही रिपोर्ट किए जाते हैं। इसका मतलब है कि हम केवल हिमशैल के सिरे को ही देख पा रहे हैं और सुरक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दों की पहचान करने में अभी और समय लग सकता है। मेडसेफ्टीवीक के माध्यम से, हमारा लक्ष्य अधिक से अधिक लोगों को यह एहसास दिलाना है कि उनकी रिपोर्ट महत्वपूर्ण है।

मेडसेफ्टीवीक: दुष्प्रभावों की दें सूचना

NCC-PVPI, IPC के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी और प्रभारी अधिकारी डॉ. जय प्रकाश ने कहा कि संदिग्ध दुष्प्रभावों की सूचना देकर, हम में से प्रत्येक व्यक्ति दवाओं को सभी के लिए सुरक्षित बनाने में योगदान देता है। अपनी आवाज उठाने से दूसरों की सुरक्षा में मदद मिल सकती है। सिर्फ डॉक्टर, फार्मासिस्ट या नियामक ही नहीं, सभी की इसमें भूमिका है। इस वर्ष के अभियान का मुख्य संदेश था—दवाओं की सुरक्षा में सभी की भूमिका है। संदिग्ध दुष्प्रभावों की सूचना देकर, आप और मैं दवाओं को सभी के लिए सुरक्षित बनाने में मदद कर सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य रोगियों, परिवारों और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के बीच दवाओं के संदिग्ध दुष्प्रभावों की सूचना देने के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना था। इस अभियान के पूरे सप्ताह के दौरान, पूरे देश में व्यक्तियों और हितधारकों ने सोशल मीडिया और आउटरीच गतिविधियों के माध्यम से मेडसेफ्टीवीक संदेश का सक्रिय रूप से प्रचार किया गया। एनसीसी-पीवीपीआई के हितधारक भी जागरूकता बढ़ाने और आधिकारिक माध्यमों से दुष्प्रभावों की रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करने के प्रयास में शामिल हुए, जिनमें दवाओं की प्रतिकूल प्रतिक्रिया (एडीआर) निगरानी केंद्र और बाजार प्राधिकरण धारक शामिल हैं।

मेडसेफ्टीवीक की पृष्ठभूमि

मेडसेफ्टीवीक अभियान जनता को यह बताने के लिए प्रेरित करता है कि संदिग्ध दुष्प्रभावों की सूचना क्यों, कैसे और कहां दी जानी चाहिए। इसे पहली बार 2016 में शुरू किया गया था। 2025 में यह अपनी दसवीं वर्षगांठ मना रहा है। यह अब तक का सबसे बड़ा आयोजन है। इसमें 117 देशों के 130 संगठनों ने 60 से अधिक भाषाओं में संदेश साझा किए।

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