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लागत घटेगी, मिट्टी को जीवन देगी Organic farming

लागत घटेगी, मिट्टी को जीवन देगी Organic farming

डॉ. हर्षवर्धन

नयी दिल्ली। भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है और गाँवों की धड़कन हैं हमारे किसान। इस धरती पर अनादिकाल से कृषि केवल एक पेशा नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के साथ चलने वाली एक जीवन-शैली रही है। आज जब ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का नया युग आकार ले रहा है तो ऑर्गेनिक खेती उसी परिवर्तन का सबसे उज्ज्वल अध्याय बनकर उभर रही है। ऑर्गेनिक खेती की खूबसूरती यह है कि यह प्रकृति की गोद से उठाए गए तरीकों से खेतों को पुनर्जीवित करती है। रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करके यह मिट्टी को फिर से अपनी मूल शक्ति, उर्वरता और जीवंतता लौटाती है। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरणीय संकटों से जूझ रही है, भारत के किसान ऑर्गेनिक खेती के माध्यम से समाधान बन रहे हैं, क्योंकि हर जैविक खेत सिर्फ अनाज नहीं उगाता, बल्कि पर्यावरण को बचाने वाली हरियाली भी बोता है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में यह खेती एक महत्वपूर्ण कदम है। जब किसान अपने खेतों से निकलने वाली जैविक उपज को सीधे मंडियों, ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स और उपभोक्ताओं तक पहुँचा रहे हैं, तब वे न केवल अपनी आय बढ़ा रहे हैं बल्कि स्थानीय से वैश्विक की भावना को भी साकार कर रहे हैं। ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग देश और विदेश दोनों में तेज़ी से बढ़ रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ अधिक मजबूत हो रही है।
ऑर्गेनिक खेती का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह किसानों की लागत घटाती है और लाभ बढ़ाती है, बीज से लेकर खाद तक, सब कुछ गाँव में ही उपलब्ध हो जाता है। यही तो आत्मनिर्भरता की पहली सीढ़ी है!
इस पद्धति से तैयार अनाज, सब्ज़ियाँ और फल न केवल पोषक होते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य को भी सुरक्षित बनाते हैं। यह खेती किसान के खेत को, उपभोक्ता के शरीर को और पृथ्वी के पर्यावरण को तीनों को स्वस्थ रखती है।
भारत का किसान जब मिट्टी की ओर लौटता है, तो वह सिर्फ खेती नहीं करता, वह अपने भविष्य की बुनियाद को हरा-भरा करता है। ऑर्गेनिक खेती आज हमारे गाँवों को फिर से समृद्धता, स्वाभिमान और टिकाऊ विकास का रास्ता दिखा रही है।
विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब गाँव मजबूत होंगे, किसान आत्मनिर्भर होंगे और धरती माँ सुरक्षित होगी। ऑर्गेनिक खेती इन तीनों को एक सूत्र में बुनती है, यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।
भारत के खेतों से उठती यह नई हरियाली बताती है—आत्मनिर्भर भारत की जड़ें मिट्टी में हैं… और उस मिट्टी को जीवन दे रही है ऑर्गेनिक खेती।

(पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री)

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