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The Thermometer.2—रात में अनिवार्य रूप से करें ब्रश: डॉ. सोनल

The Thermometer.2—रात में अनिवार्य रूप से करें ब्रश: डॉ. सोनल

नयी दिल्ली। The Thermometer.2 टॉक शो के नए एपिसोड में इस बार हम जिस विशेषज्ञ से आपको मिलाने जा रहे हैं, वह डेंटिस्ट हैं यानी दांत से संबंधित तमाम रोंगों की एक्सपर्ट। वे हैं डॉक्टर सोनल गोयल जो कहती हैं कि लोगों को दिनभर में दो बार ब्रश करना चाहिए। एक सुबह तो एक रात का खाना खा लेने के बाद। इससे दांत में कीड़ा नहीं पनपेगा। डॉ. गोयल दिल्ली—एनसीआर की एक जानीमानी डेंटिस्ट है जिनके पास 20 से 22 वर्षों का अनुभव है। उनसे बात की है स्वस्थ भारत मीडिया के समूह संपादक आशुतोष कुमार सिंह ने। उन्होंने बच्चों में दांतों की देखभाल का नुस्खा भी बताया है।

आशुतोष: सामान्यतः लोग सेहत पर कम ध्यान देते हैं और जब दांतों की बात आती है तो सुबह उठे और किसी तरह ब्रश किए और भाग लिए। एक डेंटिस्ट होने के नाते आप क्या सुझाव देना चाहेंगी?
डॉ. सोनल: ब्रश करने का एक तरीका होता है जिसे फॉलो करना चाहिए। ब्रश करते समय कॉन्शियसली ब्रश करना चाहिए ताकि सारे दांत कवर हो जाए। दांतों के जो दो चार सरफेससेज होते हैं, आगे के दांत के और पीछे के दांत के, वो सब एक सर्कुलर मोशन में 45 डिग्री एंगल पर धीरे-धीरे दो से चार मिनट लेकर क्लीन करने चाहिए।

आशुतोष: मतलब आप ये कह रही हैं कि दो से चार मिनट तक हमें ब्रश करना चाहिए?
डॉ. सोनल: मिनिमम दो मिनट तो आपको ब्रश करना ही चाहिए। कॉन्शियसली सोच कर कि यहां से यहां तक सारे दांत कवर करें। ब्रश में मटर के दाने के बराबर पेस्ट लगाइए और उसको हल्के—हल्के सर्कुलर मोशन में 45 डिग्री एंगल पर ब्रश को दांत पर रखिए और एक कोने से लेकर दूसरे तक साफ करना चाहिए। यह तो सुबह की बात हो गई। रात में भी ब्रश करना जरूरी है। सोने से पहले जरूर अपना मुंह साफ करके सोना चाहिए।

आशुतोष: भारत में बहुत ही कम लोग होंगे जो रात में सोने के पहले ब्रश करते हैं। ऐसा करना क्यों जरूरी है?
डॉ. सोनल: होता यह है कि आपने रात का खाना खाया और पानी पिया, कुल्ला किया और सो गए। दांतों के बीच में खाना फंसा रह सकता है जिससे दांत में पहले से मौजूद बैक्टीरिया धीरे-धीरे उस खाने को सड़ाते हैं और एसिड प्रोड्यूस करते हैं जिससे दांत गलने लगते हैं। सो जाने पर एक तो सलाइवा बनना कम हो जाता है और उनको ज्यादा टाइम मिल जाता है। पूरी रात उन्हें अपना एक्शन के लिए मिल गया है। यानी कि आपने अपने दांतों के दुश्मन को और मैटेरियल और टाइम दे दिया।

आशुतोष: अमूमन लोग डेंटिस्ट के पास तब जाते हैं जब दांतों में गलन हो या बहुत तेज दर्द हो। उसके पहले डेंटिस्ट की सलाह लेना भी जरूरी नहीं समझते। ऐसे लोगों को क्या सलाह देना चाहेंगे आप?
डॉ. सोनल: कम से कम हर छ महीने आपको चेकअप के लिए डेंटिस्ट के पास जाना चाहिए। उससे क्या होता है कि अगर कोई सड़न की शुरुआत है या दांत, मसूड़े की कोई बीमारी हो रही है तो वो इनिशियल स्टेज में पकड़ ली जाती है। जैसे आपके दांत में कीड़ा लगा तो आपको बिल्कुल दर्द नहीं होगा। आपको थोड़ा सा कालापन नजर आएगा। इसे टाल देने से वही कीड़ा जड़ तक पहुंच जाता है और दांत में दर्द शुरू हो जाता है। जहां आपका इलाज कम खर्च और कम समय में हो जाता, वो और ज्यादा समय और ज्यादा खर्चे करवा देता है।

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आशुतोष: ये बात बिल्कुल आपने सही कही। अभी WHO की रिपोर्ट आयी थी कि ओरल केयर के मामले में हम भारतीय बहुत ही फिसड्डी हैं। मतलब हम अपने मुंह का ख्याल रखते ही नहीं है। ओरल केयर का मतलब क्या है?
डॉ. सोनल: ओरल केयर या डेंटल केयर एक ही शब्द है। मतलब आपके मुंह के जितने भी हिस्से है, दांत, जबड़ा, मसूड़े आदि, इससे जुड़ी सारी बातें इसमें आती हैं। सबका ध्यान रखें, सफाई का ध्यान रखें।

आशुतोष: बच्चे छोटे हों तो उसका ख्याल कैसे रखें? उनको ब्रश कब, कैसे कराएं?
डॉ.सोनल: करीब 6 महीने के आसपास बच्चों में दांत निकलना शुरू होता है। बहुत छोटे बच्चों को दूध पिलाते हैं या हल्का खाना देते हैं तो गीले कपड़े से उसके दांत साफ कर दें। गीला कपड़ा लीजिए। हल्का सा उसको रगड़ दीजिए जिससे उसमें गंदगी जमा ना हो। कुछ बड़ा होने पर पांच—छह दांत आपको दिखाई देने लगते हैं। तो एक फिंगर ब्रश आता है या बिल्कुल सॉफ्ट ब्रश। उसको हल्का सा आप गीला करिए या ग्लिसरीन यूज़ कर सकते हैं और हल्के से साफ कर लीजिए। छ साल तक के बच्चों के लिए सुपरवाइज्ड ब्रशिंग होनी चाहिए कि माता-पिता ध्यान रखें कि वो बच्चा ब्रश कर रहा है। वो खड़े रहें दो मिनट। उसको बताएं कि वो अपने सारे दांत सही से साफ करें। बच्चे को छोटा ब्रश दें। बताएं कि किस तरह से ब्रश करना है। ब्रश के ब्रिसल्स सॉफ्ट होने चाहिए।

आशुतोष: कई लोग दातुन करते हैं नीम के या अलग-अलग औषधीय पौधों के। तो दातुन और ब्रश में कौन फायदेमंद है?
डॉ. सोनल: मैं तो ब्रश ही बोलूंगी। ब्रश साइंटिफिकली बनाई जाती है। उसमें छोटे-छोटे ब्रिसल्स होते हैं जो दांतों के बीच में आराम से जाकर फंसी गंदगी को साफ कर देते हैं। यह दातून में संभव नहीं है। नीम में एंटीबायोटिक प्रॉपर्टीज होती है। दातून दांत के बीच की बहुत पतली स्पेस और पीछे तक नहीं पहुंच सकती तो ब्रश की आवश्यकता होती है।

आशुतोष: लोग टूथपेस्ट यूज़ करते हैं। उसकी क्वालिटी को लेकर के कई तरह की बात होती है। हमने कई विज्ञापन देखे कि कोयला नहीं होना चाहिए। नमक होना चाहिए। इसमें हल्दी है। सही में किस तरह का पेस्ट आम आदमी यूज़ करे जो सेहत को नुकसान ना पहुंचाए?
डॉ. सोनल: नमक, कोयला आदि मार्केटिंग की चीजें होती है। जो दांतों के लिए फायदेमंद है वो फ्लोरिडेटेड टूथपेस्ट हैं। वो अच्छे होते हैं। पेस्ट स्मूद और सॉफ्ट होना चाहिए जो दांतों को घिसे।

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आशुतोष: फ्लोरिडेटेड टूथपेस्ट किस ब्रांड में आता है?
डॉ. सोनल: उस पर लिखा रहेगा। अगर कोई दांत की स्पेशल बीमारी है तो फिर डेंटिस्ट से सलाह लें। मेडिकेटेड टूथपेस्ट है तो तीन महीने तक आप यूज़ करिए। उसके बाद दोबारा चेकअप करा कर रिजल्ट देखिए।

आशुतोष: क्या लगातार उस चीज का इस्तेमाल करना चाहिए?
डॉ. सोनल: नहीं। बहुत सारे केमिकल होते हैं उसमें जिसे लॉन्ग टर्म यूज़ नहीं करना चाहिए।

आशुतोष: जब ओरल केयर की बात करते हैं तो यहां भी कैंसर होता है। वो कौन सी स्थिति होती है जहां पर कैंसर हो जाता है और उसमें किस तरह हमें ख्याल रखने की जरूरत है?
डॉ. सोनल: हमारे यहां लोग पान, तंबाकू, सिगरेट आदि का बहुत ज्यादा यूज करते हैं। ये सब कैंसर के कारण हैं। पान या तंबाकू लोग कोने में दबा के रखते हैं। वह घंटों दबा रहता है। ये सारी चीजें कैंसरकारक हैं।

आशुतोष: एक डेंटिस्ट को ये लगता है कि मुंह के अंदर कोई इस तरह की स्थिति बन रही कि कैंसर हो सकता है तो क्या डेंटिस्ट ही उसका इलाज करते हैं या कैंसर के स्पेशलिस्ट के पास भेजते हैं?
डॉ. सोनल: डेंटिस्ट को लगता है कि कैंसर बन रहा है तो वो उसी अनुसार टेस्ट की सलाह देते हैं। टेस्ट के रिजल्ट को देखकर किसी एक्सपर्ट के पास भेजा जाता है।

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आशुतोष: बुजुर्गों के जब दांत टूट जाते हैं और एक भी दांत नहीं बचता तब नया दोत लगाने की जरूरत आती है। इस प्रक्रिया से बुजुर्गों को कई कारणों से डर भी लगता है। वैसे बुजुर्गों को आप क्या कहना चाहेंगी?
डॉ. सोनल: जब दांत नहीं होते हैं तो डेंचर बनाया जाता है जो दोनों जबड़े में लगा दिया जाता है। इसमें एक तो नॉर्मल होते हैं जो आप पहन लेते हैं। आजकल नया आया है इंप्लांट बेस्ड डेंचर्स। इसमें बोन में छह इंप्लांट्स लगा कर उससे सपोर्ट करके फिक्स कर दिए जाते हैं। इससे क्या होता है कि आप जब बिना डेंचर के खाना खाने की कोशिश करते हैं। बहुत सारे लोग डेंचर नहीं यूज करते हैं और उसी से हड्डी भी चबा—चबा कर खाते हैं। इससे जबड़े की हड्डियां धीरे—धीरे गलती चली जाती है। आपका फेशियल प्रोफाइल चेंज हो जाता है। बोलने में दिक्कत आती है। खाने में तो दिक्कत है ही है। तो अच्छा यही है कि डेंजर लगवा दें। अगर दो—चार दांत भी टूट गए हैं तब भी आप उसको रिप्लेस करवा सकते हो।

आशुतोष: इसमें खाने—पीने में कोई दिक्कत तो नहीं?
डॉ. सोनल: नहीं, कोई दिक्कत नहीं आती। आरंभ में कोई भी नई चीज आप यूज करते हो तो उसे एडजस्ट होने में थोड़ा टाइम लगता है। वो हो सकता है। पर नॉर्मली और खाकर बाद में इससे कोई नुकसान नहीं। आपका न्यूट्रिशन बेटर होता है क्योंकि बहुत सारी चीजें है जो चबा के खानी है जो आप नहीं खा पाते हो।

आशुतोष: दांत दर्द होता है तो डॉक्टर के पास लोग नहीं जाते। सीधे केमिस्ट से पेन किलर मांग लेते हैं। दांत दर्द के भी तो अलग-अलग कारण होते होंगे। वैसे में सीधे केमिस्ट से लेना कितना नुकसानदेह है?
डॉ. सोनल: दांत दर्द में केमिस्ट ने आपको दर्द की दवा दे दी तो वो सिर्फ सिम्टम को खत्म कर रही है। जो दर्द की जड़ है, वो उससे नहीं खत्म होती। महीने भर बाद फिर उभर जा सकती है। इसमें कई कारण हो सकते हैं। मसूड़े की बीमारी हो सकती है। दांत की खुद की बीमारी हो सकती है यानी जड़ तक कीड़ा लगा हुआ है। कई बार खाने में इंजरी होती है कि आपका मसूड़ा कट रहा है। आप खाने के बाद पेन किलर ले लिया और उस समय ठीक हो गया। यानी पेन किलर ने दर्द दबा दी पर वो बीमारी खत्म नहीं हुई। वो धीरे-धीरे बढ़ रही है तो वो एक महीने, छ महीने या साल भर बाद पुनः हो जाएगी। इसमें दो बातें हैं। एक तो बीमारी जो बढ़ रही है वो तो बढ़ती रहेगी। दूसरा पेन किलर जो आप एक्स्ट्रा खा रहे हैं, उसके नुकसान अलग होंगे। आप जो एंटीबायोटिक ले लेते हैं तो उससे रेजिस्टेंस हो जाता है। सबसे इंपॉर्टेंट चीज है कि आपको दिन में दो बार जरूर ब्रश करना चाहिए। रात में सोने से पहले तो बिल्कुल ही जो आप अवॉइड करते हैं। दूसरा, मैंने नोटिस किया है कि छोटे बच्चों को मां ने दूध पिलाया और वह दूध पीते-पीते सो गया। ता जो दूध के पार्टिकल्स हैं वो मुंह में रह जाता है और धीरे-धीरे वो भी सड़ पैदा करता है। तभी छोटे बच्चों में भी दांत खराब हो जाते हैं। कई बार साल साल भर के बच्चे आते हैं उनके सारे दांत खराब हो गए होते हैं। मतलब अभी पूरे दांत मुंह में नहीं आए हैं और कैरीज हो गई। तो जरूर यह है कि आप जब दूध पिला दें तो दो-तीन चम्मच पानी पिला दीजिए जिससे दूध जमा नहीं रहे। वैसे बहुत छोटी-छोटी बातें हैं लेकिन यह बहुत ही जरूरी और सेहत के लिए बहुत ही कारगर है।

प्रस्तुति: अजय वर्मा

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