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लौटना होगा पुरानी परिपाटी में वरना स्वास्थ्य को खतरा

राजीव कुमार

नयी दिल्ली। दौड़ती जिंदगी और समय के अभाव का रोना रोकर लोग जिस लाइफस्टाइल को अपना चुके हैं, उसमें बीमारियां घेंरेंगी ही। कैसे, समझिये। आज 35 वर्ष से ऊपर के व्यक्तियों को ब्लड प्रेशर, मधुमेह, घुटनों के दर्द, कोलेस्ट्रॉल, थायरॉइड जैसी बीमारियां घेर लेती हैं जिसकी वजह सिर्फ और सिर्फ लाइफस्टाइल है।
यदि 2 घण्टे घर की सफाई की जाये तो 320 कैलोरी खर्च होती हैं, 45 मिनट बगीचे में काम करने से 170 कैलोरी खर्च होती हैं, एक गाड़ी की सफाई करने में 67 कैलोरी खर्च होती है, खिड़की-दरवाजों को पोंछने से कंधे, हाथ, पीठ व पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, आटा गूंधने से हाथों में आर्थ्राइटिस नहीं होता। कपड़े निचोड़ने से कलाई व हाथ की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं, 20 मिनट तक रोटियां बेलने से फ्रोजन शोल्डर की संभावना कम हो जाती है, ज़मीन पर बैठकर काम करने से घुटने जल्दी खराब नहीं होते।
लेकिन हम इन सबकी ज़िम्मेदारी नौकर और वाशिंग मशीन पर छोड़कर खुद डॉक्टरों से दोस्ती कर लेते हैँ। फिर शुरू होती है खाने मे परहेज़, टहलना, जिम, या फिर सर्जरी। कितना आसान है इन सबसे पीछा छुड़ाना कि हम अपने घर के काम खुद करें और स्वस्थ रहें।
किसी भी तरह की निर्भरता कष्ट का कारण होती है फिर वो चाहे शारीरिक हो, भौतिक हो या मानसिक। अपना काम दूसरों से करवा कर हम स्वयं को मानसिक व शारीरिक रूप से पंगु बना लेते हैं और नौकर ना होने के स्थिति में असहाय महसूस करते हैं। ये एक दुखद स्थिति है। यदि लोग काम को बोझ ना समझ कर उसका आंनद लें तो वो बोझ नहीं बल्कि एक दिलचस्प एक्टिविटी लगेगी। जिम से ज्यादा बोरिंग और दूसरी कोई जगह नहीं, उसकी बजाय आप अपने घर को रगड़ कर साफ करते हैं तो शरीर से एंडोर्फिन हारमोन निकलता है जो आपको अपनी मेहनत का फल देखकर खुशी की अनुभूति देता है। अच्छा खाना बनाकर दूसरों को खिलाने से सेरोटॉनिन हार्माेन निकलता है जो तनाव दूर करता है।
जब खुद के घर का काम करने के इतने फायदे हैं तो फिर ऐसे मौके क्यों छोड़े जायें? आप अपना काम स्वयं करके ना सिर्फ शरीर बचाते हैं बल्कि पैसे भी बचाते हैं और निर्भरता से भी बचते हैं।

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