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WHO के कुल टीकों का 70 प्रतिशत भारत से : अनुराधा पटेल

WHO के कुल टीकों का 70 प्रतिशत भारत से : अनुराधा पटेल

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने कहा कि डब्ल्यूएचओ के कुल टीकों का 70 प्रतिशत भारत से प्राप्त होता है। यही नहीं, अमेरिका 14 प्रतिशत जेनेरिक दवा भारत से मंगाता है। उन्होंने भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) द्वारा आयोजित द्वितीय नीति निर्माताओं के फोरम के उद्घाटन सत्र में देते हुए यह बात कही। भारतीय फार्माकोपिया की मान्यता को बढ़ावा देने और भारत की प्रमुख किफायती दवाओं की पहल- प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMJAY) में सहयोग के उद्देश्य से इस फोरम का आयोजन भारतीय फार्माकोपिया आयोग द्वारा स्वास्थ्य मंत्रालय के तत्वावधान में विदेश मंत्रालय के सहयोग से किया जा रहा है। फोरम में 24 देशों के नीति निर्माताओं और दवा नियामकों का एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल भाग ले रहा है।

जनऔषधि से मिला बड़ा लाभ

श्रीमती पटेल ने गुणवत्तापूर्ण दवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता और वैश्विक स्वास्थ्य समानता को सुविधाजनक बनाने में नियामक सामंजस्य के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि भारत किफायती स्वास्थ्य सेवा समाधानों के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभरा है और ज्ञान-साझाकरण, क्षमता-निर्माण और स्वास्थ्य कूटनीति के माध्यम से देशों के साथ अपनी साझेदारी को गहरा करना जारी रखता है। जन औषधि केंद्रों के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे जन औषधि केंद्र हमारे सभी नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने की भारत की प्रतिबद्धता के शानदार उदाहरण हैं। जन औषधि हमारे नागरिकों की जेब से होने वाले खर्च को कम करने के सबसे शक्तिशाली साधनों में से एक रही है।

मित्र देशों को भारत ने दी वैक्सीन

टीके उपलब्ध कराने की दिशा में भारत की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए श्रीमती पटेल ने कहा कि भारत टीकों का अग्रणी आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के कुल टीकों में से 70 प्रतिशत भारत से प्राप्त होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने वैक्सीन मैत्री पहल शुरू की और 100 से अधिक मित्र देशों को टीके की आपूर्ति की, जो वैश्विक स्वास्थ्य के प्रति भारत की गहरी जिम्मेदारी की भावना और संकट के समय में मित्र देशों की मदद करने की उसकी भूमिका को दर्शाता है।

दवा निर्माण में भारत अग्रणी

श्रीमती पटेल ने यह भी कहा कि भारत दवा निर्माण में अग्रणी बना हुआ है, खासकर जेनेरिक दवाओं की बात करें तो अमेरिका द्वारा आयातित जेनेरिक दवाओं का 14 प्रतिशत भारत से आता है, जबकि भारत में यूएस एफडीए (खाद्य एवं औषधि प्रशासन) द्वारा मान्यता प्राप्त दवा निर्माण संयंत्रों की अधिकतम संख्या भी है। उन्होंने कहा कि हमारी 70 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं को अत्यधिक विनियमित बाजारों में निर्यात किया जाता है और वैश्विक मानदंडों को पूरा करने के लिए हमारे फार्माकोपियल विनियमों की नियमित रूप से समीक्षा की जाती है।

भारतीय फार्माकोपिया को भारी समर्थन

उन्होंने कहा कि हमने डब्ल्यूएचओ के ग्लोबल बेंचमार्किंग टूल (GBT) ढांचे, परिपक्वता स्तर 3 (ML3) की स्थिति को बरकरार रखा है। दुनिया के 15 देश भारतीय फार्माकोपिया को दवा मानकों की पुस्तक के रूप में मान्यता देते हैं। क्यूबा हाल ही में भारतीय फार्माकोपिया को मान्यता देने वाला 15वां देश बना है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक नियामक कदम नहीं है, बल्कि गुणवत्ता मानकों में और अधिक स्‍पष्‍टता लाने, सुरक्षित और प्रभावी दवाओं तक पहुंच का विस्तार करने और फार्मास्यूटिकल्स में व्यापार को पहले से कहीं अधिक सुचारू बनाने की दिशा में एक कदम है। श्रीमती पटेल ने पुष्टि की कि हम संवाद और योजना के माध्यम से अपने साझेदार देशों की सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध हैं ताकि हम ‘सभी के लिए स्वास्थ्य’ के साझा लक्ष्य की दिशा में तेजी से प्रयास कर सकें।

हेल्थ पर लोगों का खर्च घटा

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि भारत “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” के दृष्टिकोण का समर्थन करता है और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध है जो हमारे प्राथमिक स्वास्थ्य लक्ष्यों में से एक है। इसे पूरा करने के लिए हमने 1.75 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए हैं जहां निःशुल्क दवाएं और चिकित्‍सा प्रदान की जाती है। उन्‍होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि 2004 में, कुल स्वास्थ्य व्यय में लोगों की जेब से किए जाने वाले खर्च का हिस्सा 70 प्रतिशत था, जो आज घटकर 40 प्रतिशत रह गया है। स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि जेनेरिक दवाओं के उत्पादन से मुफ्त दवाओं और चिकित्‍सा की उपलब्धता में वृद्धि हुई है, उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में उप-स्वास्थ्य केंद्रों पर दी जाने वाली मुफ्त दवाओं की संख्या 36 से बढ़कर 106 हो गई है। इस मौके पर आईपीसी की 15 साल की यात्रा को चिह्नित करने वाला एक स्मारक डिजिटल प्रकाशन लॉन्च किया गया।

फोरम में दुनिया के 22 देश

फोरम ने 22 देशों (लाइबेरिया, टोगो, माली, मॉरिटानिया, सिएरा लियोन, कैमरून, रवांडा, लेसोथो, एस्वातीनी, केन्या, बोत्सवाना, इथियोपिया, कोमोरोस, सेशेल्स, मेडागास्कर, पापुआ न्यू गिनी, जिम्बाब्वे, सेंट लूसिया, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस, क्यूबा, ​​बारबाडोस और चिली) के नीति निर्माताओं और वरिष्ठ दवा नियामक अधिकारियों को एक साथ लाया है, साथ ही कैरेबियन पब्लिक हेल्थ एजेंसी (CARPHA) के दो प्रतिनिधियों- जमैका और कनाडा ने वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक मूल्यवान और विश्वसनीय भागीदार के रूप में भारत की स्थिति की पुष्टि की है।

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