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COVID-19 के बाद अब CVID का खतरा

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। पिछले तीन वर्षों से कोविड का कहर झेलने के बाद फिलहाल वैश्विक स्तर पर इसका जोखिम कम हुआ है। WHO ने इसे पुष्ट भी कर दिया है। लेकिन अब कोविड जैसे लक्षण और जोखिमों के साथ नया रोग सामने आ रहा है जिसका नाम CVID रख गया है।

कमजोर इम्युनिटी की उपज

दरअसल COVID-19 और CVID, दोनों ही कमजोर इम्युनिटी की उपज हैं। CVID को कॉमन वेरिएबल इम्युनोडेफिशिएंसी कहा जाता है। यह एक प्रकार का प्रतिरक्षा प्रणाली विकार है जिसके कारण शरीर में उस प्रोटीन का स्तर कम हो जाती है जो संक्रमण से लड़ने में मदद करती है। मीडिया खबरों के मुताबिक कॉमन वेरिएबल इम्युनोडेफिशिएंसी (CVID) के कारण चूंकि शरीर की इम्युनिटी काफी कमजोर हो जाती है, ऐसे में बार-बार संक्रमण होने का खतरा हो सकता है। ऐसे लोगों में कान, साइनस और श्वसन तंत्र में बार-बार संक्रमण होते रहने के साथ पाचन संबंधी विकार, ऑटोइम्यून विकार, रक्त विकार और कैंसर का भी जोखिम रहता है। यहे आनुवांशिक रूप में भी हो सकता है या फिर प्रतिरक्षा में चूक से विकसित भी हो सकता है। इसे फिलहाल एक दुर्लभ समस्या समझा गया है। करीब 25 हजार लोगों में से एक में ये होता है। यह स्थिति बच्चों या किशोरों में भी दिखाई दे सकती है।

बार-बार संक्रमण का खतरा

CVID के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग प्रकार के हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं। चूंकि यह प्रतिरक्षा प्रणाली में कमजोरी की समस्या है ऐसे में इसके रोगियों में बार-बार संक्रमण होने का खतरा रहता है। इसके अलावा कुछ लक्षणों पर भी ध्यान देते रहना चाहिए। मसलन सांस की परेशानी, क्रोनिक खांसी, दस्त, कान और साइनस का बार-बार संक्रमित होना, निमोनिया या बार-बार फेफड़ों में संक्रमण। डायबिटिक रोगियों में यह समस्या घावों को भरने में और अधिक देरी या फिर बार-बार यूटीआई का कारण बन सकती है।

स्वस्थ आहार और दिनचर्या का पालन ही बचाव

शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि स्वस्थ आहार और दिनचर्या का पालन करके इसके जोखिमों को कम किया जा सकता है। उनके मुताबिक ज्यादातर मामलों में, आनुवंशिक उत्परिवर्तन के कारण इस समस्या का जोखिम होता है। CVID प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़े जीन में दोष के कारण होती है। इन दोषों के कारण शरीर में इम्युनोग्लोबुलिन जी (IGG) सहित इम्युनोग्लोबुलिन नामक प्रोटीन के उत्पादन की मात्रा कम हो जाती है। रक्त में IGG का स्तर कम होना शरीर के लिए संक्रमण से लड़ना मुश्किल बना सकती है।

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