नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। कुपोषण और अन्य कारणों से भारत में लगातार लोगों में विटामिन B12 की कमी बढ़ती जा रही है। पेट में बनते अत्यधिक एसिड, एंटीबायोटिक्स के प्रयोग, अत्यधिक जंक फूड और प्रिजर्वेटिव कैमिकल्स वाला खाना खाने, अधिक शराब, चाय का सेवन और आंतों में अशुद्धियां जमा होने पर उसमें मौजूद गुड बैक्टीरिया मर जाते हैं जबकि इसी से आंतों में सेराटोनिन हार्मोन्स और विटामिन बी 12 का निर्माण होता है।
विटामिन B12 : 57 फीसद लोग प्रभावित
एक रिपोर्ट के अनुसार शहरी कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले 57 फीसद से अधिक पुरुष कर्मचारियों में विटामिन B12 की कमी पाई गई है। रिपोर्ट में करीब 4,400 लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया जिसमें 3,338 पुरुष और 1,059 महिलाएं शामिल थीं। महिलाओं में भी लगभग 50 फीसद यह कमी देखी गई। विटामिन बी12 एनर्जी, ब्रेन फंक्शन और नर्वस सिस्टम के लिए बेहद जरूरी होता है लेकिन थकाऊ दिनचर्या, अनियमित खान-पान और अत्यधिक तनाव के कारण पर्याप्त पोषण न मिलने से शरीर में B12 जैसी विटामिन की कमी एक आम समस्या बनती जा रही है।
विटामिन B12 की कमी के लक्षण
- लगातार थकान और मांसपेशियों में कमजोरी
- हाथ-पैरों में झुनझुनी
- याददाश्त कमजोर होना, फोकस में कठिनाई
- मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन
- चक्कर आना और सांस फूलना
विटामिन बी 12 : गुड बैक्टीरिया का अभाव
एक्सपर्ट बताते हैं कि पेट में बनते अत्यधिक एसिड, एंटीबायोटिक्स के प्रयोग, जंक फूड और प्रिजर्वेटिव कैमिकल्स वाला खाना खाने, अधिक शराब, चाय का सेवन करने और आंतों में अशुद्धियां जमा होने पर एसिडोसिस के कारण पर वहां मौजूद विभिन्न प्रकार का गुड बैक्टीरिया मर जाता है। यही गुड बैक्टीरिया आंतों में सेराटोनिन हार्मोन्स और विटामिन बी 12 के निर्माण के लिए आवश्यक है। एसिडोसिस वाले व्यक्ति को बार बार सप्लीमेंट लेने के बावजूद विटामिन डी 3 और विटामिन बी 12 की डेफिशिएंसी बनी रहेगी जिससे हड्डियों—मांसपेशियों में खिंचाव तनाव दर्द लगातार बना रहेगा। B12 शरीर में कई सालों तक जमा होकर रह सकता है लेकिन अगर डाइट शरीर में समय पर इसकी पूर्ति नहीं करती तो को इसकी डेफिशियेंसी से कमजोरी, थकान, सर भारी होने लगेगा, शरीर बेजान और उत्साहहीन हो जाएगा। सांस लेने में तकलीफ होगी, स्किन का रंग फीका पड़ सकता है। कब्ज, दस्त, भूख कम होना या फिर गैस, नर्वस सिस्टम से जुड़ी तकलीफें होंगी। दिखाई देने में तकलीफ़ होगी। डिप्रेशन, मेमोरी लॉस और व्यवहारिक बदलाव आता है।
विटामिन बी 12 : इनका सेवन करें
- दूध, दही, अंडा, चिकन, मछली और फर्मेंटेड फूड का सेवन
- कैफीन और शराब का कम सेवन
- हल्का श्रम करें और तनाव को मैनेज करें
- भरपूर पानी पीएं और पाचन को दुरुस्त रखें
- जंक फूड, गरिष्ठ भोजन, एल्कोहल, एंटीबायोटिक्स और प्रिजर्वेटिव कैमिकल्स से बचें
- सरसों के साग की कच्ची डंठल चबा-चबाकर खाएं
- उबले चावल को रात में थोड़े ठंडे पानी डालकर छोड़ दें। सुबह उसमें दही, प्याज मिलाकर खाएं
- गाजर, चकुंदर आदि की कांजी बनाकर सेवन करें
- मशरूम का सेवन करें। यह विटामिन बी 12 के प्रमुख स्रोत हैं और आंतों के लिए वरदान भी
