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तीन दिवसीय विश्व स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन 25 अप्रैल से

तीन दिवसीय विश्व स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन 25 अप्रैल से

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। विश्व स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन (WHS) की क्षेत्रीय बैठक 25-27 अप्रैल को दिल्ली में हो रही है। यह बैठक वैश्विक स्वास्थ्य एजेंडे को आकार देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करने के लिए तैयार है। इसमें पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के एकीकरण और विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिखर सम्मेलन के मुख्य आकर्षणों में से एक सत्र का शीर्षक-“संतुलन बहाल करना: स्वास्थ्य और कल्याण के लिए पारंपरिक चिकित्सा तक पहुंच बढ़ाना” है। इस बात की प्रबल संभावना है कि यह बैठक वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगी।

सम्मेलन एक बढ़िया मौका

आयुष मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने इस आयोजन के महत्व की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की क्षेत्रीय बैठक एक सही समय पर पारंपरिक चिकित्सा पर वैश्विक संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर है। समर्पित सत्र समग्र स्वास्थ्य में बढ़ती वैश्विक रुचि को दर्शाता है। हम दिसंबर में दिल्ली में आयोजित और जामनगर में WHO-GTMC द्वारा संचालित दूसरे डब्ल्यूएचओ पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक शिखर सम्मेलन की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में, भारत की ओर से वैश्विक कल्याण के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि होती है। WHS क्षेत्रीय बैठक में मंत्री, अग्रणी वैज्ञानिक, सीईओ, संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी और नागरिक समाज के हितधारक सभी के लिए स्वस्थ जीवन के लिए अभिनव, समावेशी और टिकाऊ रास्ते तलाशने के लिए एक साथ आएंगे। पारंपरिक चिकित्सा पर समर्पित सत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से परीक्षित पारंपरिक ज्ञान को अत्याधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ जोड़ने की परिवर्तनकारी क्षमता का दोहन करना चाहता है।

सम्मेलन में प्राचीन पद्धतियों पर फोकस

मंत्रालय सूत्रों के अनुसार पारंपरिक चिकित्सा पर आयोजित होने वाले सत्र में इस बात पर गहन चर्चा की जाएगी कि प्राचीन ज्ञान पर आधारित समग्र स्वास्थ्य प्रणालियां किस तरह व्यक्ति-केंद्रित देखभाल की बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करने में मदद कर सकती हैं और स्वास्थ्य समानता में योगदान दे सकती हैं। विशेषज्ञ तकनीकी नवाचारों, साक्ष्य-आधारित अनुसंधान और विकसित हो रहे नियामक ढांचों का लाभ उठाकर सुरक्षित और प्रभावी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों तक व्यापक पहुंच को आगे बढ़ाने के अवसरों के बारे में विस्तृत चर्चा करेंगे। यह सत्र दिसंबर में दिल्ली में आयोजित होने वाले दूसरे WHO पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक शिखर सम्मेलन की अगुवाई में विशेष रूप से प्रासंगिक है।

दिसंबर में एक और सम्मेलन की तैयारी

इस बारे में आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि WHS क्षेत्रीय बैठक वैश्विक स्वास्थ्य चर्चाओं के भीतर साक्ष्य-आधारित पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है। पारंपरिक चिकित्सा पर सत्र दिसंबर में दूसरे डब्ल्यूएचओ पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक शिखर सम्मेलन के लिए मंच तैयार करता है, जिसे डब्ल्यूएचओ-जीटीएमसी द्वारा समर्थन दिया जाता है और यह वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा को आगे बढ़ाने में भारत के नेतृत्व को दर्शाता है। मालूम हो कि 2022 में आयुष मंत्रालय के माध्यम से भारत सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन के बीच एक मेजबान देश समझौते के तहत स्थापित जीटीएमसी, पारंपरिक चिकित्सा के लिए पहला और एकमात्र डब्ल्यूएचओ आउटपोस्टेड वैश्विक केंद्र है। यह वैश्विक स्वास्थ्य रणनीतियों के साथ स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों को एकीकृत करके WHO सदस्य देशों में पारंपरिक चिकित्सा के सुरक्षित, प्रभावी और टिकाऊ इस्तेमाल को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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