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गुणों का खजाना आंवला, घरेलू उपचार में लाभप्रद

गुणों का खजाना आंवला, घरेलू उपचार में लाभप्रद

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। प्रकृति से मिली चीजें स्वास्थ्य के लिए अमृत समान होती हैं। इसमें एक आंवला भी है जो न केवल बहुउपयोगी है बल्कि विटामिन सी का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी। देखने में यह वैस साधारण प्रतीत होता है, लेकिन अत्यंत लाभकारी भी है। माना जाता है कि एक आंवला चार नीबू और 30 संतरों के बराबर होता है। यह त्वचा की कांति को बनाये रखने से लेकर प्रतिरोधक क्षमता तक को मजबूत करता है। इतने गुणों के कारण ही पोषण एक्सपर्ट इसे अपने आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं। जानना जरूरी है कि इसका नियमित सेवन कितना लाभ देता है।

आंवला : कई रोगों में लाभकारी

  • बालों के रोग : आंवले का चूर्ण पानी में भिगोकर रात्रि में रख दें। सुबह इस पानी से रोजाना बाल धोने से उनकी जड़े मजबूत होंगी, उनकी सुंदरता बढ़ेगी और मेंहदी मिलाकर बालों में लगाने से वे काले हो जाते हैं।
  • पेशाब की जलन : आधा कप आंवले के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर सेवन करें। हरे आंवले का रस 50 ग्राम, शक्कर या शहद 25 ग्राम थोड़ा पानी मिलाकर सुबह-शाम पीएं। यह एक खुराक का तोल है। इससे पेशाब खुलकर आयेगा। जलन और कब्ज की शिकायत दूर होगी।
  • हकलाहट : बच्चे को एक ताजा आंवला रोजाना कुछ दिनों तक चबाने के लिये दें। इससे जीभ पतली, आवाज साफ, हकलाना और तुतलापन दूर होता है। हकलाने और तुतलाने पर कच्चे, पके हरे आंवले को कई बार चूस सकते हैं।
  • रक्त स्राव : स्राव वाले स्थान पर आंवले का ताजा रस लगाएं, बंद हो जाएगा।
  • धातुवर्द्धक : एक चम्मच घी में दो चम्मच आंवले का रस मिलाकर दिन में तीन बार कम-से-कम सात दिनों तक ले सकते हैं।
  • पेशाब रुकने पर : कच्चे आंवलों को पीसकर बनी लुग्दी पेडू पर लगाएं।
  • नेत्र रोग में : लगभग 20-50 ग्राम आंवले अच्छी तरह से पीसकर दो घंटे तक आधा किलो पानी में उबालकर उस जल को छानकर दिन में तीन बार आंखों में डालने से आंखों के रोगों में बहुत लाभ होता है। वृक्ष पर लगे आंवले में छेद करने से जो द्रव पदार्थ निकलता है, उसका आंख के बाहर चारों ओर लेप करने से आंख के सुष्क भाग की सूजन मिटती है। आंवले के रस को आंखों में डालने अथवा सहजन के पत्तों का रस चार ग्राम तथा सेंधा नमक लगभग एक ग्राम का चौथा भाग एक साथ मिलाकर आंखों में लगाने से शुरुआती मोतियाबिंद नष्ट होता है।
  • सुन्दर बालों के लिए : सूखे आंवले 30 ग्राम, बहेड़ा 10 ग्राम, आम की गुठली की गिरी 50 ग्राम और लौह चूर्ण 10 ग्राम, रात भर कढ़ाई में भिगोकर रखें। बालों पर इसका रोजाना लेप करने से छोटी आयु में सफेद हुए बाल कुछ ही दिनों में काले पड़ जाते हैं। आंवले, रीठा, शिकाकाई—तीनों का काढ़ा बनाकर सिर धोने से बाल मुलायम, घने और लम्बे होते हैं। आंवले और आम की गुठली की मज्जा को साथ पीसकर सिर में लगाने से मजबूत लंबे केश पैदा होते हैं।
  • आवाज बैठना : अजमोद, हल्दी, आंवला, यवक्षार, चित्रक इनको समान मात्रा में मिलाकर, एक से दो ग्राम चूर्ण को दो चम्मच मधु और एक चम्मच घी के साथ चाटने से आवाज का बैठना ठीक हो जाता है। कच्चे आंवले बार-बार चूस-चूसकर खाएं।
  • हिचकी : पिपली, आंवला, सोंठ इनके दो-दो ग्राम चूर्ण में 10 ग्राम खांड तथा एक चम्मच शहद मिलाकर बार-बार प्रयोग करने से हिचकी तथा श्वास रोग शांत होते हैं। आंवले के 10-20 ग्राम रस और दो-तीन ग्राम पीपल का चूर्ण, दो चम्मच शहद के साथ दिन में सुबह और शाम सेवन करने से हिचकी में लाभ होता है। 10 ग्राम आंवले के रस में तीन ग्राम पिप्पली चूर्ण और पांच ग्राम शहद मिलाकर चाटने से हिचकियों से राहत मिलती है। आंवले के मुरब्बे की चाशनी के सेवन से हिचकी में बहुत लाभ होता है।
  • उल्टी : उल्टी में आंवले का 10-20 मिलीलीटर रस, 5-10 ग्राम मिश्री मिलाकर देने से आराम होता है। इसे दिन में दो-तीन बार लेना चाहिए। केवल इसका चूर्ण 10-50 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ भी दिया जा सकता है।
  • वात, पित्त, कफ दोष : इससे पैदा होने वाली उल्टी में आंवला तथा अंगूर को पीसकर 40 ग्राम खांड, 40 ग्राम शहद और 150 ग्राम जल मिलाकर कपड़े से छानकर पीना चाहिए। आंवले के 20 ग्राम रस में एक चम्मच मधु और 10 ग्राम सफेद चंदन का चूर्ण मिलाकर पिलाने से वमन (उल्टी) बंद होती है। आंवले के रस में पिप्पली का बारीक चूर्ण और थोड़ा सा शहद मिलाकर चाटने से उल्टी आने के रोग में लाभ होता है।
  • पेशाब में कष्ट या जलन  : आंवले की ताजी छाल के 10-20 ग्राम रस में दो ग्राम हल्दी और दस ग्राम शहद मिलाकर सुबह-शाम पिलाने से यह दिक्कत दूर होती है। आंवले के 20 ग्राम रस में इलायची का चूर्ण डालकर दिन में दो-तीन बार पीने से भी फायदा होता है।
  • दस्त लगना : रक्त पित्त रोग में, विशेषकर जिन रोगियों को विरेचन कराना हो, उनके लिए आंवले के 20-40 मिलीलीटर रस में पर्याप्त मात्रा में शहद और चीनी को मिलाकर सेवन कराना चाहिए।
  • बवासीर : आंवलों को अच्छी तरह से पीसकर एक मिट्टी के बरतन में लेप कर देना चाहिए। फिर उस बरर्तन में छाछ भरकर उस छाछ को रोगी को पिलाने से बवासीर में लाभ होता है। बवासीर के मस्सों से अधिक खून के बहने में तीन से आठ ग्राम आंवले के चूर्ण का सेवन दही की मलाई के साथ दिन में दो-तीन बार करना चाहिए। सूखे आंवलों का चूर्ण 20 ग्राम लेकर 250 ग्राम पानी में मिलाकर मिट्टी के बर्तन में रात भर भिगोकर रखें। दूसरे दिन सुबह उसे हाथों से मलकर छान लें तथा छने हुए पानी में पांच ग्राम चिरचिटा की जड़ का चूर्ण और 50 ग्राम मिश्री मिलाकर पीयें। इससे बवासीर कुछ दिनों में ही ठीक हो जाती है और मस्से सूखकर गिर जाते हैं। सूखे आंवले को बारीक पीसकर प्रतिदिन सुबह-शाम एक चम्मच दूध या छाछ में मिलाकर पीने से खूनी बवासीर ठीक होती है। आंवले का बारीक चूर्ण एक चम्मच, एक कप मट्ठे के साथ तीन बार लें। आंवले का चूर्ण एक चम्मच दही या मलाई के साथ दिन में तीन बार खायें।
  • रक्त की गांठे : आंवले के रस में कालीमिर्च डालकर पीने से यह समस्या दमर होती है।
  • वीर्य विकार : आंवला, हरड़, बहेड़ा, नागर-मोथा, दारू-हल्दी, देवदारू—इन सबको समान मात्रा में लेकर इनका काढ़ा बनाकर 10-20 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम रोगी को पिला दें।
  • पित्तदोष : आंवले का रस, शहद, गाय का घी इन सभी को बराबर मात्रा में लेकर आपस में घोटकर लेने से पित्त दोष तथा रक्त विकार के कारण नेत्र रोग ठीक होते हैं।
  • पाचन विकार : पकाये हुए आंवलों को कद्दूकस कर लें, उसमें उचित मात्रा में कालीमिर्च, सोंठ, सेंधा नमक, भुना जीरा और हींग मिलाकर छाया में सुखाकर सेवन करें। इससे अरुचि, अपच व मलावरोध दूर हो जाता है तथा भूख में वृद्धि होती है।
  • तेज दस्त : पांच-6 आंवलों को जल में पीसकर रोगी की नाभि के आसपास उनकी थाल बचाकर लेप कर दें और थाल में अदरक का रस भर दें। इस प्रयोग से अत्यंत भयंकर नदी के वेग के समान अतिसार का भी नाश होता है।
  • योनि की जलन, सूजन और खुजली : आंवले का रस 20 ग्राम, 10 ग्राम शहद और पांच ग्राम मिश्री को मिलाकर मिश्रण बना लें, फिर इसी को पीने से योनि की जलन समाप्त हो जाती है। सुजाक : आंवले के दो से पांच ग्राम चूर्ण को एक गिलास जल में मिलाकर पीने से और उसी जल से मूत्रेन्दिय में पिचकारी देने से सूजन व जलन शांत होती है और धीरे-धीरे घाव भरकर पीव आना बंद हो जाता है।
  • जोड़ों का दर्द : 20 ग्राम सूखे आंवले और 20 ग्राम गुड़ को 500 ग्राम पानी में उबालें, जब यह 250 ग्राम शेष तो इसे छानकर सुबह-शाम पिलाने से गठिया में लाभ होता है परन्तु इलाज के दौरान नमक छोड़ देना चाहिए। सूखे आंवले को कूट-पीस लें और उसके चूर्ण से दोगुनी मात्रा में गुड़ मिलाकर बेर के आकार की गोलियां बना लें। तीन गोलियां रोजाना लेने से जोड़ों का खत्म होता है।
  • खाज-खुजली : आंवले की गुठली को जलाकर उसकी राख बना लें और फिर उस राख में नारियल का तेल मिलाकर शरीर के जिस भाग में खुजली हो वहां पर इसको लगाने से खुजली जल्दी दूर हो जाती है।
  • थकान : आंवले के 100 ग्राम काढ़े में 10 ग्राम गुड़ डालकर थोड़ा-थोड़ा पीने से थकान, दर्द, रक्तपित्त (खूनी पित्त) या पेशाब करने में कष्ट होना) आदि रोग ठीक होते है।
  • पित्तरोग : ताजे फलों का मुरब्बा विशेष रूप से आंवले का मुरब्बा एक-दो पीस सुबह खाली पेट खाने से पित्त के रोग मिटते हैं।
    लम्बी आयु के लिए : केवल आंवले के चूर्ण को ही रात के समय में घी या शहद अथवा पानी के साथ सेवन करने से आंख, कान, नाक आदि इन्द्रियों का बल बढ़ता है, भोजन को पचाने की क्रिया तेज होती है तथा यौवन प्राप्त होता है।
  • गर्मी से बचाव : गर्मी में आंवले का शर्बत पीने से बार-बार प्यास नहीं लगती तथा गर्मी के रोगों से बचाव होता है।
    पुराना बुखार : मूंग की दाल में सूखा आंवला डालकर पकाकर खाएं।
  • खून की कमी : आंवले का चूर्ण 3 से 6 ग्राम प्रतिदिन शहद के साथ लेने से खून में वृद्धि होती है।
  • हृदय एवं मस्तिष्क की निर्बलता : आधा भोजन करने के बाद हरे आंवलों का रस 35 ग्राम पानी मिलाकर पी लें, फिर आधा भोजन करें। इस प्रकार लगभग 20-25 दिन सेवन करने से हृदय तथा मस्तिष्क सम्बन्धी दुर्बलता दूर होकर स्वास्थ्य सुधर जाता है।
  • त्वचा सौन्दर्यवर्धक : पिसा हुआ आंवला उबटन की तरह मलने से त्वचा साफ और मुलायम रहती है तथा चर्म रोग नहीं होते हैं।
  • आंखों के आगे अंधेरा छाना : आंवलों का रस पानी में मिलाकर सुबह-शाम चार दिन पीने से लाभ होता है।
    चक्कर आना : गर्मियों में चक्कर आते हो, जी घबराता हो तो आंवले का शर्बत पीयें। आंवले के मुरब्बे को चांदी के एक बर्क में लपेटकर सुबह के समय खाली पेट खाने से चक्कर आना बंद हो जाता है।
  • झुर्रियां व झांई : रोजाना सुबह-शाम चेहरे पर किसी भी तेल की धीरे-धीरे मालिश करें। रात को एक कांच का गिलास पानी से भर कर इसमें दो चम्मच पिसा हुआ आंवला भिगो दें और सुबह पानी छानकर चेहरा रोज इस पानी से धोयें। ऐसा करते रहने से चेहरे की झुर्रियां व झांई दूर हो जायेगी।
  • दांतों का दर्द : आंवले के छाल और पत्तों को पानी के साथ उबाल लें। इसके पानी से प्रतिदिन दो बार कुल्ला करने से दांतों का दर्द नष्ट होता है। सूखे आंवले का चूर्ण बनाकर इसमें थोड़ा-सा सेंधानमक मिलाकर मंजन बना लें। इससे दांतों पर रोजाना मंजन करने से दांत मजबूत होते हैं तथा दर्द में आराम रहता है।
  • बालों का सफेद होना : आंवले के चूर्ण का लेप बनाएं। उसे रोजाना सुबह सिर के बालों में अच्छी तरह लगा लें। साबुन का प्रयोग न करें। इस प्रयोग से सफेद बाल काले हो जायेंगे।
  • काली खांसी : 10-10 ग्राम आंवला, छोटी पीपल, सेंधानमक, बहेड़े का छिलका, बबूल के गोंद को पानी के साथ पीसकर और छानकर आधा ग्राम शहद में मिलाकर दिन में तीन बार प्रयोग करने से गले की खराबी से उठने वाली खांसी ठीक हो जाती है।

परामर्श : वैसे किसी रोग में आंवला के सटीक उपयोग के लिए निकट के आयुर्वेद एक्सपर्ट से राय ले लेना ज्यादा उपयोगी होगा।

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