नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। पिछले एक महीने में दिल के दौरे से कर्नाटक के हासन जिले में 21 मौतों की सूचना के बाद मचे हड़कंप और कोविडरोधी वैक्सीन पर संदेह का निराकरण करते हुए ICMR-AIIMS ने अपनी स्टडी के हवाले से कहा है कि यह सब लाइफस्टाइल की गड़बड़ी से हो रहा है। इसमें वैक्सीन की कोई भूमिका नहीं है। हासन में हुई सभी 21 मौतें 30 से 55 वर्ष की आयु के बीच की थी।
अचानक मौत के कई और कारण
मालूम हो कि हासन में की खबर के पहले से भी अचानक मौतों की बात कुछ सालों में बढ़ गयी है। हाल ही बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री शेफाली जरीवाला की महज 42 वर्ष की आयु में हार्ट अटैक से ही मृत्यु की बात दुनिया भर में फैली। इसके अलावा पंजाब में क्रिकेट खेल रहे एक खिलाड़ी की भी पिच पर ही हार्ट अटैक से मौत की खबर भी सामने आई। अब PIB पर एक रिपोर्ट जारी हुई है। इसमें बताया गया कि ICMR और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) की ओर से की गई स्टडी में ये पता चला है कि भारत में COVID-19 टीके काफी सुरक्षित और प्रभावी रहे हैं। इनके दुष्प्रभावों की कोई भी बात बहुत कम देखने को मिली है। इस रिपोर्ट के अनुसार, अचानक हृदयगति रुकने से हुई मौतें आनुवंशिक परेशानियों, आधुनिक जीवनशैली, पहले से मौजूद बीमारियाँ और कोविड के बाद हुई जटिलताओं में से कई कारणों से हो सकती हैं।
19 राज्यों में की गई स्टडी
ICMR और NCDC ने 18 से 45 वर्ष की उम्र के युवाओं में अचानक होने वाली मौतों के कारणों को समझने के लिए रिसर्च शुरू की है। इसके तहत उन्होंने पहले के और वर्तमान जाँचों को भी शामिल किया। इसके तहत 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 47 क्षेत्रीय अस्पतालों में अध्ययन किया। इसके तहत ICMR के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (NII) ने ‘भारत में 18-45 वर्ष की आयु के वयस्कों में अचानक होने वाली मौतों से जुड़े कारक’ शीर्षक पर आधारित एक स्टडी की। मई से अगस्त 2023 तक इस स्टडी में उन लोगों को शामिल किया गया जो सामने से स्वस्थ दिख रहे थे लेकिन अक्टूबर 2021 और मार्च 2023 के बीच अचानक उनकी मृत्यु हो गई। स्टडी में ये बात निकल कर सामने आई कि कोविड-19 वैक्सीन से युवाओं और वयस्कों में अचानक होने वाली मौतों का जोखिम नहीं बढ़ता है।
वैक्सीन से हार्ट अटैक का पैटर्न नहीं बदला
इसी तरह ICMR की वित्तीय सहायता के साथ AIIMS ने भी एक अध्ययन किया जा रहा है। इसका विषय ‘युवाओं में अचानक होने वाली मौतों के कारणों का पता लगाना’ रखा गया है। इस अध्ययन के शुरुआती विश्लेषण से पता चला कि युवाओं में अचानक होने वाली मौतों का असल कारण हार्ट अटैक या दिल का दौरा पड़ने से होता है। इन मौतों के बारे में सबसे अहम बात ये है कि हार्ट अटैक के पैटर्न में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। यानी वैक्सीन से जुड़े किसी तरह के बदलाव वाले पैटर्न नहीं देखने को मिला। हालाँकि मरने वालों में आनुवंशिक बदलाव जरूर देखे गए हैं। यह अध्ययन अब भी जारी है। इसमें अन्य पहलू भी सामने आ सकते हैं।
बिना वैज्ञानिक आधार की बातें
इस स्टडी के आधार पर वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 के लिए बचावरोधी वैक्सीन को अचानक होने वाली मौतों से जोड़ने वाले बयान झूठे और भ्रामक हैं। इनके बयानों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। उसके कारण आम लोगों का भरोसा वैक्सीन पर कम हो रहा है जो हेल्थ इकोसिस्टम को भी कमजोर करेगा। ICMR और NCDC अचानक होने वाली मौतों के पीछे के कारणों को समझने के लिए अलग-अलग शोध दृष्टिकोणों के जरिए दो अध्ययन किए गए हैं-पहला, पिछले डेटा पर आधारित और दूसरा, वर्तमान की जांच पर आधारित। ICMR के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (NII) द्वारा किए गए पहले अध्ययन का शीर्षक था ‘भारत में 18-45 वर्ष की आयु के वयस्कों में अचानक होने वाली मौतों से जुड़े कारक-एक बहुकेंद्रित अध्ययन।’ निष्कर्षों से साबित हुआ है कि कोविड-19 टीकाकरण से युवा वयस्कों में अचानक होने वाली मौतों का जोखिम नहीं बढ़ता है। उसने कहा है कि भारत सरकार अपने नागरिकों के कल्याण के लिए साक्ष्य-आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए प्रतिबद्ध है।
मौतों पर फैलाई गई भ्रामक बातें
2019 में शुरू हुई कोरोना महामारी में दुनिया भर में अपना कहर बरपाया। रिपोर्ट के अनुसार कई देश अब तक कोरोना के नए वेरिएंट और उसकी भयावहता से जूझ रहे हैं। कोरोना के मामले शुरू होने के बाद इससे बचाव के लिए वैक्सीन तैयार की गई जिसके कारण लाखों लोगों की जान भी बची। इस बीच 2021 से कई युवाओं की अचानक मौत होने लगी। ज्यादातर मामलों में कहा गया कि मौत का कारण हार्ट अटैक है। धीरे-धीरे इन मौतों के लिए कोरोना वैक्सीन को जिम्मेदार ठहराया जाने लगा। ज्यादातर लोगों ने यह मान लिया कि कोरोना वैक्सीन लगाए जाने के बाद से ही इन मौतों में इजाफा में देखा गया है।
एक निर्माता की बात से भी उलझन बढ़ी
ध्यान देने की बात यह है कि महामारी काल के बाद ही इसको लेकर कोविशील्ड बनाने वाली कंपनी Astrazeneca ने 2024 में ब्रिटिश कोर्ट में यह कबूल किया था कि उनकी वैक्सीन के साइड इफेक्ट हैं और इससे हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक भी हो सकता है। इसके बाद तो मानो कॉविड वैक्सीन के नाम पर लोगों को डराए जाने का खेल चरम पर आ गया।
