स्वराज विजय
नई दिल्ली । काइवा टेक्नोलॉजी द्वारा विकसित की जा रही एलेक्जेंड्रा रोबोट या रोबोट की खोज दुनिया भर में हो रही है। कहा जा रहा है कि यह तकनीक कृत्रिम गर्भाधान से पैदा होने वाले बच्चे को जन्म देने की क्षमता रखती है। दावा किया जा रहा है कि यह तकनीक विशेष रूप से बांझपन से स्केटिंग करने वाले दिग्गजों और अन्य लोगों के लिए विकल्प प्रदान करने का लक्ष्य बताती है जो जैविक गर्भावस्था से बचना चाहते हैं। हालाँकि कृत्रिम गर्भाधान एक क्रांतिकारी तकनीक है, जो मानव भ्रूणहत्या को माँ के गर्भ के बाहर विकसित करने की क्षमता प्रदान करती है। लेकिन यह तकनीक कई नैतिक सिद्धांतों पर सवाल उठा रही है।
रोबोट गर्भाधान के नैतिक पक्ष बहुमूत्र
कृत्रिम गर्भाधान के नैतिक सिद्धांत और बहुसांख्यिक हैं। यह तकनीक बाँझपन, मातृ स्वास्थ्य और चिकित्सा अनुसंधान में क्रांति ला सकती है, लेकिन इसके साथ मानव जीवन की गरिमा, लैंगिक समानता, सामाजिक विषमता और सांस्कृतिक लोकतंत्र जैसे गंभीर प्रश्न भी जुड़े हुए हैं। इस तकनीक के विकास और उपयोग के लिए वैश्विक स्तर पर नैतिक आचरण, कानूनी मानक और सामाजिक सहमति की आवश्यकता होगी। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि इसका उपयोग मानवता के हित के लिए हो, न कि शोषण या अभाव को बढ़ाने के लिए।
नैतिक सिद्धांत पर कई प्रश्न…
1. मानव जीवन की गरिमा और भ्रूण की नैतिक स्थिति
कृत्रिम गर्भाधान में विकसित भ्रूण को मानव जीवन के रूप में कब माना जाए, यह बहस है। गर्भावस्था के प्रारंभ से ही पूर्ण मानव अधिकार क्या है? यह भ्रूणहत्या हत्या अनुसंधान से संबंधित सांस्कृतिक-शैक्षणिक बहसें और सामूहिक रचनाएँ हैं।
प्राकृतिक बनाम कृत्रिम: कुछ लोग तर्क दे रहे हैं कि गर्भावस्था एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसे कृत्रिम रूप से दोहराना मानव जीवन की गरिमा को कम कर सकता है। यह धार्मिक और सांस्कृतिक विश्वासों से भी पवित्र है, जो प्राकृतिक उत्पत्ति को पवित्र मानते हैं।
2. मातृ-भ्रूण संबंध का प्रभाव
मातृ बंधन (मातृ बंधन): प्राकृतिक गर्भावस्था में मां और भ्रूण के बीच जैविक और संबंध विकसित होता है, जो हार्मोन और शारीरिक संयोजन से प्रेरित होता है। कृत्रिम गर्भाधान इस संबंध को प्रभावित कर सकता है, जिससे मां और बच्चे के बीच की दूरी का खतरा हो सकता है।
माता-पिता की भूमिका: इस तकनीक से माता-पिता की ऐतिहासिक विरासत को बदला जा सकता है, जिससे परिवार की संरचना और सामाजिक प्रतिष्ठा पर सवाल उठाया जा सकता है।
3. लैंगिक विशेषताएं और महिलाओं की भूमिका
महिलाओं का स्वावलंबन: कुछ नारीवादी तर्क दिए गए हैं कि कृत्रिम गर्भाधान महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान शारीरिक और सामाजिक भार से मुक्त किया जा सकता है, जिससे लैंगिक समानता को बढ़ावा मिल सके। हालाँकि, एंड्रिया ड्वोर्किन जैसे अन्य आलोचकों ने चेतावनी दी है कि यह तकनीक महिलाओं की भूमिका को अप्रासंगिक बना सकती है, उनकी सामाजिक स्थिति में देरी हो सकती है।
शोषण का खतरा: यदि कृत्रिम गर्भाधान का व्यवसाय होता है, तो गरीब या वंचित समूह की महिलाओं पर दबाव डाला जा सकता है कि वे जन्म प्रक्रिया को पूरी तरह से छोड़ सकते हैं, जिससे सामाजिक असहिष्णुता बढ़ सकती है।
4. सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति
कृत्रिम गर्भाधान की कीमत: कृत्रिम गर्भाधान की कीमत (जैसे, चीन में प्रस्तावित 100,000 युवा, करीब 12 लाख रुपये, कीमत) इसे केवल अमीर लोगों के लिए आसानी से बनाया जा सकता है। इससे सामाजिक वृद्धि बढ़ सकती है, जहां केवल उच्च वर्ग ही इस तकनीक का लाभ उठा सके।
व्यावसायिक शोषण: व्यावसायिक शोषण (जैसे सरोगेसी उद्योग में देखा गया) नैतिक रूप से समस्याग्रस्त हो सकता है। बच्चों को कृत्रिम उत्पाद के रूप में देखने से खतरा बढ़ सकता है।
5. सरोगेसी और कानूनी चुनौतियाँ
सरोगेसी का विकल्प: कृत्रिम गर्भाधान सरोगेसी की आवश्यकता कम हो सकती है, जो कई देशों में अवैध या असंवैधानिक है। हालाँकि, यह नया कानूनी सवाल उठाता है, जैसे कृत्रिम गर्भाधान में विकसित बच्चे की कानूनी स्थिति और माता-पिता का अधिकार।
14 दिन का नियम: कई देशों (जैसे चीन और ब्रिटेन) में मानव भ्रूणहत्या को 14 दिन से अधिक कृत्रिम रूप से विकसित करने पर प्रतिबंध है। कृत्रिम गर्भाधान के इस नियम का पालन किया जा सकता है, जिसके लिए नए कानूनी परिवर्तन की आवश्यकता होगी।
6. उत्पत्ति का सिद्धांत
डिज़ाइनर बेबीज़: कृत्रिम गर्भाशय जेनेटिक इंटरफेरेंस (जैसे CRISPR) को आसानी से बनाया जा सकता है, जिससे डिज़ाइनर बेबीज़ (विशेष गुण वाले बच्चे) के बनने की संभावना बढ़ सकती है। यह नैतिक रूप से समस्याग्रस्त है क्योंकि इससे आनुवंशिक भेदभाव और सामाजिक दृष्टिकोण को बढ़ावा मिल सकता है।
जनसंख्या नियंत्रण: कुछ सरकारी संगठन या संगठन इस तकनीक के उपयोग के लिए सूची या चयन कर सकते हैं, जैसा कि इतिहास में यूजीनिक्स (यूजीनिक्स) के साथ हुआ था।
7. नारियल स्वास्थ्य प्रभाव
बच्चों का स्वास्थ्य: कृत्रिम गर्भाधान में विकसित बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव अज्ञात हैं। प्राकृतिक गर्भावस्था में माँ से भ्रूण को मिलने वाले हार्मोन, प्रतिरक्षा कारक और अन्य जैविक तत्वों को पूरी तरह से दोहराना मुश्किल हो सकता है।
मनोवैज्ञानिक प्रभाव: ऐसे बच्चों के मनोवैज्ञानिक विकास पर प्रभाव, विशेष रूप से उनकी पहचान और माता-पिता के साथ संबंध, एक समाधान प्रश्न है।
8. धार्मिक एवं सांस्कृतिक आक्षेप
धार्मिक दृष्टिकोण: कई धार्मिक समुदाय (जैसे हिंदू, इस्लाम, ईसाई) गर्भावस्था को एक पवित्र और प्राकृतिक प्रक्रिया मानते हैं। कृत्रिम गर्भाधान को ईश्वर की इच्छा के विरुद्ध या अप्राकृतिक माना जा सकता है, जिससे इसका विरोध हो सकता है।
सांस्कृतिक मूल्य: कुछ नमूने में राष्ट्र और गर्भावस्था सामाजिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इस तकनीक के विपरीत सांस्कृतिक वास्तुकला में बदलाव आ सकते हैं।
9. पर्यावरण एवं सामाजिक संरचना पर प्रभाव
परिवार की संरचना: कृत्रिम पारंपरिक परिवार की संरचना में बदलाव हो सकते हैं क्योंकि जन्म अब जैविक माँ पर स्थिर नहीं रहेगा। यह सामाजिक और पारिवारिक सलाहकारों को प्रभावित कर सकता है।
अंतरिक्ष अनुसंधान: भविष्य में अंतरिक्ष यात्रा या अन्य निशानों के लिए बस यह तकनीक उपयोगी हो सकती है, लेकिन यह मानव की प्राकृतिक उत्पत्ति प्रक्रिया को अप्रासंगिक बना सकती है।
10. नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण
डेटा और सुरक्षा: कृत्रिम गर्भाधान में भ्रूण की निगरानी के लिए उन्नत तकनीक (जैसे कि बंधक) का उपयोग किया जाएगा, जिससे डेटा सुरक्षा और सुरक्षा के प्रश्न उठ सकते हैं।
सरकारी हस्तक्षेप: सरकारी इस तकनीक के उपयोग को नियंत्रित करने या विशिष्ट दस्तावेज़ों को लागू करने के लिए किया जा सकता है, जिससे व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर ख़तरा पैदा हो सकता है।
साभार
