अनुराग अनुभव
नयी दिल्ली। पानी जिंदगी की बुनियादी जरूरत है लेकिन आज भी करोड़ों लोग ऐसे हैं, जिन्हें पीने का साफ पानी नहीं उपलब्ध है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) और यूनिसेफ ने विश्व जल सप्ताह 2025 के मौके पर एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें बताया गया है कि दुनिया के हर चार में से एक व्यक्ति के पास आज भी पीने का साफ पानी नहीं है। यानी दुनिया के करीब 2.1 अरब लोग आज भी असुरक्षित और गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि दुनियाभर में 10.6 करोड़ लोग अब भी सतही स्रोतों (जैसे नदियों, तालाबों, झीलों) से पानी पीते हैं। इस तरह के पानी से संक्रमण और बीमारियों का खतरा बहुत ज्यादा होता है। भारत के संदर्भ में देखें तो, कई शहरों में नल से पानी तो आता है लेकिन उसकी क्वालिटी पर भरोसा नहीं किया जा सकता। छोटे कस्बों और गांवों में कुएं और हैंडपंप पर निर्भरता अब भी है, जिनमें आर्सेनिक, फ्लोराइड और बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा रहता है। रिपोर्ट बताती है कि हर साल लाखों मौतें सिर्फ असुरक्षित पानी और खराब सैनिटेशन से जुड़ी बीमारियों के कारण होती हैं।
दूषित पानी से बीमारियां
- डायरिया और उल्टी-दस्त: इसका खतरा बच्चों को ज्यादा होता है। डिहाइड्रेशन के कारण कई बार सामान्य लगने वाली ये समस्याएं जानलेवा साबित हो सकती हैंं।
- हैजा (Cholera): बाढ़ और बारिश के मौसम में कालरा या हैजा तेजी से फैलता है।
- टाइफाइड: लंबे समय तक दूषित पानी पीने से टाइफाइड का खतरा होता है। ये भी कई बार गंभीर और खतरनाक हो सकता है।
- हेपेटाइटिस A और E: ये दोनों लिवर से जुड़ी बीमारियां हैं, जो गंदा पानी से फैलती हैं। WHO का अनुमान है कि हर साल 8 लाख से ज्यादा लोग असुरक्षित पानी और खराब सैनिटेशन की वजह से डायरिया जैसी बीमारियों से जान गंवाते हैं।
सुरक्षित पानी के लिए क्या करें?
अब सवाल ये है कि हम अपनी और परिवार की सुरक्षा कैसे करें? इसके लिए ये हैं कुछ आसान लेकिन जरूरी कदम।
1. WHO के अनुसार पानी को उबालना सबसे सस्ता और असरदार तरीका है।
2. फिल्टर/RO का इस्तेमाल करें लेकिन समय-समय पर सर्विस और फिल्टर बदलना जरूरी है।
3. पानी की टंकी साफ रखें। टंकी की सफाई न करने से कीचड़ और बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं।
4. बरसात में सावधानी बरतें। इस मौसम में दूषित पानी से बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
5. बच्चों और बुजुर्गों पर ध्यान दें। ये बीमारियों से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
सिर्फ हेल्थ नहीं, इकॉनमी पर भी असर
WHO की रिपोर्ट के मुताबिक खराब पानी और सैनिटेशन से जुड़ी बीमारियों का बोझ हेल्थ सिस्टम और देशों की अर्थव्यवस्था दोनों पर भारी पड़ता है। बीमारियों के इलाज में लगने वाला पैसा और काम से छुट्टी लेने के कारण होने वाला नुकसान मिलाकर ये बोझ अरबों डॉलर का होता है। भारत जैसे विकासशील देश में ये स्थिति और गंभीर हो जाती है। कुल मिलाकर WHO और यूनिसेफ की रिपोर्ट हमें एक सख्त चेतावनी देती है कि पानी सिर्फ उपलब्ध होना काफी नहीं है, बल्कि सुरक्षित होना भी जरूरी है। आज भी अरबों लोग सुरक्षित पानी और सैनिटेशन से वंचित हैं। अगर हम घर और समाज के स्तर पर सतर्क नहीं हुए तो डायरिया, हैजा और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियां और तेजी से फैलेंगी। याद रखिए, साफ और सुरक्षित पानी ही सेहत की असली कुंजी है।
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