नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। आयुष मंत्रालय ने आज अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), गोवा में 10वां राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस समारोह मनाया। इस कार्यक्रम में गोवा के राज्यपाल अशोक गजपति राजू, गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत, केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव और केंद्रीय विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
आयुर्वेद दिवस एक राष्ट्रीय अनुष्ठान
इस अवसर पर गोवा के राज्यपाल अशोक गजपति राजू ने आयुर्वेद के वैश्विक विकास का उल्लेख किया और कहा कि एक दशक से भी कम समय में, आयुर्वेद दिवस एक राष्ट्रीय अनुष्ठान से एक वैश्विक स्वास्थ्य आंदोलन में विकसित हो गया है। उन्होंने बताया कि अब 150 से ज़्यादा देश इस दिवस को मनाते हैं और आयुर्वेद को न केवल एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के रूप में, बल्कि एक व्यापक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के रूप में मान्यता देते हैं। श्री राजू ने इस वर्ष के विषय, “लोगों और ग्रह के लिए आयुर्वेद” की प्रशंसा करते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के लिए समय अनुसार प्रासंगिक बताया। उन्होंने आयुर्वेदिक ज्ञान की प्रामाणिकता को बनाए रखने के महत्व पर बल दिया और नमस्ते पोर्टल तथा आयुष एचएमआईएस जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का लाभ उठाया, जो पहुँच और साक्ष्य-आधारित अभ्यास को बढ़ा रहे हैं।
औषधीय पौधों से गोवा समृद्ध
गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने मोटापा, मधुमेह और तनाव जैसी बढ़ती जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से निपटने में आयुर्वेद की समकालीन प्रासंगिकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि दिनचर्या और ऋतुचर्या की समय-परीक्षित अवधारणाएँ निवारक स्वास्थ्य सेवा के लिए स्थायी आदर्श प्रदान करती हैं। मुख्यमंत्री ने गोवा की समृद्ध जैव विविधता, विशेष रूप से पश्चिमी घाट और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रकाश डाला, जहाँ पौराणिक आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णित कई औषधीय पौधे पाए जाते हैं। उन्होंने वैश्विक आयुर्वेदिक अर्थव्यवस्था में गोवा की स्थिति को मज़बूत करने के लिए इन पौधों पर शोध, संरक्षण और व्यावसायिक खेती बढ़ाने का आह्वान किया। डॉ. सावंत ने एक एकीकृत कैंसर विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए गोवा सरकार, टाटा मेमोरियल सेंटर और एआईआईए गोवा के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की घोषणा की।
आयुर्वेद को वैश्विक मान्यता
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने समग्र स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के रूप में आयुर्वेद की बढ़ती वैश्विक मान्यता पर प्रकाश डाला। उन्होंने आयुर्वेद दिवस के लिए 23 सितंबर को स्थायी तिथि के रूप में निर्धारित करने के निर्णय को ऐतिहासिक बताया, जो शरद विषुव के साथ मेल खाता है, जो प्रकृति में संतुलन का प्रतीक है और आयुर्वेदिक दर्शन के मूल में है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष का विषय आयुर्वेद को न केवल एक स्वास्थ्य विज्ञान के रूप में, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य और स्थिरता के एक ढाँचे के रूप में स्थापित करने की मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। श्री जाधव ने पिछले साल आयुर्वेद दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए “देश का स्वास्थ्य परीक्षण अभियान” को मिली ज़बरदस्त प्रतिक्रिया पर प्रकाश डाला। 1.29 करोड़ से ज़्यादा नागरिकों ने आयुर्वेदिक मापदंडों का उपयोग करके स्वास्थ्य आकलन में हिस्सा लिया, जिसमें छात्रों, शिक्षकों और डॉक्टरों सहित 1.8 लाख से ज़्यादा स्वयंसेवकों का सहयोग रहा। इस अभियान ने पाँच गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए।
वैश्विक चुनौतियों में भी प्रासंगिक
केंद्रीय विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने गैर-संचारी रोगों, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और पर्यावरणीय क्षरण जैसी बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में आयुर्वेद की बढ़ती प्रासंगिकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक जीवन, पादप-आधारित उपचारों और निवारक देखभाल पर ज़ोर देने वाला आयुर्वेद, व्यक्तिगत स्वास्थ्य और पारिस्थितिक स्थिरता, दोनों के लिए आदर्श है। उन्होंने आगे कहा कि आयुर्वेद के सिद्धांत वैश्विक चिंताओं के अनुरूप हैं और निवारक एवं सतत स्वास्थ्य सेवा के लिए एक समय-परीक्षित ढाँचा प्रदान करते हैं। श्री नाइक ने एकीकृत चिकित्सा और जन-जन तक पहुँच को बढ़ावा देने में गोवा और एआईआईए, गोवा जैसे संस्थानों के योगदान की सराहना की। उन्होंने आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के बीच समन्वय के एक मॉडल के रूप में टाटा मेमोरियल सेंटर के सहयोग से एकीकृत कैंसर विज्ञान इकाई की स्थापना का स्वागत किया।
राष्ट्रीय धन्वंतरि आयुर्वेद पुरस्कार वितरित
समारोह में आयुर्वेद और संबद्ध विज्ञान में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रोफेसर बमवारी लाल गौड़, वी.डी. नीलकंठन मूस एट., और वी.डी. भावना प्रशर को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय धन्वंतरि आयुर्वेद पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया। इसके अलावा रण-भाजी उत्सव का भी शुभारंभ किया गया, जिसमें आयुर्वेदिक आहार पद्धतियों की नींव रखने वाली विविध और स्वास्थ्यवर्धक वन सब्जियों का उत्सव मनाया गया। इस कार्यक्रम में गोवा के विधान सभा सदस्य प्रवीण आर्लेकर, आयुष मंत्रालय के सचिव एवं पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित वैद्य राजेश कोटेचा, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), नई दिल्ली के निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति, एआईआईए गोवा की डीन प्रो. (डॉ.) सुजाता कदम और पद्मश्री एवं पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित वैद्य देवेंद्र त्रिगुणा की गरिमामयी उपस्थिति रही।
