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राजस्थान में बच्चों की जान पर भारी कफ सिरप

राजस्थान में बच्चों की जान पर भारी कफ सिरप

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। राजस्थान में बच्चों को दी जा रही खांसी की दवा से साइड इफेक्ट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। भरतपुर और सीकर के बाद अब राजधानी जयपुर में भी एक दो साल की बच्ची की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। बच्ची को भी वही खांसी की दवा डेक्सट्रोमेथॉरफन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप दी गई थी, जो हाल ही में भरतपुर और श्रीमाधोपुर (सीकर) में बीमार बच्चों को दी गई थी।

सिरप: वितरण पर रोक

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दवा के साइड इफेक्ट के मामले ने तब तूल पकड़ा जब सीकर के खोरी ब्राह्मणान गांव में पांच साल के बच्चे की खांसी की दवा पीने के बाद तबीयत बिगड़ी और बाद में अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद से दवा को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं क्योंकि ये मामला यहीं नहीं थमा। प्रदेश के अन्य जिलों में भी खांसी की दवा देने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ रही है। इसके बाद से इस दवा को लेकर खौफ बढ़ रहा है। हालांकि सरकारी अस्पतालों में वितरित की जाने वाली इस सिरप को लेकर चिकित्सा विभाग ने सभी मेडिकल कॉलेजों के औषधि प्रभारी और जिला औषधि भंडारगृहों को निर्देश जारी कर दवा की सप्लाई पर रोक लगा दी है। ड्रग कंट्रोलर के मुताबिक दवा को जांच के लिए भेज दिए है।

सिरप: वयस्कों के लिए भी घातक

चौंकाने वाली बात यह है कि दावा किया जा रहा है कि यह दवा केवल वयस्क मरीजों के लिए उपयुक्त है और इसे चार साल से कम उम्र के बच्चों को देना सुरक्षित नहीं है। जिन बच्चों की तबीयत बिगड़ी है, उनकी उम्र भी चार वर्ष से कम बताई जा रही है। इतना ही नहीं, भरतपुर के जिस अस्पताल में बच्चों को यह दवा दी गई, वहां एक चिकित्सक ने भी इसका सेवन किया था, जिसके बाद उसकी तबीयत भी बिगड़ गई। इस बीच एहतियातन इस सिरप की पूरी सप्लाई पर रोक लगा दी गई है। डेक्सट्रोमेथॉरफन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप का निर्माण जयपुर की लोकल फार्मा कंपनी कायसन्स फार्मा द्वारा किया जा रहा है, जिसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट सरना डूंगर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित है। जैसे ही मामले की गंभीरता सामने आई, राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड ने इस कंपनी की सिरप को राज्य के सभी दवा केंद्रों पर वितरित करने से तत्काल रोक लगा दी है। ड्रग विभाग का कहना है कि जब तक लैब रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक इस दवा का स्टॉक न इस्तेमाल किया जाए और न वितरित किया जाए।

सिरप: बांसवाड़ा में भी कई बच्चे बीमार

भरतपुर, जयपुर और सीकर के बाद अब बांसवाड़ा में भी इसके असर से बच्चे बीमार होने लगे हैं। जिले के महात्मा गांधी राजकीय चिकित्सालय में बीते पखवाड़े में सात बच्चों को भर्ती करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों पर इस दवा की आपूर्ति रोक दी गई है। जानकारी के अनुसार, सर्दी-खांसी से पीड़ित बच्चों को यह सिरप चिकित्सकों द्वारा लिखी जा रही थी। लेकिन इसके सेवन के बाद कई बच्चों की हालत बिगड़ने लगी। जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए सात बच्चों को उपचार की जरूरत पड़ी। एक मरीज के पिता ने बताया कि उनकी दो वर्षीय बेटी को खांसी होने पर सरकारी क्लिनिक से यही सिरप दी गई थी। दवा पीने के बाद बच्ची की सांस धीमी हो गई और वह गहरी नींद में चली गई। तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती करने पर उसकी जान बचाई जा सकी। वर्तमान में बच्ची की हालत में सुधार है।

सिरप : बांसवाड़ा में 13 हजार डोज वितरित

आरएमएससीएल के जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. प्रवीण गुप्ता ने बताया कि बांसवाड़ा जिले को इस दवा के 50 हजार डोज मिले थे। इनमें से 13 हजार चिकित्सा केंद्रों को वितरित किए गए थे और शेष 37 हजार डोज वेयरहाउस में सुरक्षित रखे गए हैं। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर अब दवा का वितरण और उपयोग रोक दिया गया है। डॉ. गुप्ता ने कहा कि जिले में जिस बैच की शिकायत मिली है, वह आपूर्ति यहां नहीं हुई थी, लेकिन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसे रोक दिया गया है। बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले आरएमएससीएल द्वारा राज्यभर में इस खांसी की दवा के 21 बैच वितरित किए गए थे। इसके बाद कई जिलों में बच्चों की तबीयत बिगड़ने की शिकायतें सामने आईं। फिलहाल इस सिरप का वितरण रोक दिया गया है और सरकारी अस्पतालों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।

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