स्वस्थ भारत मीडिया
मन की बात / Mind Matter

उतार—चढ़ाव के बीच पोर्टल का 11 साला सफर मामूली नहीं

उतार—चढ़ाव के बीच पोर्टल का 11 साला सफर मामूली बात नहीं

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। स्वास्थ्य जैसे व्यापक विषय पर केंद्रित पोर्टल के रूप में 11 सालों का सफर मामूली नहीं होता लेकिन www.swasthbharath.in ने इसे कुछ उतार—चढ़ाव के बावजूद पूरा किया है। हिंदी से लेकर तमाम भारतीय भाषाओं में हेल्थ पर केंद्रित समाचार पत्र, पत्रिका या पोर्टल गिने—चुने ही हैं। व्यापक प्रसार वाले अखबारों में कभी—कभार ही हेल्थ को जगह मिल पाती है।
हेल्थ पर फोकस करते हुए पोर्टल शुरू करने की बात 17 सितंबर 2014 को मुंबई के बुद्धिजीवियों की बैठक में तय हुई उस दिन यह घोषणा की गयी थी कि 2 अक्टूबर को www.swasthbharath.in नामक पोर्टल राष्ट्र को समर्पित किया जायेगा। मुंबई प्रेस क्लब में यह आयोजन हुआ। इसके पीछे प्रेरणा रहे स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह। तब किसी को उम्मीद नहीं थी कि बिना अथाह पूंजी के यह सर्वाइव कर पाएगा। तकनीकी तैयारियों के साथ—साथ लक्षित सामग्री का गोदाम बनाने की जद्दोजहद के बीच पहला पोस्ट होमियोपैथ के इतिहास को लेकर आया जिसे प्रख्यात होमियोपैथ डॉक्टर आर. कांत ने खासकर इस पोर्टल के लिए लिखा था। आरंभ ही बताने के लिए काफी है कि यह पोर्टल देशी चिकित्सा प्रणाली को प्राथमिकता देता है। इसे शिद्दत के साथ कोरोना काल में भी इसके साथियों ने निभाने का प्रयास किया। भारत की पारंपरिक चिकित्सा का ​इतिहास भी बता रहा है कि गंभीर से गंभीर रोगों का इस पद्धति ने समूल नाश किया है।
पोर्टल ने हेल्थ के सभी आयामों—अनछुए पहलुओं—पैथों पर सूक्ष्म नजर रखी। मसलन फार्मासिस्ट, जो फार्मेसी और दवा मार्केट के बैकबोन हैं। उनकी समस्याओं को समय—समय पर इस मंच पर उठाया गया। स्वास्थ्य व्यवस्था में वे बहुत ही महत्वपूर्ण कड़ी हैं। भारतीय दवा उद्योग व सरकारी उदासीनता के कारण यह कड़ी हमेशा से कमजोर रही है अथवा यह कहा जाए कि कमजोर रखा गया है। ऐसे में उनके संघर्ष के साथ पोर्टल हमेशा खड़ा रहा है।
2014 में ही छत्तीसगढ़ के रायपुर में नसबंदी के बाद कई महिलाओं की मौत हो गयी थी। इसको लेकर राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण हो चुका था। तब स्वस्थ भारत अभियान की टीम ने वहां जाकर स्थिति का जायजा लिया। उन दिनों रमण सिंह वहां के सीएम थे। टीम ने पहल कर ड्रग कंट्रोलर के खिलाफ FIR दर्ज कराई। बाद में अतिरिक्त ड्रग कंट्रोलर निलंबित किए गए क्योंकि सर्जरी के बाद गलत दवा देने की भी बात आ चुकी थी।
हेल्थ को लेकर तमाम तरह की खबरों को इसमें समटने का प्रयास किया गया। सरकारी कोशिशों को जगह दी गई तो वस्तुस्थिति को भी सामने लाया गया। पोषण हो, पर्यावरण—जलवायु परिवर्तन, वायु—जल प्रदूषण, इन क्षेत्रों में हो रहे शोधकार्य…सबको सामने लाने का गंभीर प्रयास हुआ।
चुनौती मिली कोरोना काल में जहां महामारी से ज्यादा खौफ का राज था। सच्चाई से ज्यादा अफवाहें उठती रहीं। अतिरंजित या भ्रामक खबरों के बीच तथ्य पहचाना दुष्कर था उन दिनों। वैक्सीन बनने के बाद से वैक्सीन लगवाने तक के दौर को इसने देखा और तथ्यपरक खबर देकर लोगों को आश्वस्त भी किया।
पाठकों के प्रेम ने इसे हमेशा प्रोत्साहित किया और आगे बढ़ने की हिम्मत दी। पोर्टल उन सबका आभार व्यक्त करता है।

Related posts

इन कोरोना योद्धाओं को भी सम्मान दे समाज

Ashutosh Kumar Singh

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेष: क्यों बचेंगे अखबार

admin

लंबा है स्वास्थ्य का डगर

Leave a Comment