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आइए ‘भारतीयता’ का दीप हम भी जलाएं…

आज भी हम भारतीयों के ज्ञान रूपी दीपक में न्याय रूपी तेल और कर्तव्य रूपी बाती का बहुत ज्यादा महत्व है। प्रकाश फैलाने के लिए न्याय रूपी तेल का अकूत भंडार हमारे पास है। कर्तव्य रूपी बाती के रूप में जलकर भी रौशनी फैलाना हमारी तासीर में है। यहीं कारण है कि हम काल के हर प्रहार को ज्ञान की कसौटी पर कसते हुए, उसका न्यायिक प्रतिकार करते हैं और अंततः विजय पर्व का उत्सव भी हम ही मनाते हैं।

आशुतोष कुमार सिंह

दीप प्रकाश का प्रतीक होता है। अंधकार का प्रतिकार होता है। आशंका का समाधान होता है। जीवन रूपी शरीर में हमारी आत्मा दीप रूपी प्रकाश का प्रतिरूप है। आत्मा को परमात्मा से मिलाने का माध्यम भी दीप ही है। ऐसे में जब हमारे प्रधानमंत्री कोरोना रूपी अंधियारा को मिटाने के लिए दीप जलाने का आह्वान करते हैं तो इसका बहुत ही गुढ़ रहस्य है। यह दीपक जलाना सिर्फ रौशनी फैलाने के लिए नहीं है बल्कि देश की सभी सकारात्मक आत्माओं को एकजुट करने का आह्वान भी है।

भारतीयता आज भी हिमालय बना हुआ है

इतिहास गवाह है संकट-काल में सकारात्मक शक्तियों को एकाकार होना पड़ा है। रामायण काल हो, महाभारत काल हो, चाणक्य काल हो या गांधी काल सभी कालों में नकारात्मकता से लड़ने के लिए सकारात्मक आत्माओं को एकरूप किया गया है। तभी भारत की भारतीयता आज भी हिमालय बना हुआ है। तमाम झंझावातों से लड़ते हुए भारत ने अपनी मौलिकता को पूर्णतः समाप्त नहीं होने दिया है। अपनी तासीर को बनाए रखा है। जिसका सार है बसुधैव कुटुंबकम। राम के मर्यादा, कृष्ण के प्रेम एवं शिव की सामंजस्यता रूपी रस से सने मिट्टी से भारतीयता का निर्माण हुआ है। विपरीत काल में जलकर भारतीयता का स्वरूप अब स्वर्ण जैसा हो चुका है। कुछ समय के लिए काल के कालिख से इसकी चमक धुमिल हो गई थी लेकिन अब वह चमक फिर से लौट आई है। और अब इस भारतीयता को कोई काल भी कालिख नहीं लगा सकता है। काल के गाल पर तमाचा जड़ने के लिए हम सभी भारतीय ज्ञान रूपी दीप जलाने के लिए एकजुट हो चुके हैं।

प्रकृति प्रेमी भारतीय

प्रकृति के साथ सामंजस्य बैठाने की कला भारतीय बखूबी जानते हैं। यहीं कारण है कि आज भी हमारी भारतीयता जीवित है। हम भारतीय प्रकृति प्रेमी रहे हैं। हमारे मन में संसार के सभी जीवों के प्रति प्रेम, स्नेह, करुणा एवं दया की भावना है। हम अभाव में भी प्रभावशाली तरीके से खुद को प्रकृति के साथ सामंजस्य बैठाना जानते हैं।

विजय पर्व हम ही मनाते हैं

आज भी हम भारतीयों के ज्ञान रूपी दीपक में न्याय रूपी तेल और कर्तव्य रूपी बाती का बहुत ज्यादा महत्व है। प्रकाश फैलाने के लिए न्याय रूपी तेल का अकूत भंडार हमारे पास है। कर्तव्य रूपी बाती के रूप में जलकर भी रौशनी फैलाना हमारी तासीर में है। यहीं कारण है कि हम काल के हर प्रहार को ज्ञान की कसौटी पर कसते हुए, उसका न्यायिक प्रतिकार करते हैं और अंततः विजय पर्व का उत्सव भी हम ही मनाते हैं।

स्वामी विवेकानंद का भारत

कोरोना वायरस रूपी नकारात्मक शक्ति से आज पूरी मानवता लड़ रही है। मानव समाज संकट की घड़ी में है। ऐसे में विश्व गुरु भारत ने अपने ज्ञान-भंडार से एक बार फिर से पूरी दुनिया को इस राक्षसी बीमारी से निपटने का राह बताना शुरू किया है। प्रकृति से प्रेम करने का संदेश देना शुरू किया है। सकारात्मक आत्माओं को एकजुट करना शुरू किया है। भारत आज जो काम कर रहा है, अगर इसी तीव्रता से इसके पूर्व भी किया होता तो शायद आज वैश्विक मंच पर वह स्वामी विवेकानंद के भारत के रूप में कब का प्रतिस्थापित हो गया होता। लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

भारत की शक्ति को पुनर्जीवित करने का समय है

बीते 600-700 वर्ष भारतीय तासीर को नष्ट करने वाले रहे हैं। भारत को हर-दृष्टि से नीचा दिखाने वाला रहा है। भारतीयों की मूल भावना के विपरीत काज करने वालों का स्वर्णकाल रहा है। लेकिन अब भारतीयता का ठूठ फिर से नव-कोंपल के रूप में वैश्विक मंच पर दिख रहा है। यह शुभ घड़ी है। शुभ-संकेत है। भारत की शक्ति को पुनर्जीवित करने का समय है।

प्रसव-वेदना का काल

इस समय को मैं प्रसव-वेदना का काल मान रहा हूं। इस दर्द के बाद जो बीज इस धरा पर अवतरीत होगा अथवा हो रहा है-वह भारत के भविष्य के लिए बहुत ही लाभाकारी सिद्ध होने वाला है। आज 5 अप्रैल को रात्रि 9 बजे जब पूरा भारत दीप जलाएगा और अपनी सकारात्मक शक्तियों को एकाकार करेगा, वह दृश्य आलोकिक होगा। धर्म-संप्रदाय से परे होगा। मानवीय होगा। और यही मानवीयता को जगाने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दीप जलाने का आह्वान किया है।

स्वस्थ भारत परिवार की ओर से शुभकामना

पिछले 22 मार्च को दीप से दीप जलाने का संदेश मैंने भी दिया था। उसके बाद देश भर के तमाम मित्रो ने दीप जलाना शुरू भी कर दिया था। लेकिन सकारात्मक शक्तियों को जागृत करने के लिए देश के मुखिया ने जो आह्वान किया है उसकी व्यापकता एवं विस्तार ज्यादा है। हमें खुशी है कि हमारी मन की भावना को अभियान बनाने में देश के मुखिया ने महत्वपूर्ण काज किया है। उनको स्वस्थ भारत परिवार की ओर से शुभकामना देता हूं।

आइए भारतीयता का दीप हम भी जलाएं…सकारात्मक शक्तियों को जगाएं और कोरोना जैसे नकारात्मकता को भस्म करें…आइए दीप से दीप जलाएं…

 

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swasthadmin

2 comments

Ishvardan Gadhavi April 6, 2020 at 12:30 am

Pure Bharat me Jo isi vishay me Jo gadabadi ho Rahi he use ujagar karane ki jarurat he..

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लोगों की सेवा में आगे आया हिंदी विश्वविद्यालय - स्वस्थ भारत मीडिया April 6, 2020 at 10:55 pm

[…] यह भी पढ़ें… आइए ‘भारतीयता’ का दीप हम भी जलाएं… […]

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