नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। सड़क हादसे के दौरान अगर गिरने से सिर में चोट लगे तो कभी नजरअंदाज नहींं करना चाहिए। ‘स्वास्थ्य की बात आशुतोष के साथ’ यानी यूट्यूब के The thermometer के दूसरे एपिसोड में देश के जाने-माने न्यूरो सर्जन डॉ. सुशील भसीन के साथ हुई बातचीत में यह बात उभर कर सामने आयी। आप पाठकों के लिए प्रस्तुत है डॉ. भसीन से बातचीत।
आशुतोष: सड़क हादसे के बाद कई लोगों को कुछ महसूस नहीं होता पर गोल्डेन आवर में या बाद में कोई तकलीफ हो तो क्या करना चाहिए?
डॉ. भसीन: कहीं पर आदमी जब गिरता है तो उसकी ब्रेन के अंदर जो ग्रेनियल बोन है, वो फ्रैक्चर हो जाती है। तो बूंद—बूंद कर ब्लड अंदर निकलता रहता है। नॉर्मली ब्रेन का प्रेशर शून्य है। अगर ब्रेन का प्रेशर बढ़ता है तो आदमी का सेंसोरियम बदलता है। वो गफलत में आ जाता है। कंफ्यूज होता है। तो ऐसे पेशेंट को हम अगर देखते हैं जिसको अगर गहरी चोट लगी होगी ना वो थोड़ी देर के लिए बेहोश जरूर हुआ होगा। अगर वो वैसा का वैसा है, कंफ्यूज भी नहीं हुआ तो मानते हैं कि चोट इतनी सीरियस नहीं है। पर अगर वो बेहोश हुआ थोड़ी देर के लिए तो उसको हमने फिर मॉनिटर करना है। सीटी स्कैन तो करना ही चाहिए। कई बीमारियां होती है जिसको शुरू में सीटी स्कैन में पता चल जाता है कि फ्रैक्चर है। और कुछ बीमारियां होती है जिसमें फ्रैक्चर वगैरह कुछ नहीं निकलता। ओल्ड एज में निकलता है जेनरली क्योंकि ओल्ड एज में ब्रेन श्रिंक कर जाता है तो उसमें स्पेस होती है तो उसका प्रेशर बढ़ता नहीं है तो इतनी जल्दी आप बता नहीं पाते कि उसको कुछ होगा कि नहीं होगा। उसे हम एक वार्निंग के साथ भेजते हैं कि इनको अगर 15 दिन के बाद भी सिर दर्द है तो आप लेके आइए। कुछ क्लॉट होते हैं, जो देर से बनते हैं। उसको कहते हैं क्रॉनिक सबडुरल हेमेटोमास। जो उस वक्त आदमी को चोट लगी, वो बिल्कुल तंदुरुस्त है। उसका स्कैन भी नॉर्मल है। हड्डी भी नहीं टूटी है। फिर भी 20 दिन के बाद जाकर क्लॉट बन जाएगा। हड्डी के बीच में जगह है। बड़ी उम्र में और ज्यादा जगह हो जाती है। तो इसमें थोड़ा सा भी ये रप्चर हुआ तो बूंद—बूंद कर जब ये घिसेगा तब यह जगह भरेगी और उसके साथ ब्रेन का पानी मिल जाएगा तो फिर प्रेशर बनाता है और लक्षण आने शुरू होते हैं। अगर आप गिर गए, आपको लगता है कि आपको कुछ नहीं हुआ है फिर भी आपको डॉक्टर से जाकर कंसल्ट करना चाहिए। एक फुटबॉल प्लेयर था जो फील्ड में गिरा। उठा तो ठीक। मैच खत्म किया उसने। पवेलियन में जाकर लेटा और फिर उसके बाद उठा ही नहीं। उसको कहते हैं एक्स्ट्राड्यूरल हेमेटोमा। ये ड्यूरा मैटर है जो उस लड़के को क्लॉट हुआ। और जो मैं बात कर रहा था कि 15 दिन बाद इंजरी होती है वो इसके नीचे यानी कि सबडोरल स्पेस में। तो ये दो इंजरी है। अंदर की नस फटे तो अंदर, बाहर की नस फटे तो बाहर। जो उसकी टक्कर से जो गिरा फुटबॉल का प्लेयर उसकी बाहर की नस फटी। तो वो क्लॉट बना हड्डी और इसके अंदर। जो दूसरा बनते हैं जो पता नहीं चलते हैं वो इस झिल्ली और ब्रेन के अंदर बनते हैं।
आशुतोष: ऐसे में जरूरी मैसेज यही निकलता है कि इस तरह की परिस्थिति में न्यूरो फिजिशियन या सर्जन से मिलना ज्यादा बेहतर है?
डॉ. भसीन: बिल्कुल सही।
#The thermometer
(जारी)
