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कान की हो समस्या तो न करें अनदेखा, मिलें डॉक्टर से

कान की हो समस्या तो न करें अनदेखा, मिलें डॉक्टर से

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। यूं तो शरीर का हर हिस्सा महत्वपूर्ण होता है लेकिन कान (Ear) की महत्ता कूछ अलग ही होती है। कान का सिस्टम फेल हुआ तो इसमें दर्द, कम सुनाई देना या घंटी बजने की आवाज सुनाई देना जैसी समस्या भी आ जाती है। आप किसी से बातचीत में परेशान हो सकते हैं, सड़क पर हों और पीछे से आ रहे वाहन का हॉर्न न सन सकें तो दुर्घटना से बच नहीं सकते। जब कान में अचानक तेज दर्द उठता है, या फिर अचानक सुनाई देना कम हो जाता है, तो सबसे पहले मन में एक ही ख्याल आता है कहीं कान का पर्दा तो नहीं फट गया? कान का पर्दा एक बेहद नाजुक और पतली झिल्ली होती है। इसका फटना सुनने की क्षमता पर सीधा असर डालता है, इसलिए इसे लेकर डर होना स्वाभाविक है। इस गंभीर विषय पर एक जाने-माने कान की डॉक्टर (ENT Specialist) डॉक्टर शिल्पी बुद्धिराजा (Senior Consultant, ENT & Head–Neck Surgery, Marengo Asia Hospital, Gurugram) से बात की, ताकि आपको पता चल सके कि कान का पर्दा आखिर क्यों फट जाता है, इसे फटने से कैसे रोका जा सकता है और सबसे जरूरी बात क्या इसका कोई घरेलू इलाज है?

प्रश्न: कान का पर्दा क्या है और यह इतना जरूरी क्यों?

उत्तर: आपके कान में कान का पर्दा एक पतली झिल्ली की तरह होता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में टिम्पेनिक मेम्ब्रेन (Tympanic Membrane) कहते हैं। इसका काम बाहर से आने वाली आवाज़ की तरंगों को इकट्ठा करना और उन्हें अंदरूनी कान तक भेजना है। यह झिल्ली आपके अंदरूनी और मध्य कान को बाहरी गंदगी, पानी और इन्फेक्शन से भी बचाती है। अगर यह फट जाए, तो ये दोनों काम ठीक से नहीं हो पाते।

प्रश्न: कान का पर्दा क्यों फट जाता है? इसके पांच बड़े कारण बताएं।
उत्तर: कान का पर्दा फटने के पीछे एक या कई कारण हो सकते हैं, जो अक्सर बहुत आम होते हैं। जैसे—

1. कान का इन्फेक्शन-यह सबसे बड़ा कारण है। जब आपके मध्य कान में इन्फेक्शन हो जाता है, तो उसमें फ्लूइड या पीप (Pus) जमा होने लगती है। यह जमाव कान के पर्दे पर बहुत ज्यादा दबाव डालता है। जब यह दबाव बहुत बढ़ जाता है, तो पर्दा उस दबाव को सह नहीं पाता और फट जाता है ताकि पीप बाहर निकल सके।
2. कान साफ करना या चोट लगना—कान को पिन, माचिस की तीली, नुकीली वस्तु या यहां तक कि कॉटन बड से साफ करने की आदत बहुत खतरनाक है। जरा सी चूक या गलती से ये चीजें सीधे कान के पर्दे को पंक्चर या उसे घायल कर सकती है।
3. तेज आवाज या धमाका-बहुत तेज आवाज जैसे पटाखे का धमाका, बंदूक की आवाज, या कान के बहुत पास कोई जोरदार चीख। ये आवाजें कान के पर्दे पर अचानक एक जबरदस्त झटका (प्रेशर वेव) मारती हैं, जिससे पर्दा फट सकता है।
4. दबाव में अचानक बदलाव – जब बाहर और अंदर के कान के दबाव में अचानक बड़ा फ़र्क आ जाता है, तो पर्दा फट सकता है। ऐसा अक्सर तब होता है जब—

आप हवाई जहाज से उड़ान भर रहे हों (खासकर लैंडिंग के समय)।
आप गहरे पानी में स्कूबा डाइविंग कर रहे हों।
कोई आपको कान पर जोर से थप्पड़ मार दे।

5. सिर में चोट या एक्सीडेंट—किसी बड़े एक्सीडेंट या सिर पर जोरदार चोट लगने की स्थिति में कान के पर्दे को भी नुकसान पहुंच सकता है।

प्रश्न: कैसे पता चलेगा कि पर्दा फट गया है?
उत्तर: अगर आपका कान का पर्दा फट गया है, तो आपको ये लक्षण महसूस हो सकते हैं—
कान में अचानक बहुत तेज दर्द होना, जो कुछ देर में कम हो सकता है।
कान से तरल पदार्थ, पीप या कभी-कभी खून का रिसाव होना।
अचानक सुनाई देना कम हो जाना (आंशिक बहरापन)।
कान में घंटी बजने जैसी आवाज आना (टिनिटस)।

प्रश्न: क्या कान का पर्दा फटने का कोई घरेलू इलाज है?
उत्तर: कान का पर्दा फटना एक गंभीर मेडिकल कंडीशन है और इसका इलाज सिर्फ एक विशेषज्ञ डॉक्टर ही कर सकता है। पर्दा फटने पर सबसे पहले जो बात आपको ध्यान रखनी है, वह यह है कि—
कान में कुछ न डालें
गलती से भी कान में तेल, पानी, या कोई घरेलू नुस्खा डालने की कोशिश न करें। यह स्थिति को और भी बिगाड़ सकता है और इन्फेक्शन को अंदरूनी कान तक पहुंचा सकता है।
कान को सूखा रखें। नहाते या धोते समय ध्यान रखें कि कान के अंदर पानी बिल्कुल न जाए।
तुरंत डॉक्टर से मिलें।

ज्यादातर छोटे छेद (Perforations) अपने आप कुछ हफ्तों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में डॉक्टर को दवाइयाँ (एंटीबायोटिक्स) या एक छोटा-सा पैच लगाना पड़ सकता है। अगर छेद बड़ा है, तो सर्जरी (टिम्पेनोप्लास्टी) की जरूरत भी पड़ सकती है। डॉक्टर ही बता सकते हैं कि आपका पर्दा अपने आप ठीक होगा या नहीं। सबसे जरूरी बात कान का पर्दा फट जाने पर खुद डॉक्टर न बनें। इन्फेक्शन से बचने और सुनने की क्षमता को बचाने के लिए जल्द से जल्द किसी कान के विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लीजिए।

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