नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने सतत जलवायु कार्रवाई के लिए दुनिया भर से पाँच लोगों को 2025 के ‘Champions of the Earth’ पुरस्कार से सम्मानित किया है। इनमें एक नाम भारत की सुप्रिया साहू का भी है। इन सभी विजेताओं ने जलवायु न्याय से लेकर वन रक्षा और सतत शीतलन से जुड़े मुद्दों पर काम किया है जिससे लोगों और पृथ्वी की स्थिति में वास्तविक बदलाव आए हैं। इसे संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान माना जाता है।
UNEP: भारत की सुप्रिया साहू
UNEP की कार्यकारी निदेशक इन्गेर ऐंडरसन ने कहा है कि जलवायु संकट के वैश्विक प्रभाव में वृद्धि के इस दौर में समाज के हर क्षेत्र में नवाचार और नेतृत्व पहले से कहीं और ज़्यादा ज़रूरी हो गए हैं। भारत की पर्यावरणविद सुप्रिया साहू अत्यधिक गर्मी से निपटने के तरीक़ों को नए सिरे से परिभाषित कर रही हैं। इन तरीक़ों में शहरों को ठंडा रखने के लिए प्रकृति की पुनर्बहाली से लेकर जलवायु परिवर्तन को मद्देनज़र रखते हुए ढाँचा विकास को बढ़ावा देना शामिल है। सुप्रिया साहू अभी तमिलनाडु सरकार में सहायक मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु जैसे प्रदेश के लिए भविष्य के प्रति तैयार रहना बेहद ज़रूरी है ताकि हम जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, उनके प्रभावों को कम करने व अनुकूलन के लिए सक्षम बन सकें। इस समय हम इन्हीं चुनौतियाँ का सामना कर रहे हैं।
UNEP: स्कूलों को दिया ठंडी छत
जानकारी के मुताबिक सुप्रिया साहू ने इस चुनौती से निपटने के लिए स्कूलों में ‘ठंडी छत’ परियोजना की शुरुआत की जिसके तहत छतों पर सौर परावर्तक रंग से पुताई की जाती है। इससे तापमान 5 से 8 डिग्री तक घट जाता है। उन्होंने कहा कि आप कल्पना कर सकते हैं कि गर्मियों में कक्षा-कमरों का तापमान अक्सर 40 डिग्री से ऊपर पहुँच जाता है। ऐसे में तापमान में 5–8 डिग्री की कमी भी छात्रों के लिए बड़ी राहत साबित होती है। वे हरित तमिलनाडु मिशन का नेतृत्व कर रहीं हैं। इस मिशन के तहत शीतलन प्रयासों में ‘ठंडी छत’ पहल और बड़े पैमाने पर पौधारोपण कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अब तक हम 10 करोड़ से अधिक पेड़ लगा चुके हैं और यह अभियान पूरी रफ़्तार से जारी है। दूसरा कार्यक्रम जिस पर हमें विशेष गर्व है, वह है मैंग्रोव पहल जो तमिलनाडु का मैंग्रोव मिशन है। उन्होंने कहा कि हमने स्थानीय समुदायों के सहयोग से लगभग 4 हज़ार 300 हैक्टेयर क्षेत्र में नए मैंग्रोव लगाए हैं और लगभग 2 हज़ार 200 हैक्टेयर क्षेत्र में मैंग्रोव बहाली का कार्य किया है।
UNEP : जानें चार और को
पुरस्कार विजेताओं में प्रशान्त द्वीप का छात्र समूह भी है। इस समूह को नीति नेतृत्व के लिए सम्मानित किया गया है। समूह की युवा नेता सिंथिया होनियूही ने 2024 में अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय में अपनी आवाज़ बुलन्द की थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि जलवायु परिवर्तन उनके अपने देश, सोलोमन आइलैंड्स जैसे अन्य प्रशान्त द्वीप देशों को विनाश की ओर धकेल रहा है। फ्रांस के मैरियम इस्सोफ़ोउ को उद्यमशील दृष्टिकोण के लिए सम्मानित किया गया है। प्रिंसिपल और संस्थापक, मैरियम स्थानीय सामग्रियों और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित वास्तुकला के माध्यम से साहेल क्षेत्र में सतत और जलवायु-सहनशील इमारतों की परिभाषा बदल रही हैं। मैरियम ने निजेर में Hikma Community Complex जैसी परियोजना का एक नमूना पेश किया। इसमें शीतलन की तकनीकों का प्रयोग हुआ है जो इमारतों को एयर कंडीशनिंग के बिना ही क़रीब 10 डिग्री तक ठंडा रखती हैं। ब्राज़ील की इमाज़ोन को विज्ञान और नवाचार के लिए पुरस्कार से नवाज़ा गया है। उन्होंने AI आधारित वनों की कटाई का पूर्वानुमान लगाने वाले मॉडल विकसित किए हैं, जो नीतियों को दिशा देते हैं और ऐमेज़ॉन वर्षावन की सुरक्षा में क़ानून लागू करने में मदद करते हैं। मैनफ़्रेडी कैलटागिरोन को यह सम्मान मरणोपरान्त दिया गया है। उन्होंने अपना पूरा पेशेवर जीवन इस समय की सबसे गम्भीर चुनौतियों में से एक जलवायु परिवर्तन को समर्पित किया।
