नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। भारत में स्ट्रोक मृत्यु और दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। स्ट्रोक की स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण है। उपचार में देरी होने पर लगभग 1.9 बिलियन मस्तिष्क कोशिकाएं प्रति मिनट नष्ट हो जाती हैं। सही समय पर उपचार मिलने से मृत्यु और आजीवन विकलांगता में अत्यधिक कमी आ सकती है। यद्पि, स्ट्रोक के उपचार में सबसे बड़ी चुनौती रोगियों को स्ट्रोक के लिए तैयार अस्पताल तक पहुंचने में लगने वाला समय है। इस गंभीर समस्या में कमी लाने के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने असम सरकार को दो मोबाइल स्ट्रोक यूनिट सौंपी हैं। यह दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले स्ट्रोक रोगियों के लिए अस्पतालों तक शीघ्र पहुंचने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
ICMR : भारत बना दूसरा देश
स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव और ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने असम सरकार को मोबाइल स्ट्रोक यूनिट (MSU) सौंपते हुए कहा कि मोबाइल स्ट्रोक यूनिट सबसे पहले जर्मनी में विकसित की गई थीं और बाद में प्रमुख वैश्विक शहरों में इनका मूल्यांकन किया गया। भारत ने पूर्वोत्तर भारत के ग्रामीण, दूरस्थ और दुर्गम भूभागों में ऐसी यूनिटों का मूल्यांकन किया है। हम ग्रामीण क्षेत्रों में तीव्र इस्केमिक स्ट्रोक के रोगियों के उपचार के लिए आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के साथ एमएसयू के सफल एकीकरण की रिपोर्ट करने वाला विश्व स्तर पर दूसरा देश भी हैं। असम सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव एवं आयुक्त पी. अशोक बाबू ने राज्य के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि इस हस्तांतरण से असम की आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली मजबूत होगी और राज्य में इस जीवन रक्षक सेवा की निरंतरता सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि आईसीएमआर के साथ सहयोग से स्ट्रोक रोगियों के लिए त्वरित उपचार, बेहतर समन्वय और बेहतर परिणाम संभव हुए हैं और विस्तार के लिए एक मजबूत आधार तैयार हुआ है।
ICMR : चलता फिरता अस्पताल
पता हो कि MSU एक चलता-फिरता अस्पताल है, जो सीटी स्कैनर, विशेषज्ञों से टेलीकंसल्टेशन, प्वाइंट-ऑफ-केयर प्रयोगशाला और रक्त के थक्के तोड़ने वाली दवाओं से सुसज्जित है। यह रोगी के घर पर या उसके आस-पास ही स्ट्रोक का शीघ्र निदान और उपचार करने में सक्षम बनाता है। यह नवोन्मेषण विशेष रूप से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां अस्पतालों तक पहुंचने में कई घंटे लग सकते हैं। विशेषज्ञ टेलीकंसल्टेशन के माध्यम से, एमएसयू स्ट्रोक के प्रकार की शीघ्र पहचान और उपचार की त्वरित शुरुआत को संभव बनाता है-जिससे जीवन बचता है और विकलांगता को रोका जा सकता है। पूर्वोत्तर में स्ट्रोक का प्रकोप बहुत अधिक है। दुर्गम भूभाग, लंबी दूरी और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की सीमित उपलब्धता के कारण हमेशा समय पर स्ट्रोक का उपचार चुनौतीपूर्ण रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए आईसीएमआर ने डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट के नेतृत्व में एक स्ट्रोक यूनिट और तेजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल एवं बैपटिस्ट क्रिश्चियन अस्पताल में चिकित्सकों के नेतृत्व में स्ट्रोक यूनिट स्थापित की है। मोबाइल स्ट्रोक यूनिट को अस्पताल पहुंचने से पहले ही स्ट्रोक की देखभाल की इस व्यवस्था में शामिल किया गया है। इस मॉडल ने उपचार का समय लगभग 24 घंटे से घटाकर लगभग दो घंटे कर दिया, मृत्यु दर में एक तिहाई की कमी आई और विकलांगता आठ गुना कम हो गई। 2021 से अगस्त 2024 के बीच, एमएसयू को 2,300 से अधिक आपातकालीन कॉल प्राप्त हुए। प्रशिक्षित नर्सों ने स्ट्रोक के 294 संदिग्ध मामलों की जांच की, जिनमें से 90 प्रतिशत रोगियों का उपचार उनके घर पर ही किया गया। MSU को 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा के साथ एकीकृत करने से इसकी पहुंच 100 किलोमीटर के दायरे तक बढ़ गई। इस कार्यक्रम में केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ ICMR के शीर्ष अधिकारियों, जिनमें तेलंगाना सरकार की स्वास्थ्य सचिव डॉ. क्रिस्टीना जेड. चोंगथू, अपर महानिदेशक डॉ. संघमित्रा पति, डॉ. अलका शर्मा, वरिष्ठ महानिदेशक (प्रशासन) सुश्री मनीषा सक्सेना और एनसीडी के प्रमुख डॉ. आर.एस. धालीवाल उपस्थित थे।
