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बजट: Cancer की ये 17 दवाएं हो जाएंगी सस्ती

Budget: कैंसर की ये 17 दवाएं हो जाएंगी सस्ती

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। केंद्र सरकार ने बजट में कैंसर की दवाओं से आयात शुल्क को कम कर दिया है। पिछले साल के बजट में भी इसी तरह कुछ क्ेंसररोधाी दवाओं को करमुक्त किया था। सरकार के फोकस का कारण यह है कि भारत में हर साल कैंसर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। खराब खान-पान, तंबाकू, प्रदूषण और देर से जांच इसकी बड़ी वजह तानी जाती है। इसकी अधिकांश दवाएं विदेश से मंगायी जाती है इसलिए इलाज भी काफी महंगा पड़ता है। गांव और छोटे शहरों में इलाज की पहुंच पहले से ही मुश्किल है। इस परिस्थिति में इन दवाओं का सस्ता होना सिर्फ मेडिकल फैसला नहीं, बल्कि इंसानियत से जुड़ा कदम भी है। कैंसर का इलाज लंबा और बहुत महंगा होता है। भारत में ज्यादातर लोग अपनी जेब से इलाज कराते हैं। जब दवाओं पर इम्पोर्ट ड्यूटी हटेगी, तो हर महीने हजारों और पूरे इलाज में लाखों रुपये की बचत हो सकती है। इससे मरीज दवा बीच में छोड़ने को मजबूर नहीं होंगे और परिवारों पर कर्ज का बोझ थोड़ा कम होगा। इसके बारे में विस्तार से जानना जरूरी है।

कैंसर की दवाएं

  • राइबोसिक्लिब (Ribociclib)—यह दवा खासतौर पर ब्रेस्ट कैंसर की उन मरीजों को दी जाती है, जिनमें कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल चुका होता है। यह कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकती है, ताकि बीमारी कंट्रोल में रहे। भारत में इसकी कीमत करीब 2.5 से तीन लाख रुपये महीना है। अब तक इस पर करीब 10 फीसद इम्पोर्ट ड्यूटी लगती थी यानी 25 से 30 हजार रुपये सिर्फ टैक्स में चले जाते थे। ड्यूटी हटने के बाद कीमत करीब 20 से 30 हजार रुपये तक कम हो जाएगी।
  • एबेमासिक्लिब (Abemaciclib)—यह भी ब्रेस्ट कैंसर में दी जाने वाली दवा है, खासकर तब जब हार्मोन से जुड़ा कैंसर हो। इसे लंबे समय तक लेना पड़ता है। इसकी कीमत करीब दो से 2.5 लाख रुपये महीना है। इम्पोर्ट ड्यूटी की वजह से 20 हजार रुपये तक अतिरिक्त जुड़ते थे। अब दवा इतनी ही सस्ती हो सकती है।
  • टैलीकैबटाजीन ऑटोल्यूसल (Talycabtagene autoleucel)—ये एक बहुत एडवांस इलाज है, जिसे CAR-T थैरेपी कहते हैं। इसमें मरीज के ही खून से सेल निकालकर कैंसर से लड़ने के लिए तैयार किया जाता है। यह ब्लड कैंसर में दिया जाता है। इस इलाज की कीमत बहुत ज्यादा होती है, करीब तीन से चार करोड़ रुपये तक। पहले इस पर भी इम्पोर्ट टैक्स लगता था। ड्यूटी हटने से इलाज पर लाखों रुपये की राहत मिल सकती है।
  • ट्रेमेलिमुमैब (Tremelimumab)—यह दवा इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है, ताकि शरीर खुद कैंसर से लड़ सके। यह लिवर और कुछ दूसरे कैंसर में दी जाती है। इसकी कीमत करीब चार से पांच लाख रुपये प्रति डोज है। ड्यूटी हटने से 40 से 50 हजार रुपये तक की कमी संभव है।
  • वेनेटोक्लैक्स (Venetoclax)—यह ब्लड कैंसर की अहम दवा है, खासकर ल्यूकेमिया में। ये कैंसर सेल्स को मरने पर मजबूर करती है। भारत में इसकी कीमत करीब 1.5 से दो लाख रुपये महीना है। टैक्स हटने से 15 से 20 हजार रुपये की राहत मिल सकती है।
  • सेरिटिनिब (Ceritinib)—यह दवा फेफड़ों के कैंसर में दी जाती है, जब बीमारी खास जीन की वजह से होती है। कीमत करीब दो लाख रुपये महीना है। ड्यूटी हटने से 15 से 20 हजार रुपये कम हो सकते हैं।
  • ब्रिगैटिनिब (Brigatinib)—यह भी लंग कैंसर में दी जाने वाली दवा है, जब पुरानी दवाएं काम नहीं करतीं। कीमत करीब 2.5 लाख रुपये महीना है। टैक्स हटने से करीब 25 हजार रुपये की राहत मिलनी संभव है।
  • डारोलुटामाइड (Darolutamide)—यह दवा प्रोस्टेट कैंसर में दी जाती है, खासकर बुजुर्ग मरीजों को। इसकी कीमत करीब दो लाख रुपये महीना है। ड्यूटी हटने से 15 से 20 हजार रुपये सस्ती हो सकती है।
  • टोरीपालिमैब (Toripalimab)—यह इम्यूनोथैरेपी की दवा है, जो शरीर की ताकत से कैंसर से लड़वाती है। एक डोज की कीमत करीब तीन लाख रुपये है। टैक्स हटने से 30 हजार रुपये तक सस्ती हो सकती है।
  • सर्प्लुलिमैब (Serplulimab)—यह भी इम्यून सिस्टम को एक्टिव करने वाली दवा है। लंग और पेट के कैंसर में दी जाती है। कीमत करीब तीन लाख रुपये प्रति डोज है। ड्यूटी हटने से 25 से 30 हजार रुपये कम हो सकते हैं।
  • टिस्लेलिज़ुमैब (Tislelizumab)—यह उन मरीजों को दी जाती है जिनमें कैंसर बार-बार लौट आता है। एक डोज की कीमत करीब 3.5 लाख रुपये है। टैक्स हटने से करीब 30 हजार रुपये की राहत मिलेगी।
  • इनोतूज़ुमैब ओज़ोगैमाइसिन (Inotuzumab ozogamicin)—यह ब्लड कैंसर की दवा है, जब बीमारी बहुत गंभीर हो जाती है। इसका पूरा इलाज 15 से 20 लाख रुपये तक जा सकता है। ड्यूटी हटने से कुल खर्च में एक से दो लाख रुपये तक की कमी संभव है।
  • पोनेटिनिब (Ponatinib)—यह खास तरह के ल्यूकेमिया में दी जाती है, जब दूसरी दवाएं बेअसर हो जाएं। कीमत करीब तीन लाख रुपये महीना है। टैक्स हटने से 30 हजार रुपये तक कम हो सकते हैं।
  • इब्रूटिनिब (Ibrutinib)—यह दवा भी ब्लड कैंसर और लिंफोमा में दी जाती है और लंबे समय तक चलती है। कीमत करीब दो लाख रुपये महीना है। ड्यूटी हटने से 15 से 20 हजार रुपये की राहत मिल यकती है।
  • डाब्राफेनिब (Dabrafenib)—यह त्वचा और कुछ लंग कैंसर में दी जाती है, खास जीन वाले मरीजों को। कीमत करीब 1.5 लाख रुपये महीना है। टैक्स हटने से 10 से 15 हजार रुपये कम हो सकते हैं।
  • ट्रामेटिनिब (Trametinib)—यह डाब्राफेनिब के साथ दी जाती है ताकि इलाज ज्यादा असरदार हो। कीमत करीब 1.8 लाख रुपये महीना है। ड्यूटी हटने से 15 हजार रुपये तक सस्ती हो सकती है।
  • इपिलिमुमैब (Ipilimumab)—यह एक जानी-मानी इम्यूनोथैरेपी दवा है, जो कई एडवांस कैंसर में दी जाती है। एक डोज की कीमत करीब 5 लाख रुपये है। टैक्स हटने से 40 से 50 हजार रुपये की राहत मिल सकती है।

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