स्वस्थ भारत मीडिया
समाचार / News

AI का प्रयोग जवाबदेही के साथ होना चाहिए : ओम बिरला

AI का प्रयोग जबावदेही के साथ होना चाहिए : ओम बिरला

लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ नैतिक AI पर मंथन

AI का विकास आशा और चुनौती का संकेत : डॉ. चिन्मय पण्ड्या

नयी दिल्ली/हरिद्वार। हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय तथा एआई मिशन, भारत के संयुक्त तत्त्वावधान में दिल्ली के भारत मंडपम में AI फॉर डेमोक्रसी विषय पर अंतरराष्ट्रीय एआई समिट का आयोजन किया गया। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब मीडिया, उद्योग, फिल्म और सरकारी-गैरसरकारी संस्थानों सहित विभिन्न क्षेत्रों में AI की पहुंच तेजी से बढ़ रही है। AI के उपयोग और उससे जुड़ी सावधानियों पर अखिल विश्व गायत्री परिवार, भारत सरकार और वैश्विक संस्थानों द्वारा मंथन किया जा रहा है।

AI: सावधानी से हो प्रयोग

इस समिट में लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आज शासन, शिक्षा नीति आदि अनेक क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही है। यह भारत की संस्कृति, नैतिक मूल्य और आध्यात्मिक संस्कृति को पूरी दुनिया में फैलाने में सहयोगी की भूमिका होगी। श्री बिरला ने कहा कि दुनिया की इस नई पद्धति से लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ संवाद कर सकते हैं जिससे संस्था के साथ जवाबदेही व नैतिक मूल्यों के साथ वाले जनप्रतिनिधि देश के विकास में योगदान कर सकें। उन्होंने कहा कि भारत संस्कृति सहित अनेक विविधता वाला देश हैं, यहां एआई का प्रयोग जबावदेही के साथ होना चाहिए। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ नैतिक शिक्षा, आध्यात्मिक ज्ञान और योग के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी शिक्षा का भी अद्भुत समन्वय है, जो एक नैतिक राष्ट्र के निर्माण में बड़ी भूमिका निभा रहा है।

AI: विधायिका अब पेपरलेस

उन्होंने कहा वर्तमान में विधानसभाएं और लोकसभा की सभी गतिविधियां पेपरलेस काम कर रही है। संसद के सभी डिबेट्स तथा अन्य गतिविधियां भी पेपरलेस तथा सुचारू रूप से चलन में है। वर्तमान भारत की तकनीकी प्रगति को देखते हुए कहा जा सकता है कि भारत बनेगा नया मॉडल देश। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के लिए लोकसभाध्यक्ष का कहना था कि यह ऐसा विश्वविद्यालय है जो आध्यात्मिकता के साथ युवाओं में तकनीकी विकास को बढ़ावा दे रहा है। अखिल विश्व गायत्री परिवार ने भारतीय संस्कृति की परंपरा को देश विदेश में पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही इसी परंपरा को तकनीकी की क्षमता का विस्तार करने के लिए भी एक महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।

AI: जवाबदेही जरूरी

इससे पूर्व समिट की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए साउथ एशियन इंस्टीट्यूट फॉर पीस एंड रिकॉन्सिलिएशन (SAIPR) के अध्यक्ष एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में तेजी से एक वैश्विक अग्रणी के रूप में उभर रहा है। भारत द्वारा डिजिटल नवाचार और डेटा-संचालित शासन को बढ़ावा देने के प्रयासों ने एआई को सार्वजनिक नीति और सेवा वितरण के केंद्र में ला दिया है। यह विकास आशा और चुनौती दोनों का संकेत देता है। उन्होंने कहा कि एआई शासन को अधिक पारदर्शी, कुशल और उत्तरदायी बनाने की क्षमता रखता है। इसके माध्यम से संसाधनों का बेहतर आवंटन, योजनाओं की निगरानी और निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया को सशक्त बनाया जा सकता है। स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित समाधान नागरिकों तक सेवाओं की पहुंच को तेज और प्रभावी बना सकते हैं। हालांकि लोकतंत्र केवल तकनीकी दक्षता पर आधारित प्रणाली नहीं है। यह सहभागिता, विश्वास, समानता और पारदर्शिता जैसे मानवीय मूल्यों पर टिका है। उन्होंने गीता सहित विभिन्न आर्षग्रंथों का जिक्र करते हुए कहा कि एआई का उपयोग करते समय डेटा गोपनीयता, एल्गोरिदिम और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

AI: दिग्गजों की उपस्थिति

इस दौरान पार्लियामेंट्री यूनियन (IPU) के महासचिव मार्टिन चुंगोंग, मैक्सिको की एआई नैतिकता विशेषज्ञ और ह्यूमएइन फाउंडेशन की अध्यक्ष सुश्री जिमेना सोफिया विवेरोस, हंगरी संसद के उपाध्यक्ष लाजोस ओलाह सहित अनेक एआई विशेषज्ञों ने भी ने नैतिक एआई, मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती पर बल दिया। इस दौरान अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं एसएआईपीआर के अध्यक्ष डॉ. पाण्ड्या ने अतिथियों को देसंविवि के प्रतीक चिह्न, युगसाहित्य आदि भेंटकर सम्म्मानित किया। इस अवसर पर भारत, हंगरी, उत्तरीय अमेरिका आदि देशों के एआई विशेष सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

Related posts

अपने अधिकारों के लिए एकजुट हुए फार्मासिस्ट  

Ashutosh Kumar Singh

विज्ञान के संचार की जिम्मेदारी लें वैज्ञानिक : प्रो. रंजना

admin

आत्महत्या कर रहे हताश-निराश-मजबूर मजदूरों को समझना-समझाना जरूरी

Ashutosh Kumar Singh

Leave a Comment