नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। आयुष मंत्रालय ने दिल्ली में “दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी” विषय पर केंद्रित समारोह के साथ विश्व होम्योपैथी दिवस ( World Homeopathy Day) मनाया। इसमें देश भर से नीति निर्माता, शोधकर्ता, चिकित्सक, शिक्षाविद और छात्र शामिल हुए। यह समारोह डॉ. सैमुअल हैनिमैन की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। इसमें समावेशी तथा सतत स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने में होम्योपैथी की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया गया। इस अवसर पर आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में, देश में सशक्त संस्थानों और अनुसंधान निकायों के सहयोग से एक मजबूत और विस्तारित होम्योपैथी कार्यबल विकसित किया गया है। CCRH, NCH और NIH जैसे संगठन अनुसंधान, शिक्षा और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा वितरण के माध्यम से होम्योपैथी की वैज्ञानिक नींव, नियामक ढांचे और जनविश्वास को लगातार मजबूत कर रहे हैं। इससे देश भर में सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवा में महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है।
होम्योपैथी: सतत अनुसंधान जरूरी
श्री जाधव ने कहा कि होम्योपैथी को एक विश्वसनीय और वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक चिकित्सा पद्धति के रूप में और अधिक मजबूत बनाने के लिए साक्ष्य-आधारित प्रगति, अंतर्विषयक सहयोग और सतत अनुसंधान आवश्यक हैं। उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाली रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययनों को बढ़ावा देने, शिक्षा के मानकों में सुधार करने और चिकित्सकों, शोधकर्ताओं तथा नीति निर्माताओं के बीच मजबूत समन्वय को प्रोत्साहित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक स्वास्थ्य लक्ष्यों के अनुरूप एक समग्र और टिकाऊ स्वास्थ्य सेवा मॉडल को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को भी दोहराया। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने बताया कि सरकार बुनियादी ढांचे में निवेश, सेवाओं के विस्तार और आयुष ग्रिड तथा एचएमआईएस जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से आयुष परितंत्र को मजबूत कर रही है, ताकि साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में सहायता मिल सके। उन्होंने कुशल और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल के विकास हेतु शिक्षा और प्रशिक्षण प्रणालियों के आधुनिकीकरण के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि मजबूत संस्थागत नेटवर्क और अनुसंधान तथा मानकीकरण पर बढ़ते जोर के समर्थन से भारत दुनिया भर में होम्योपैथी के क्षेत्र में अग्रणी देश के रूप में उभरा है, जो सुलभ और टिकाऊ स्वास्थ्य सेवा में योगदान दे रहा है।
होम्योपैथी: पेशेवर व्यवस्था मजबूत
आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री अलार्मेलमंगई डी. ने कहा कि देश की स्वास्थ्य प्रणाली में होम्योपैथी की महत्वपूर्ण भूमिका बनी हुई है, जिसमें संस्थागत विकास, मानकीकरण और वैश्विक स्तर पर पहुंच पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी चिकित्सकों के राष्ट्रीय रजिस्टर जैसी पहल पारदर्शिता बढ़ा रही हैं और पेशेवर व्यवस्था को मजबूत कर रही हैं, जबकि शिक्षण संस्थानों और चिकित्सकों का बढ़ता नेटवर्क इस प्रणाली की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षित, विश्वसनीय और प्रभावी रोगी देखभाल सुनिश्चित करने के लिए इस विस्तार को नैदानिक प्रशिक्षण और दवाइयों की गुणवत्ता के उच्च मानकों के अनुरूप ढालना आवश्यक है। आयुष मंत्रालय में होम्योपैथी सलाहकार डॉ. प्रीथा किझक्कुटिल ने कहा कि होम्योपैथी स्वास्थ्य सेवा के लिए रोगी-केंद्रित और किफायती इलाज प्रदान करती है, जिसमें निवारक और दीर्घकालिक रोगों के इलाज की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि मंत्रालय के तहत चल रही पहलों से इसकी पहुंच और एकीकरण में सुधार हो रहा है, जबकि शिक्षा, अनुसंधान और नैतिक व्यवहार पर निरंतर ध्यान देने से इस प्रणाली की विश्वसनीयता और पहुंच मजबूत हो रही है।
होम्योपैथी: बढ़ी इसकी मान्यता
इस कार्यक्रम का शुभारंभ होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने कहा कि विश्व होम्योपैथी दिवस एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित हुआ है जो होम्योपैथी की बढ़ती मान्यता को दर्शाता है। यह मंच शोधकर्ताओं, चिकित्सकों, शिक्षकों और नीति निर्माताओं को संवाद, नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक साथ लाता है। आज हमारा ध्यान अनुसंधान, नीति और व्यवहार के बीच संबंध को मजबूत करने पर है ताकि वैज्ञानिक ज्ञान को सार्थक जन स्वास्थ्य परिणामों में बदला जा सके। राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर जैन ने जोर देते हुए कहा, “भारत में होम्योपैथी आज केवल एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति नहीं है, बल्कि 345 लाख से अधिक पंजीकृत चिकित्सकों और 291 शिक्षण संस्थानों के समर्थन से यह मुख्यधारा की चिकित्सा प्रणाली के रूप में स्थापित हो चुकी है। राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के माध्यम से, हम पारदर्शिता, शिक्षा की गुणवत्ता और नैतिक मानकों को मजबूत कर रहे हैं ताकि इस प्रणाली की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को और बढ़ाया जा सके।”
होम्योपैथी: कई प्रकाशन जारी
इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण प्रकाशन और ज्ञान संसाधन जारी किए गए जिनमें सीसीआरएच का नया आधिकारिक लोगो और कार्यक्रम की स्मृति चिन्ह शामिल हैं। जारी किए गए प्रमुख प्रकाशनों में “सीसीआरएच जर्नी: पब्लिकेशन आउटरीच एंड नॉलेज डिससेमिनेशन”, एकोरस कैलमस पर एक मोनोग्राफ और “होम्योपैथिक दवाओं के वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य: एक चिकित्सक की मार्गदर्शिका” शामिल हैं। सीसीआरएच का नया न्यूज़लेटर और इंडियन जर्नल ऑफ रिसर्च इन होम्योपैथी (आईजेआरएच) का नवीनतम अंक, वॉल्यूम 20, अंक 1, भी जारी किए गए। इसके साथ ही राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) ने अधिनियम, नियम और विनियमों का वॉल्यूम 2 भी जारी किया। डिजिटल मोर्चे पर, प्रमुख पहलों में आयुष ग्रिड पोर्टल पर एक प्रमाणन पाठ्यक्रम, एआई-सक्षम ज्ञान प्रसार सामग्री, आईआरआईएनएस एकीकरण, एक हिंदी शब्दकोश वेबसाइट और होम्योपैथिक जागरूकता सप्ताह (1-7 अप्रैल) के दौरान आयोजित राष्ट्रव्यापी गतिविधियों का एक ऑडियो-विजुअल संकलन शामिल था।
