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Ebola: रूस ने नए स्ट्रेन का वैक्सीन विकसित किया

Ebola: रूस ने नए स्ट्रेन का वैक्सीन विकसित किया

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। दक्षिण अफ्रीका में स्थित रूसी दूतावास की ओर से यह दावा किया गया है कि रूस के वैज्ञानिकों ने इबोला (Ebola) वायरस के एक नए स्ट्रेन के खिलाफ एक नया वैक्सीन विकसित किया है। रिपोर्ट के अनुसार रूस के स्वास्थ्य मंत्री ने भी इस वैक्सीन की घोषणा की है। इसमें कहा गया है कि यह वैक्सीन इबोला के “बुंडिबुग्यो” नामक दुर्लभ स्ट्रेन पर भी असरदार हो सकता है, जिसे हाल के दिनों में अफ्रीका के कुछ हिस्सों में फैलते हुए देखा गया है। हालांकि इस दावे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभी तक स्वतंत्र रूप से कोई विस्तृत वैज्ञानिक पुष्टि सामने नहीं आई है। आमतौर पर ऐसे बड़े मेडिकल दावों की पुष्टि विश्व स्वास्थ्य संगठनों और वैज्ञानिक शोध पत्रों के माध्यम से की जाती है।

इबोला: कुछ दवा परीक्षण में

WHO ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में फैल रहे इबोला रोग के नए प्रकार, जिसे बंडिबुग्यो वायरस डिजीज (BVD) कहा जाता है, को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। यह रोग इबोला वायरस रोग समूह का ही एक हिस्सा है, जिसे सामान्य रूप से इबोला वायरस डिजीज कहा जाता है। उसके अनुसार इस समय इस बीमारी के लिए कोई भी विशेष रूप से स्वीकृत टीका या दवा उपलब्ध नहीं है। हालांकि कुछ संभावित टीके और दवाएं परीक्षण के चरण में हैं, जिन पर विशेषज्ञों ने ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है। 15 मई को प्रकोप घोषित होने के बाद से कांगो में अब तक 10 पुष्ट और 223 संदिग्ध इबोला मौतें दर्ज हुई हैं, जबकि कुल मामलों की संख्या 1,000 से अधिक बताई गई है। यह आंकड़े 24 मई तक के उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों पर आधारित हैं।

इबोला: तीन दवाओं का सुझाव

इस बीच WHO ने इस प्रकोप को देखते हुए कई तकनीकी और सलाहकार समूहों की बैठकें बुलाईं। इन समूहों में वैज्ञानिक, चिकित्सक और वैक्सीन विशेषज्ञ शामिल थे। उन्होंने यह मूल्यांकन किया कि कौन-कौन सी दवाएं और टीके इस बीमारी के इलाज और रोकथाम में उपयोगी हो सकते हैं। सभी विशेषज्ञों ने सहमति जताई कि फिलहाल इन सभी संभावित उत्पादों का उपयोग केवल क्लिनिकल ट्रायल यानी वैज्ञानिक परीक्षणों में ही किया जाना चाहिए, ताकि इनके प्रभाव और सुरक्षा के बारे में पुख्ता जानकारी मिल सके। विशेषज्ञों ने बंडिबुग्यो वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए तीन मुख्य दवाओं को प्राथमिकता दी है। इनमें दो प्रकार की मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दवाएं शामिल हैं -एमबीपी134 और माफ्टिविमैब। इसके अलावा एंटीवायरल दवा रेमडेसिविर को भी संभावित उपचार के रूप में शामिल किया गया है।

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