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AIIMS Deoghar: आईसीयू अधूरा, सीसीयू बंद

AIIMS Deoghar: आईसीयू अधूरा, सीसीयू बंद

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। एम्स देवघर (AIIMS Deoghar) में ICU अपनी आधी क्षमता पर चल रहा है जबकि क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) अभी तक शुरू ही नहीं हो सकी है। इसके बावजूद 2025-26 के दौरान संस्थान की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च निकाय की बैठक में इन दोनों महत्वपूर्ण सेवाओं की स्थिति पर कोई चर्चा नहीं हुई। इस जानकारी का खुलासा झारखंड के गिरिडीह निवासी आरटीआई कार्यकर्ता सुरेंद्र पांडेय द्वारा दायर सूचना के अधिकार आवेदन के जवाब से हुआ है। एम्स देवघर को झारखंड के बड़े हिस्से को उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।

एम्स देवघर: CCU पर चर्चा नहीं

रिपोर्ट के अनुसार सुरेंद्र पांडेय ने आवेदन में 2025-26 के दौरान इंस्टिट्यूट बॉडी की उन बैठकों का विवरण मांगा था, जिनमें आईसीयू और सीसीयू से संबंधित सुविधाओं, बेड उपलब्धता, विस्तार योजनाओं अथवा कमियों पर चर्चा हुई हो। यह भी पूछा था कि यदि इन विषयों पर कोई चर्चा नहीं हुई हो तो इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए। इस आवेदन के जवाब में एम्स देवघर के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी अजय कुमार बरनवाल ने 13 मई 2026 को बताया कि 22 जनवरी 2026 को इंस्टिट्यूट बॉडी की बैठक आयोजित हुई थी, लेकिन उसके एजेंडे में आईसीयू या सीसीयू से जुड़ा कोई विषय शामिल नहीं था। इंस्टिट्यूट बॉडी की बैठक में इन सेवाओं पर चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि संस्थान में आईसीयू और सीसीयू दोनों की उपलब्धता और संचालन को लेकर गंभीर सवाल मौजूद हैं।

एम्स देवघर: ICU के 10 बेड चालू

सुरेंद्र पांडेय द्वारा दायर एक अन्य आरटीआई आवेदन के जवाब में एम्स देवघर ने बताया कि संस्थान में कुल 19 आईसीयू बेड स्वीकृत हैं, जिनमें दो आइसोलेशन बेड भी शामिल हैं हालांकि इनमें से केवल 10 बेड ही वर्तमान में कार्यशील हैं। यह भी बताया गया कि संस्थान के लिए 80 सीसीयू बेड स्वीकृत हैं, लेकिन सीसीयू की स्थिति ‘नॉट ऑपरेशनल’ यानी गैर-कार्यशील है। दूसरे शब्दों में, स्वीकृत होने के बावजूद सीसीयू सेवा अभी तक शुरू नहीं हुई है। संस्थान के अनुसार आईसीयू सेवाओं के लिए वर्तमान में दो कंसल्टेंट, एक सीनियर रेजिडेंट, 31 नर्सिंग अधिकारी, तीन वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी तथा एक आईसीयू एवं ओटी टेक्नीशियन तैनात हैं। आईसीयू के लिए 34 वेंटिलेटर और 26 कार्डियक मॉनिटर उपलब्ध हैं।

एम्स देवघर: ट्रांसफर केस ज्यादा

आरटीआई के माध्यम से 2023-24 और 2024-25 के दौरान आईसीयू और सीसीयू से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट भी मांगी गई थी। जवाब के अनुसार, 2023-24 में आईसीयू में कुल 132 मरीज भर्ती हुए। इनमें से 97 मरीजों को ‘ट्रांसफर आउट’ श्रेणी में दर्ज किया गया, जबकि केवल तीन मरीज डिस्चार्ज हुए। इसी अवधि में आठ मरीज ‘लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस’ (LAMA यानी चिकित्सक की सलाह के विपरीत जाकर मरीज को ले जाना) श्रेणी में दर्ज किए गए और तीन मरीजों को रेफर किया गया। 2024-25 में आईसीयू में कुल 223 मरीज भर्ती हुए। इनमें 138 मरीजों को ‘ट्रांसफर आउट’ किया गया, केवल एक मरीज डिस्चार्ज हुआ और 18 मरीज लामा श्रेणी में दर्ज किए गए। बता दें कि लामा की श्रेणी में वे मरीज शामिल होते हैं जो चिकित्सकों की सलाह के विपरीत इलाज पूरा होने से पहले अस्पताल छोड़ देते हैं। इन आंकड़ों में सबसे उल्लेखनीय तथ्य ‘ट्रांसफर आउट’ मरीजों की बड़ी संख्या है। हालांकि उपलब्ध दस्तावेजों में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन मरीजों को अस्पताल के भीतर किसी अन्य वार्ड में भेजा गया था या किसी दूसरे अस्पताल में।

एम्स देवघर: ऐसा कहा विशेषज्ञ ने

दिल्ली एम्स के एक वरिष्ठ अधिकारी का ध्यान जब इन चीजों पर खींचा गया तब उन्होंने कहा कि एम्स के स्तर के किसी भी सरकारी अस्पताल में स्वीकृत सुविधाओं का पूरी क्षमता से संचालित होना अपेक्षित है। यदि किसी संस्थान में 80 सीसीयू बेड स्वीकृत हैं और उनमें से एक भी चालू नहीं है, तो इसे सामान्य स्थिति नहीं माना जा सकता। जब कोई सुविधा योजना बनाकर स्वीकृत की जाती है, तो उसका उद्देश्य उसे पूरी तरह संचालित करना होता है। अधिकारी ने कहा कि हृदय संबंधी बीमारियां आज देश में गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हैं और सीसीयू जैसी विशेषीकृत सुविधा उपलब्ध न होने से मरीजों के उपचार पर असर पड़ सकता है। उनके अनुसार, ‘ऐसी स्थिति में मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजना पड़ सकता है या उन्हें निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ सकता है.’ आईसीयू में उपलब्ध मानव संसाधनों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि उपलब्ध नर्सिंग स्टाफ की संख्या संतोषजनक प्रतीत होती है, लेकिन डॉक्टरों की संख्या अपेक्षाकृत कम नजर आती है।

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