विदेशी मरीजों को मिलेंगी वर्ल्ड क्लास सुविधाएं
नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। पटना AIIMS अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार है। केंद्र सरकार के ‘हीलिंग इन इंडिया’ मिशन के तहत पटना एम्स को मेडिकल टूरिज्म के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। इससे बड़े शहरों के महंगे प्राइवेट अस्पतालों के मुकाबले पटना एम्स में विदेशी मरीजों का इलाज काफी किफायती होगा। यह सुविधा सार्क देशों (जैसे नेपाल, बांग्लादेश) और खाड़ी देशों से आने वाले मरीजों को विशेष प्राथमिकता और सुविधाएं दी जाएंगी।
AIIMS: आधुनिक मशीनें लगेंगी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मिशन के तहत एम्स में अंतरराष्ट्रीय मानकों वाली स्वास्थ्य सेवाएं और आधुनिक मशीनें स्थापित की जा रही हैं। स्थानीय मरीजों की तुलना में विदेशियों के लिए इलाज का शुल्क थोड़ा अधिक रखा जाएगा, जिससे संस्थान की आय बढ़ेगी और सुविधाओं में और सुधार होगा। सवाल यह भी है कि इसके लिए पटना एम्स का ही चयन क्यों किया गया। ऐसा भौगोलिक स्थिति के कारण हुआ। पटना में पहले से ही नेपाल और बांग्लादेश के बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। जहां तक कनेक्टिविटी की बात है, पटना के जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल एयरपोर्ट से दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता के लिए सीधी फ्लाइटें हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय मरीजों के लिए आना—जाना आसान होगा। वर्तमान में पटना एम्स की ओपीडी में रोजाना लगभग 4000 मरीज आते हैं, जो इसकी विश्वसनीयता को दर्शाता है।
AIIMS: बन रही पॉलिसी
इस बारे में पटना एम्स के निदेशक डॉ. राजू अग्रवाल ने बताया है कि इस दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं। देश के अन्य बड़े मेडिकल संस्थानों में इलाज के खर्च का अध्ययन किया जा रहा है ताकि एक प्रतिस्पर्धी रेट तय किया जा सके। जल्द ही सभी विभागों को विदेशी मरीजों के लिए विशेष प्रोटोकॉल और सुविधाएं तैयार करने का निर्देश दिया जाएगा। मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित पॉलिसी बनाई जाएगी। मेडिकल टूरिज्म से बिहार और पटना वैश्विक स्वास्थ्य मानचित्र पर मजबूती से उभरेगा। विदेशी मरीजों के आने से स्थानीय होटल, परिवहन और पर्यटन क्षेत्र को भी फायदा होगा। विदेशी मरीजों से होने वाली आय का उपयोग स्थानीय और गरीब मरीजों के लिए बेहतर सुविधाएं जुटाने में किया जा सकेगा।
