स्वस्थ भारत मीडिया
नीचे की कहानी / BOTTOM STORY

Study: महिलाओं की आयु अधिक लेकिन बीमारियां ढेर

Study: महिलाओं की आयु अधिक लेकिन बीमारियां ढेर

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। लैंसेट पब्लिक हेल्थ के एक शोध में पाया गया है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रह सकती हैं, लेकिन वे अक्सर दर्द, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों से जूझते हुए अधिक वर्ष व्यतीत करती हैं। ये निष्कर्ष इस आम धारणा को चुनौती देते हैं कि लंबा जीवन स्वतः ही स्वस्थ जीवन का प्रतीक होता है। इस अध्ययन (Study) में विश्व भर के 204 देशों और क्षेत्रों के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि गैर-घातक स्वास्थ्य समस्याओं का बोझ महिलाओं पर पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक होता है, जबकि गंभीर बीमारियों और चोटों से पुरुषों की मृत्यु जल्दी होने की संभावना अधिक होती है। इसका अर्थ यह है कि महिलाएं अक्सर अधिक समय तक जीवित रहती हैं, लेकिन उनके जीवन के कई अतिरिक्त वर्ष बीमारी और विकलांगता से प्रभावित होते हैं।

स्टडी: पीठ के निचले हिस्से में दर्द

शोधकर्ताओं ने इसे सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्या के रूप में पहचाना है, जो पुरुषों और महिलाओं के बीच अंतर पैदा करती है। यह भी पाया गया कि महिलाएं अवसाद, चिंता, सिरदर्द, मांसपेशियों और हड्डियों से संबंधित विकार और मनोभ्रंश से अधिक पीड़ित होती हैं। ये स्थितियां हमेशा जानलेवा नहीं होतीं, लेकिन ये जीवन की गुणवत्ता को काफी कम कर सकती हैं और रोजमर्रा के कार्यों को मुश्किल बना सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी असमानता जीवन के शुरुआती दौर में ही शुरू हो जाती है और उम्र के साथ बढ़ती जाती है। मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और मांसपेशियों व जोड़ों की समस्याएं अक्सर किशोरावस्था में ही शुरू हो जाती हैं और वयस्कता तक बनी रहती हैं। परिणामस्वरूप, कई महिलाएं अपने जीवन का बड़ा हिस्सा दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते हुए बिताती हैं।

स्टडी: हेल्थ सिस्टम की कमजोरी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टरों का मानना ​​है कि इस प्रवृत्ति के पीछे कई कारण हैं। जैविक और हार्मोनल अंतरसामाजिक कारक भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि महिलाओं में कुछ स्वप्रतिरक्षित और मांसपेशियों से संबंधित बीमारियों के विकसित होने की संभावना अधिक होती है। सामाजिक कारक भी महत्वपूर्ण हैं। कई महिलाएं काम और पारिवारिक जिम्मेदारियों को संतुलित करते हुए घर पर देखभाल की जिम्मेदारियां निभाती हैं, जिससे समय के साथ शारीरिक और भावनात्मक तनाव बढ़ सकता है। कमजोर स्वास्थ्य प्रणाली इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है। इस अध्ययन में स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों की कमियों पर भी प्रकाश डाला गया है। शोधकर्ताओं का तर्क है कि महिलाओं के स्वास्थ्य को अक्सर मुख्य रूप से गर्भावस्था और प्रजनन संबंधी देखभाल के नजरिए से ही देखा जाता है। हालांकि ये क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं, लेकिन महिलाओं को प्रभावित करने वाली अन्य दीर्घकालिक बीमारियों पर अक्सर कम ध्यान दिया जाता है और उन्हें कम संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। रिपोर्ट में स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों से व्यापक दृष्टिकोण अपनाने और दीर्घकालिक दर्द, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और उम्र से संबंधित बीमारियों के लिए बेहतर सहायता प्रदान करने का आह्वान किया गया है। इसके विपरीत, पुरुषों को हृदय रोग, श्वसन संबंधी बीमारियाँ, सड़क दुर्घटनाएँ और कोविड-19 जैसी समय से पहले मृत्यु का कारण बनने वाली स्थितियों से अधिक खतरा होता है।

Related posts

Covid-19 Impact on Economy and Remedial Measures

Ashutosh Kumar Singh

अंगदान की शपथ लेने वाले 90 वर्षीय बहादुर सिंह धाकरे को Big Salute

admin

ऋषि कपूर-इरफान खानः देश मजहब देखकर किसी से प्यार या नफरत नहीं करता

Ashutosh Kumar Singh

Leave a Comment