स्वस्थ भारत मीडिया
समाचार / News

TB मुक्त भारत अभियान के लिए उच्च स्तरीय बैठक

TB मुक्त भारत अभियान के लिए उच्च स्तरीय बैठक

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने टीबी (TB) मुक्त भारत अभियान के कार्यान्वयन में समन्वय मजबूत बनाने और समग्र सरकारी दृष्टिकोण द्वारा इसमें तेजी लाने के लिए केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल, श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ के साथ एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक की। उन्होंने हाल में हुई प्रगति समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने टीबी मुक्त भारत अभियान को राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन में बदलने के लिए भारत की युवा शक्ति के इस्तेमाल की आवश्यकता पर बल दिया था। इसी दृष्टिकोण के अनुरूप श्री नड्डा ने टीबी उन्मूलन के लिए सरकार और समाज के समग्र दृष्टिकोण के साथ प्रत्येक मंत्रालय, संस्था और हितधारकों द्वारा उनकी क्षमताओं और पहुंच के माध्यम से योगदान पर जोर दिया।

टीबी: NCC को भी जोड़ें

बैठक में उन्होंने कहा कि युवाओं, सामुदायिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, कार्यस्थलों और सरकारी विभागों की सक्रिय भागीदारी जागरूकता बढ़ाने, शीघ्र निदान, उपचार के प्रति प्रतिबद्धता और रोगी सहायता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे टीबी मुक्त भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य की तरफ बढ़ा जा सकेगा। स्वास्थ्य मंत्री ने युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय से बातचीत में मौजूदा टीबी मुक्त भारत टोली मॉडल को व्यापक बनाते हुए, अभियान में ‘मेरा युवा भारत’ स्वयंसेवकों और एनसीसी कैडेटों की भागीदारी बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने मंत्रालय से जांच शिविर के लिए स्वयंसेवकों के नेतृत्व में इस कार्य को विस्तारित करने, स्वयंसेवकों को प्रमुख निक्षय मित्र के रूप में प्रशिक्षित करने वाले अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम मजबूत बनाने और स्कूलों, कॉलेजों और समुदायों में युवाओं के नेतृत्व में जागरूकता प्रयास गहन बनाने का भी अनुरोध किया।

टीबी: प्रशिक्षित लोगों का साथ लें

स्वास्थ्य मंत्री ने रक्षा मंत्रालय से सामुदायिक जागरूकता रैलियों, जांच शिविरों के लिए एकत्रीकरण, घरेलू संपर्क शिक्षा और टीबी रोगियों के लिए पोषण सहायता अभियानों में एनसीसी कैडेटों और रक्षा कर्मियों से निरंतर और विस्तारित समर्थन मांगा। साथ ही एनसीसी प्रशिक्षण शिविरों, गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे विशेष अवसरों, साहसिक शिविरों और ग्रामीण आउटरीच कार्यक्रमों में टीबी के प्रति जागरूकता कार्यक्रम शामिल करने का अनुरोध किया। युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने अपने संबोधन में टीबी मुक्त भारत अभियान को और गति देने के लिए संस्थागत समन्वय और समन्वित कार्रवाई सुदृढ़ बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि देश में लगभग 6 लाख स्नातक चिकित्सा छात्रों और लगभग 2 लाख स्नातकोत्तर चिकित्सा छात्रों का प्रशिक्षित मानव संसाधन भंडार है, जिन्हें इस अभियान में देश भर के मेडिकल कॉलेजों के माध्यम से सार्थक रूप से शामिल किया जा सकता है।

टीबी: प्रभावी समन्वय हो

डॉ. मांडविया ने जिला स्तर पर समन्वय प्रभावी बनाने के लिए, प्रतिभा सेतु कार्यक्रम के उम्मीदवारों को जिला टीबी समन्वय समिति में उपयुक्त रूप से शामिल किये जाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत लगभग 600 अधिकारी केंद्र सरकार, मेडिकल कॉलेजों के संकाय अध्यक्ष और राज्य सरकार के जिला टीबी अधिकारियों के बीच प्रभावी समन्वयक की भूमिका निभा सकते हैं। इससे जिला स्तर पर टीबी उन्मूलन गतिविधियों की बेहतर योजना, कार्यान्वयन और निगरानी सुनिश्चित होगी। श्री मांडविया ने मेडिकल कॉलेजों, शैक्षणिक संस्थानों और युवा नेटवर्कों के साथ बेहतर समन्वय के लिए शिक्षा मंत्रालय को भी इसमें शामिल करने के महत्व पर जोर दिया, जिससे व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो और टीबी-मुक्त भारत का लक्ष्य प्राप्त करने में सरकार का समग्र दृष्टिकोण सुदृढ़ बनाया जा सके।

टीबी: करोड़ों लोगों की हुई जांच

मालूम हो कि दिसंबर 2024 में आरंभ टीबी मुक्त भारत अभियान से तपेदिक के सक्रिय मामलों का पता लगाने, मरीज़ों को बेहतर स्वास्थ्य सहायता और समग्र सरकारी दृष्टिकोण द्वारा भारत के तपेदिक उन्मूलन के प्रयास में काफी तेज़ी आई है। अभियान आरंभ होने के बाद से देश भर में 28 करोड़ से अधिक टीबी की आशंका वाले व्यक्तियों की जांच की गई जिसमें 39 लाख से अधिक टीबी मरीज़ों की पहचान हुई। इसमें विशेष रूप से छाती के एक्स-रे जांच से 12.93 लाख लक्षणहीन टीबी रोगियों की पहचान की गई जिससे उनकी बीमारी का शीघ्र निदान संभव हुआ अन्यथा वे अनदेखे रह जाते और अपने समुदायों में बीमारी फैलाते रहते। इस अभियान से रोगी-केंद्रित सहायता तंत्र भी सशक्त हुआ है। इस पहल के तहत 57 लाख से अधिक निक्षय मित्रों ने पंजीकरण कराया है और टीबी रोगियों को 389 लाख पोषण पैकेट वितरित किए हैं। इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम के विशेष देखभाल दृष्टिकोण के तहत 20 लाख से अधिक रोगियों का आकलन कर, उन्हें व्यक्तिगत सहायता प्रदान की गई, जिससे सुनिश्चित किया गया कि उपचार और देखभाल उनकी नैदानिक ​​और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप हो।

टीबी: कई उपायों पर सह​मति

बैठक में मंत्रालयों के बीच समन्वित कार्रवाई द्वारा टीबी मुक्त भारत अभियान के कार्यान्वयन में तेज़ी लाने के लिए कई सहयोगात्मक उपायों पर भी चर्चा की गयी। आम सहमति बनी कि मौजूदा टीबी मुक्त भारत टोली मॉडल का विस्तार करने, टीबी स्क्रीनिंग शिविरों के लिए सामुदायिक एकत्रीकरण का समर्थन करने, लीड निक्षय मित्रों को विकसित करने के लिए अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम बेहतर बनाने और स्कूलों, कॉलेजों और समुदायों में युवा नेतृत्व वाले जागरूकता अभियानों को तेज करने के लिए माय भारत स्वयंसेवकों, एनसीसी कैडेटों और युवा संगठनों के व्यापक नेटवर्क का लाभ उठाया जाए। टीबी उन्मूलन बेहतर बनाने के लिए, टीबी-मुक्त कार्यस्थल ढांचा विकसित करने पर ज़ोर दिया गया, जिसमें विशेष रूप से खनन, निर्माण, वस्त्र, परिवहन और प्रवासी श्रमिकों जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में व्यावसायिक स्वास्थ्य प्रथाओं के अनुरूप टीबी जांच करना शामिल है। बैठक में नियोक्ताओं, मजदूर संघों और कर्मचारी राज्य बीमा निगम और महानिदेशालय कारखाना सलाह सेवा और श्रम संस्थान जैसे श्रम कल्याण संस्थानों को कार्यस्थल जांच सुगम बनाने, उपचार की निरंतरता और टीबी का इलाज करा रहे श्रमिकों के लिए सहायक उपायों को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।

Related posts

MBBS छात्रों के लिए अहम खबर दी NMC ने

admin

ICMR ने राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में स्वर्ण पुरस्‍कार जीता

admin

Study: शरीर के साथ मस्तिष्क पर भी वायु प्रदूषण का बुरा प्रभाव

admin

Leave a Comment