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Study: शरीर के साथ मस्तिष्क पर भी वायु प्रदूषण का बुरा प्रभाव

Study: शरीर के साथ मस्तिष्क पर भी वायु प्रदूषण का बुरा प्रभाव

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। वायु प्रदूषण आज के समय में विकास का दुष्परिणाम बनकर उभरा है। दिल्ली—एनसीआर ही नहीं देश के कई जिले इसकी गहन चपेट में हैं। दिल्ली में तो 2018 के बाद 2025 दिसंबर के बाद से अबतक यह समस्या गंभीर बनी हुई है। ठंड के मौसम में अक्सर ऐसा होता है क्योंकि दिल्ली की हवा सबसे धीमी रहती है। 2.5 का औसत स्तर 211 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच जाता है। यह सब शरीर के साथ—साथ मस्तिष्क को भी प्रभावित करता है, ऐसा एक्स्पर्ट मानते हैं। वे कहते हैं कि लगातार उच्च स्तर पर उत्तरी वायु प्रदूषण से दांत ही नहीं, दिल, दिमाग, जेनेटिक्स से लेकर न्यूरोलॉजिकल आवेश और इम्युनिटी तक प्रभावित हो रही है।

Study: मानसिक कमजोरी भी

न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉक्टर अविनाश सूरी कहते हैं कि आम तौर पर कहा जाता है कि वायु प्रदूषण दिल या दिल पर असर करता है, लेकिन काफी अध्ययन के बाद यह कहा जा सकता है कि ये दिमाग पर भी असर कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि लगातार हवा से सिरदर्द, चक्कर आना और मानसिक रूप से कमजोरी आदि हो सकती है। वहीं लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने से अल्जाइमर, डाइमेंशिया, पार्किंसंस, एडीएचडी और बच्चों में ऑटिज्म जल्दी शुरू हो सकता है। स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ सकता है। वे वायु प्रदूषण का प्रभाव कम करने के लिए घर में एयर प्यूरीफायर लगाने और घर के बाहर N95 या N99 मास्क पहनने की सलाह देते हैं। प्रदूषण का स्तर अधिक पर वे घर के अंदर ही होने से अधिक समय गुजराते की भी सलाह देते हैं। इनडोर प्लांट्स घर के भीतर रखने से भी राहत मिलेगी।

Study: दिमागी विकास पर प्रभाव

इस बारे में जर्नल एनवायरनमेंटल रिसर्च में प्रकाशित इस शोध में पाया गया कि आरामदेह हवा के संपर्कों से आराम के दिमाग में रहने के स्थान में बदलाव हो सकते हैं। इसका सबसे अधिक प्रभाव मस्तिष्क के सामने और टेम्पोरल लचीलेपन पर पड़ता है, जो विचार-समझने, भाषा, भावनाओं पर नियंत्रण और सामाजिक व्यवहार जैसे अहम् स्थान से जुड़े होते हैं। वायु प्रदूषण में केमिकल तत्व के साथ-साथ ओजोन, कार्बन आदि भी होते हैं। बढ़ती औद्यौगिकीकरण, धुआं और धधकते जंगल ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। इससे पहले एक शोध में यह साफ हो गया था कि प्रदूषण से जुड़े प्लांट, हृदय से जुड़े उपकरण और मेटाबोलिज्म से जुड़े उपकरण खराब हो रहे हैं, लेकिन दिमाग और दिमाग-समझने की क्षमता अभी तक पूरी तरह से समझ में नहीं आ पाई है। अब नए अध्ययन में दिमागी विकास पर वायु प्रदूषण के प्रभाव का अध्ययन किया गया है। बच्चों में एकाग्रता की कमी, याद्दाश्त की कमजोरी और स्थिरता में बदलाव हो सकता है। इसका असर उनकी पढ़ाई और व्यवहार पर भी पड़ सकता है।

Study: बच्चों के लिए संकट

अध्ययन से जुड़े पर्यावरण वैज्ञानिकों का कहना है कि अब केवल प्रदूषण का कोई मतलब नहीं रह गया है। बच्चों के स्वास्थ्य के लिए यह बड़ा संकट बन गया है। इस बात पर भी ज़ोर दिया गया है कि डॉक्टर अकेले इस समस्या का समाधान नहीं कर सकते। इसके लिए परिवहन, हरित क्षेत्र का विस्तार और सख्त वायु गुणवत्ता मानक जैसे नीतिगत प्रयास भी जरूरी हैं। साथ ही, इलाज करते समय पर्यावरण कारकों पर भी ध्यान रखना होगा। अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि हवा में उड़ते जहर बच्चों के दिमाग पर दबे पांव वार कर रहा है। इस अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि अब भी प्रदूषण पर काबू नहीं पाया गया तो इसकी कीमत स्वास्थ्य और भविष्य को चुकानी पड़ेगी। इसके लिए कानूनी और प्रशासनिक स्तर कठोर कदम उठाने ही होंगे।

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