नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। ओडिशा के संबलपुर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने औषधीय पौधों से कैंसर-रोधी (Anti cancer) पॉली-हर्बल दवा तैयार की है। ये पौधे गंधमार्दन पहाड़ियों में पाए जाते हैं। इसका जानवरों पर ट्रायल किया गया तो इस दवा के अच्छे नतीजे मिले हैं, जिससे कैंसर के मरीजों के लिए ज्यादा सुरक्षित और असरदार इलाज की उम्मीद जगी है। अब इंसानों पर सफल क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी की जा रही है।
7 साल से शोध का काम
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार संबलपुर यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नोलॉजी और बायोइनफॉरमैटिक्स डिपार्टमेंट और ‘रिसर्च सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ ने यह शोध की है। टीम ने 2019 में अपनी स्टडी शुरू की और पारंपरिक आयुर्वेदिक विशेषज्ञों की सलाह पर गंधमार्दन पहाड़ियों के लगभग 50 औषधीय पौधों की प्रजातियों की जांच की। काफी रिसर्च के बाद, एंटी-कैंसर पॉलीहर्बल फॉर्मूला बनाने के लिए पांच औषधीय पौधों को चुना गया। स्टडी में ट्यूमर बनाने के लिए लैब में चूहों के शरीर में कैंसर सेल्स डाले गए। फिर हर्बल दवा से लगभग 35 दिनों के इलाज के बाद ट्यूमर पूरी तरह खत्म हो गए। यह भी दावा किया गया कि पारंपरिक कीमोथेरेपी के उलट, जानवरों पर की गई स्टडी के दौरान इस हर्बल दवा से कोई खास साइड इफेक्ट नहीं दिखे। टीम के प्रोफेसर प्रदीप के अनुसार ट्रायल के दो फेज सफल हुए हैं और दो फेज अभी बाकी हैं। अभी 90 से 95 दिनों तक और रिसर्च होनी है। इससे हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि ये मेडिसिनल जड़ी-बूटियां कैंसर सेल्स पर कैसे काम करती हैं। जानवरों पर एक्सपेरिमेंट पूरे होने के बाद इंसानों पर ट्रायल शुरू किए जाएंगे।
ट्रायल के कई दौर बाकी
बायोटेक्नोलॉजी और बायोइनफॉरमैटिक्स डिपार्टमेंट के हेड प्रदीप नायक ने बताया कि चूहों और इंसानों में 99.8 परसेंट बायोलॉजिकल समानता है। CCRAS के साथ एक MoU साइन किया गया है और दवा का टेस्ट कैंसर के मरीजों पर किया जाएगा। देश भर में CCRAS से संबद्ध 30 हॉस्पिटल हैं। सफल क्लिनिकल ट्रायल के बाद ही इंसानों में इस दवा की सुरक्षा और असरदारता वैज्ञानिक रूप से साबित हो पाएगी। उन्होंने बताया कि मानव ट्रायल तीन फेज में होंगे। पहले में इन दवाओं का सिर्फ 20 से 30 मरीजों पर टेस्ट किया जाएगा। अगर कोई साइड इफेक्ट नहीं दिखता है तो दूसरे फेज में 200 से 300 लोगों को दवा दी जाएगी। अगर तब भी कोई दिक्कत नहीं आती है तो तीसरे फेज में 4 हजार से 5 हजार मरीजों पर दवा का टेस्ट किया जाएगा। इसमें सफलता मिलने के बाद आम मरीजों के इस्तेमाल के लिए दवा को कमर्शियली रिलीज़ करने की मंजूरी ली जाएगी। प्रोफेसर प्रदीप ने बताया कि यह रिसर्च संबलपुर यूनिवर्सिटी की एडवांस्ड लैब में मॉडर्न साइंटिफिक इक्विपमेंट का इस्तेमाल करके की गई थी। इस प्रोजेक्ट में लैब प्रयोग के लिए इस्तेमाल किए गए कैंसर सेल सैंपल पुणे के नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंस (NCCS) से लिए गए थे। लाइव और डेड सेल्स के अनुपात का पता लगाने के बाद एंटी-कैंसर ट्रीटमेंट के लिए 50 पौधों में से पांच को चुना गया।
