नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य का विषय होने के कारण नए आयुष शिक्षण संस्थानों की स्थापना की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों के दायरे में आती है। हालांकि राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) की केंद्र प्रायोजित योजना के तहत प्रदेश सरकारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रावधान है जहां सरकारी क्षेत्र में आयुष शिक्षण संस्थानों की अपर्याप्त उपलब्धता है। राज्य एनएएम दिशानिर्देशों के प्रावधानों के अंतर्गत राज्य वार्षिक कार्य योजनाओं (एसएएपी) के माध्यम से उपयुक्त प्रस्ताव प्रस्तुत करके वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं। ओडिशा सरकार से प्राप्त प्रस्ताव के आधार पर वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एनएएम के तहत एक आयुष शिक्षण संस्थान, सरकारी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, मयूरभंज को मंजूरी दी गई है। एनएएम के तहत समर्थित आयुष शिक्षण संस्थानों में 17 राज्यों में कुल 25 आयुष शिक्षण संस्थान 2014 से अब तक खोले गए हैं। यह जानकारी आयुष मंत्री प्रताप राव जाधव ने राज्य सभा में दी।
डायलिसिस की सुविधा
एक अन्य सवाल पर श्री जाधव ने जानकारी दी कि सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत राज्यों को स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मजबूत करने के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिसमें डायलिसिस सेवाएं भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम (PMNDP) का उद्देश्य जिला अस्पतालों में डायलिसिस केंद्रों की स्थापना करना और पात्र रोगियों को निःशुल्क डायलिसिस सेवाएं प्रदान करके हेमोडायलिसिस सेवाओं तक पहुंच में सुधार करना है। यह कार्यक्रम वर्तमान में सभी 36 राज्यों के 44 संबद्ध जिलों सहित 751 जिलों में 1,856 हेमोडायलिसिस केंद्रों के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है। जून 2026 तक दी गई जानकारी के अनुसार इन केन्द्रों में 13,535 हेमोडायलिसिस मशीनें उपलब्ध हैं।
एनीमिया मुक्ति अभियान
भारत सरकार ने हाल ही में 29 जून 2026 को आयोजित केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (सीसीएचएफडब्ल्यू) की 16वीं बैठक के दौरान एनीमिया मुक्त भारत अभियान के परिचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों में एनीमिया से निपटने के लिए 7X7X7 रणनीति अपनाई गई है। यह कार्यक्रम के तहत अपनाई गई 6X6X6 रूपरेखा से आगे की रणनीति है। एनीमिया मुक्त भारत अभियान के घटक इस प्रकार है।
1. डिजिटल इनवेसिव हीमोग्लोबिनोमीटर का उपयोग करके हीमोग्लोबिन परीक्षण।
2. एनीमिया के निदान की श्रेणी के अनुसार रोकथाम और लक्षित चिकित्सीय प्रबंधन।
3. पोषण संबंधी एनीमिया और गैर-पोषण संबंधी एनीमिया के मामलो को अलग करना।
4. निगरानी के लिए सुदृढ़ डिजिटल प्रणाली: टी3 दृष्टिकोण (परीक्षण, उपचार, चर्चा) से टी4 दृष्टिकोण (परीक्षण, उपचार, चर्चा और 5. निगरानी) की ओर बदलाव। स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्य सभा में यह जानकारी दी।
