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दवा विपणन की समीक्षा के लिए समिति का गठन

दवा विपणन की समीक्षा के लिए समिति का गठन

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग ने दवा विपणन को नियंत्रित करने वाले मौजूदा नियामक ढांचे की व्यापक समीक्षा करने तथा औषध क्षेत्र में अनैतिक प्रथाओं पर अंकुश लगाने के लिए निगरानी, पर्यवेक्षण और प्रवर्तन तंत्र को सुदृढ़ बनाने के उपायों की सिफारिश करने हेतु एक समिति का गठन किया है। नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है जबकि पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती प्रीति सूदन और मेदांता के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. नरेश त्रेहन को इसका सदस्य बनाया गया है। समिति आवश्यक परामर्श प्रक्रिया पूरी करने के बाद अपनी पहली बैठक की तारीख से दो महीने की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी। दवा विपणन के लिए समान आचार संहिता (UCPMP) को 2015 में एक स्वैच्छिक, उद्योग-संचालित स्व-नियामक तंत्र के रूप में पेश किया गया था, जिसका उद्देश्य नैतिक दवा विपणन को बढ़ावा देना और दवा कंपनियों एवं स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों के बीच बातचीत को विनियमित करना था। इसके बाद विभाग ने यूसीपीएमपी 2024 पेश किया जिसने 2015 के संस्करण की जगह ली और इसके लागू करने के ढांचे को मजबूत बनाया। वर्तमान में 2024 की यह आचार संहिता लागू है।

ये होंगे जांच के मुद्दे

समिति अनैतिक दवा विपणन प्रथाओं से संबंधित मुद्दों की व्यापक जांच करेगी और निम्नलिखित संदर्भ की शर्तों (TOR) पर अपनी सिफारिशें प्रदान करेगी:
A- अनैतिक दवा विपणन प्रथाओं(फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिस) से संबंधित सभी मुद्दों की समग्र और व्यापक जांच करना।
B- दवा विपणन की अनैतिक प्रथाओं की निगरानी, ​​देखरेख और प्रवर्तन के लिए मौजूदा तंत्रों की प्रभावशीलता की जांच करना, और अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही तथा प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों की पहचान करना।
C- मौजूदा निगरानी और नियामक ढांचे को मजबूत करने के लिए आवश्यक उपायों की आवश्यकता की जांच करना, तथा ऐसे उपायों के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक उपयुक्त नियामक/वैधानिक या किसी अन्य उपाय एवं कानूनी ढांचे का सुझाव देना।
D- आवश्यकतानुसार संबंधित हितधारकों, तकनीकी, पेशेवर और विषय विशेषज्ञों, संस्थानों या निकायों के साथ चर्चा करना और इस विषय की व्यापक जांच के बाद अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करते समय उनके सुझावों पर निष्पक्ष रूप से विचार करना।
E- अनैतिक दवा विपणन प्रथाओं पर अंकुश लगाने से संबंधित किसी भी अन्य प्रासंगिक मुद्दे पर विचार-विमर्श करना और सिफारिशें प्रस्तुत करना।

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