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असली हीरो बनें, हेमा मालिनी का संदेश

 
नई दिल्ली/नई दिल्ली
प्रियंका सिंह
13 अगस्त को पूरी दुनिया विश्व अंगदान दिवस के रूप में मनाती है। अंगदान के प्रति लोगों को जागरुकता फैलाने के लिए हेमा मालिनी ने अपने प्रशंसकों एवं देशवासियों को एक संदेश दिया है। सभी को असली हीरो बनने का सुझाव दिया है। उन्होंने ट्वीटर पर लिखे अपने संदेश में कहा है कि आपको असली हीरो बनना चाहिए। उनका कहने का तात्पर्य यह है कि असली हीरो वह है जो लोगों के लिए जीता-मरता है। अगर आप असली हीरो बनना चाहते हैं तो अंगदान करें। गौरतलब है कि लाखों लोग विभिन्न दुर्घटनाओं में अपनी जान इसलिए गंवा देते हैं क्योंकि समय पर उनके अंगों का प्रत्यारोपण नहीं हो पाता है।
अंगदान क्या है?
अपने शरीर के उन अंगों को दान करना जो चिकित्सकीय मानको पर किए जा सकते हैं। उस प्रक्रिया को अंगदान कहा जाता है। अंगदान दूसरों को दूसरी जिंदगी देने का ही दूसरा नाम है। भारत में लोगों के बीच इसको लेकर सही जानकारी नहीं है जिसके कारण लोग अंगदान करने से  घबराते हैं या घर वाले भी साथ नहीं देते हैं।
दरअसल अंगदान दो प्रकार से किए जाते हैं। जीवित रहते हुए एवं मरने के बाद। जीवित रहते हुए यकृत और गुर्दा तथा दुर्लभ मामलों में आँत और फेफड़े के एक भाग को भी दान किया जा सकता है। इस तरह मृत्यु के बाद भी आठ अन्य लोगों को नया जीवन दिया जा सकता है। इसके लिए मृत्यु के पूर्व अपनी सहमति का पंजीकरण जरूरी होता है। साथ ही परिजनों की सहमति भी जरूरी होती है। परिजनों  की सहमति के बिना आप अपना अंग दान नहीं  कर सकते हैं।
जीवित रहते हुए दान किए जाने वाले अंग

  • यकृत: यकृत का एक हिस्सा दान कर दिया जाए, तो भी दानदाता के दिनचर्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। यकृत का दान किया हुआ हिस्सा फिर से यथा स्थिति को प्राप्त करने की क्षमता रखता है।
  • गुर्दा: मनुष्य एक गुर्दे से भी जीवित रह सकता है, इसलिए दूसरे गुर्दे को दान किया जा सकता है।
  • फेफड़े: फेफड़े के एक भाग को दान किया जा सकता है।
  • आँत: दुर्लभ मामलों में दाताओं के द्वारा आँत का एक हिस्सा दान किया जा सकता है।

फिर देर किस बात की है। आप भी अंगदान को अपनाएं और दूसरों को जीवन दें। ईश्वर ने यह जीवन लोगों के दुःख-दर्द को कम करने के लिए  दिया है। अज्ञानता स्वरूप कई बार हम लोगों को कष्ट पहुंचाते रहते हैं। अंगदान सकारात्मक जीवन जिने वालों को करना ही चाहिए लेकिन जो नकारात्मक तरीके से अपना जीवन व्यतीत करता  रहा है, उसे अगर अपनी गलती का एहसास हो जाए तो प्रायःश्चित करने का सबसे उत्तम उपाय है अंगदान।
 

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