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लैब में तैयार होगा रक्त, कमी होगी दूर

अजय वर्मा

नयी दिल्ली। रक्तदान के प्रति जागरूकता के अभाव से गंभीर मरीजों का जीवन संकट में फंस जाता है। कई बार मैचिंग ग्रुप नहीं मिलता है तो कई बार गरीब मरीज खरीद नहीं पाते हैं। लेकिन अब लैब में भी रक्त विकसित किया जाने लगा है जो भविष्य में राहत देगा। ब्रिटेन के कैम्ब्रिज और ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी सहित कई संस्थानों के वैज्ञानिक इस ट्रायल में शामिल हैं। इससे संभावनाओं के नये दरवाजे खुलेंगे।

RBC से बनेगा लैब में रक्त

खबर के मुताबिक लैब में खून बनाने वाली इस प्रक्रिया में तइब (लाल रक्त कोशिका) पर फोकस किया जाता है। ये फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर उसे शरीर के हर अंग तक पहुंचाते हैं। वैज्ञानिक सबसे पहले लगभग 470 मिलीलीटर रक्त डोनेशन कराते हैं। फिर चुंबक के जरिए सैंपल से उन स्टेम सेल्स को अलग किया जाता है, जो आगे जाकर रेड ब्लड सेल्स बन सकते हैं। एक्सपार्ट के मुताबिक स्टेम सेल बोन मैरो में होते हैं, जिनसे खून के तीन अहम सेल-रेड ब्लड सेल, व्हाइट ब्लड सेल और प्लेटलेट्स बनते हैं। अब स्टेम सेल्स को प्रयोगशाला में भारी संख्या में विकसित किया जाता हैं। इसके बाद इन्हें रेड ब्लड सेल्स में कन्वर्ट कराया जाता है। इसमें करीब 3 हफ्ते लगते हैं। इस दौरान 5 लाख स्टेम सेल्स से 50 अरब रेड ब्लड सेल्स बन जाते हैं। इनसे 15 अरब रेड ब्लड सेल्स को फिल्टर किया जाता है, जो ट्रांसप्लांट में काम आ सकते हैं।

खून में रेडियोएक्टिव तत्व मौजूद

रिसर्च में अभी दो लोगों को शामिल किया गया है। हालांकि पूरा ट्रायल 10 सेहतमंद लोगों पर किया जाएगा। इन्हें 4 महीने के अंतराल में 5 से 10 मिलीलीटर के दो ब्लड डोनेशन दिए जाएंगे। इनमें से एक नॉर्मल ब्लड होगा और दूसरा लैब में तैयार। लैब वाले खून में रेडियोएक्टिव तत्व भी है, जिससे उसकी परफॉर्मेंस को ट्रैक किया जाएगा।

120 दिन चलते हैं RBC

आमतौर पर रेड ब्लड सेल्स शरीर में 120 दिन टिकते हैं। इसके बाद इनकी जगह नए सेल्स ले लेते हैं। नॉर्मल डोनेशन में मिलने वाले खून में नए और पुराने दोनों रेड ब्लड सेल्स होते हैं। मगर लैब में बनाए गए खून के सेल्स पूरी तरह नए हैं। इसलिए उम्मीद है कि ये पूरे 120 दिन चलेंगे। इससे भविष्य में मरीजों को कम ब्लड डोनेशंस की जरूरत पड़ेगी।

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