नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। ठीक एक साल पहले जब 2025 का बजट (Budget) पेश किया गया था तो सरकार ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को लगभग 99,858 करोड़ रुपये आवंटित करके भारत में हेल्थकेयर को मजबूत करने की पक्की प्रतिबद्धता जताई थी। पिछले साल पेश बजट की महत्वपूर्ण घोषणाओं पर एक नजर डाल लेना जरूरी है तभी इस साल के बजट को लाभकारी कहा जा सकता है।
बजट: पिछले साल ज्यादा सौगात
पिछले साल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वास्थ्य क्षेत्र को कई सौगात दी थीं। मेडिकल स्नातक और पीजी सीटें बढ़ाने, मेडिकल की पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए 10,000 अतिरिक्त सीटें जोड़ने, अगले 3 साल में सभी जिला अस्पतालों में डेकेयर कैंसर सेंटर की स्थापना की सुविधा, कैंसर और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित रोगियों को राहत देने के लिए 36 जीवन रक्षक दवाओं को सीमा शुल्क से पूरी तरह छूट देने की घोषणा की गई थी। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PMJAY) को 9,406 करोड़ का आवंटन मिला था। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) को 37,226.92 करोड़ जबकि राष्ट्रीय टेली मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को 79.6 करोड़ आवंटित किए थे।
बजट: उम्मीदें थी ऐसी
इस साल के बजट से हेल्थ सेक्टर के लीडर्स को उम्मीद थी कि सरकार के पिटारे से इस साल कुछ ऐसी योजनाएं आ सकती हैं जिसका दीर्घकालिक रूप से लाभ मिलेगा। कम से कम इतना पैसा आवंटित हो कि महत्वाकांक्षी लक्ष्यों और मेडिकल खर्च की जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को पाटा जा सके। पिछले बजट में जरूरी दवाओं को ज्यादा किफायती बनाने और डिजिटल हेल्थ को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया था। 2047 तक ‘विकसित भारत’ लक्ष्य के लिए 2026-27 के बजट को ‘स्वस्थ भारत’ बनाने के लॉन्ग-टर्म विजन को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए। जरूरी मेडिकल टूल्स और सेवाओं पर जीएसटी कम करने की भी उम्मीद रही। ज्यादा जेब खर्च को मैनेज करने के लिए मेडिकल डिवाइस, डायग्नोस्टिक किट पर जीएसटी कम करने की उम्मीद थी। इससे इलाज की लागत में सीधे कमी आती और हेल्थ इंश्योरेंस लेने वालों की संख्या बढ़ती।
बजट: क्रॉनिक बीमारियों की रोकथाम
कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियों की रोकथाम और इलाज के लिए पिछले कुछ बजट में सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। 2024-25 के बजट में सर्वाइकल कैंसर टीकाकरण बढ़ाने पर जोर दिया गया ताकि महिलाओं को जानलेवा कैंसर से बचाया जा सके। वहीं अगले साल 2025-26 के बजट में कैंसर की जीवन रक्षक दवाओं की सीमा शुल्क से छूट दी गई थी। इस बजट में भी कम से कम 17 और ड्रग्स-जो कैंसर से जुड़े हुए हैं, पूरी तरह से कस्टम ड्यूटी से मुक्त हो गए हैं। इसके अलावा सात अधिसूचित दुर्लभ रोगों के उपचार में विशेष चिकित्सा उद्देश्य वाली दवाएं, औषधि और खाद्य पदार्थों पर भी आयात शुल्क की छूट दी गई है। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में बढ़ते मोटापे की समस्या को लेकर लगातार चिंता जताते रहे हैं। मोटापे की रोकथाम और इससे होने वाली बीमारियों की रोकथाम की दिशा में भी किसी फैसले की उम्मीद इस बार सामने नहीं आ सकी।
बजट: बायोलोजिक उपचार पर बल
मालूम हो कि बजट 2026-27 में बायोलॉजिक और बायोसिमिलर दवाओं के देश में उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की ‘बायोफार्मा शक्ति’ योजना की घोषणा की गई। यह योजना अगले पांच साल तक लागू रहेगी। बायोलोजिक उपचार जीवन की गुणवत्ता और आयु बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन पुराने मूल्य के इलाज को महंगा बना दिया गया है। बायोलॉजिक सावेरिवेव सॉसेज या स्टोयली से बनाये जाते हैं। इनमें मोनोक्लोनल स्टेरॉयड, जीन थेरेपी, हार्मोन और एंजाइम्स जैसी दवाएं शामिल हैं। इनके प्रयोग से कैंसर, सिगरेट और ऑटोइम्यून थेरेपी का इलाज होता है। ये दवा आम केमिकल औषधियों से अलग हैं क्योंकि इनकी संरचना अधिक जटिल है। वहीं, बायोसिमिलर आहार बायोलॉजिक औषधियों के विकल्प मौजूद हैं। ये जेनेरिक औषधियां जैसी होती हैं, लेकिन बायोलॉजिक औषधियों की आकृति के कारणबनाना आसान नहीं होता। पीपुल्स हेल्थ डिस्कवरी के ग्लोबल कोऑर्डिनेटर और एनएचएसआरसी के पूर्व प्रमुख डॉ. टी. सुंदरमन ने इस कदम को समय की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि भविष्य में चिकित्सा क्षेत्र में बायोलॉजिक औषधियों की भूमिका बहुत अहम होगी, लेकिन अभी ये दवाएं बेहद खराब हैं।
