नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। केंद्र सरकार ने संसद में माना कि दिल्ली—एनसीआर में वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर है। इसके अलावा नल—जल, जल जीवन मिशन, गंगा प्रदूषण, वेस्ट प्रबंधन समेत कई पर्यावरणीय मामलों पर सरकारी पहल की जानकारी दी।
संसद: प्रयास जारी
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को लेकर उठाए गए एक सवाल के जवाब में 4 दिसंबर को राज्यसभा में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CQM) स्थापित किया है। यह आयोग 2021 के कानून के तहत गठित किया गया था और इसे विभिन्न एजेंसियों को दिशा-निर्देश जारी करने का अधिकार प्राप्त है। अब तक आयोग द्वारा 95 वैधानिक निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इन निर्देशों की निगरानी के लिए एक मजबूत तंत्र भी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण एक जटिल समस्या है, जिसमें विभिन्न राज्यों, परिवहन, उद्योग और मौसम संबंधी कारक जुड़े हैं। सरकार सभी प्रदूषण को कम करने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है।
संसद: गंगा बेसिन में सीवेज
इसी तरह गंगा बेसिन में सीवेज पर आए एक प्रश्न पर जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने बताया कि गंगा नदी के मुख्य प्रवाह से जुड़े पांच राज्यों में कुल 10,160 MLD सीवेज उत्पन्न होता है। इसके मुकाबले मौजूदा सीवेज उपचार संयंत्रों (STP) की क्षमता 7,820 एमएलडी है। इस अंतर को भरने के लिए 1,996 एमएलडी क्षमता के नए संयंत्र विभिन्न चरणों में निर्माणाधीन हैं। सरकार नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत गंगा नदी की स्वच्छता और अविरलता को सुनिश्चित करने के लिए बड़े स्तर पर कार्य कर रही है। सीवेज प्रबंधन गंगा प्रदूषण नियंत्रण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है क्योंकि यह नदी में प्रदूषण बढ़ाता है। नए संयंत्रों के पूरा होने से गंगा के तटवर्ती शहरों में जल गुणवत्ता में सुधार आएगा और नदी के संरक्षण के प्रयास मजबूत होंगे।
संसद: ई-कचरा प्रबंधन
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने एक इन्य सवाल पर CPCB की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 2024-25 में देश में 13,97,955.59 मीट्रिक टन ई-वेस्ट उत्पन्न हुआ, जिसमें से 11,59,228.24 मीट्रिक टन की रीसाइक्लिंग हुई। यह आंकड़े उत्पादकों द्वारा दी गई बिक्री जानकारी और उपकरणों की औसत आयु के आधार पर तैयार किए जाते हैं। बढ़ता ई-वेस्ट देश के सामने एक प्रमुख पर्यावरणीय चुनौती है इसलिए सरकार रीसाइक्लिंग व्यवस्था को मजबूत कर रही है और जिम्मेदार ई-वेस्ट निपटान पर जोर दे रही है।
संसद: 81.36 फीसद घरों में नल से जल
हर घर नल से जल संबंधी सवाल के जवाब में जल शक्ति राज्य मंत्री वी सोमैया ने लोकसभा में कहा कि जब जल जीवन मिशन की शुरुआत हुई थी, तब केवल 3.23 करोड़ ग्रामीण परिवार (17 फीसद) नल से पेयजल सुविधा से जुड़े थे। लेकिन एक दिसंबर 2025 तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 12.52 करोड़ अतिरिक्त ग्रामीण घरों को नल जल कनेक्शन मिल चुका है। वर्तमान में देश के 19.36 करोड़ ग्रामीण घरों में से 15.75 करोड़ (81.36 फीसद) घरों में नल से जल की सुविधा उपलब्ध है। शेष 3.69 करोड़ घरों में जलापूर्ति कार्य विभिन्न चरणों में प्रगति पर है। इस योजना का उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक स्वच्छ, सुरक्षित और नियमित पेयजल उपलब्ध कराना है। इससे महिलाओं और बच्चों पर पानी लाने का बोझ काफी कम हुआ है और गांवों में स्वास्थ्य तथा स्वच्छता को बढ़ावा मिला है। जल जीवन मिशन ग्रामीण भारत के जीवन स्तर में महत्वपूर्ण बदलाव ला रहा है।
