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  • बढ़ते तनाव, पढ़ाई और मार्क्स की चिंता, एक्सरसारइज की कमी, बच्चों में बढ़ा रही है डायबीटीज
  • बच्चों में बढ़ता मोटापा बन रहा है टाइप-2 डायबीटीज की मुख्य वजह

Deepika Sharma For NBT
diabetes-day-300x450छुट्टी के दिन परिवार के साथ डिनर हो या फिर स्कूल की कैंटीन में कुछ खाने की बात, आजकल बच्चे फास्ट फूड की तरफ लगातार बढ़ रहे हैं। लेकिन खाने की बिगड़ती इन आदतों ने बच्चों में लगातार डायबीटीज के खतरे को बढ़ा दिया है। आज भारत में ‘बाल दिवस’ और दुनिया भर में ‘वर्ल्ड डायबीटीज डे’ एक साथ मनाया जा रहा है। खराब होती खाने की आदतों के साथ ही, पिछले कुछ वर्षों में बच्चे हों या बड़े सभी में नाश्ता न करने की आदत पनपती दिख रही है। यही कारण है कि मोटापे से बचने और डायबीटीज को कम करने के लिए इस साल विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने ‘हेल्दी ब्रेकफास्ट’ को अपनी थीम बनाया है।
बच्चों में मोटापे और डायबीटीज के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए द इंडियन डायबीटिक फेडरेशन, फोर्टिस रहेजा अस्पताल के साथ मुंबई समेत भारत भर में स्कूलों में बच्चों को जानकारी देने का अभियान शुरू किया है। रहेजा अस्पताल के डायबीटोलॉजिस्ट, डॉ़ अनिल भोरास्कर का कहना है कि हमारा प्रयास है कि इस अभियान के माध्यम से बच्चों और टीचरों को पोष्टिक भोजन के महत्व और जंक व जहरीले खाने के नुकसान के बारे में जानकारी देंगे। उनका कहना है कि साउथ ईस्ट ऐशिया रीजन में दुनिया भर में सबसे ज्यादा टाइप-1 डायबीटीज से बच्चे पीड़ित हैं। एक अनुमान के अनुसार 2011 में इस क्षेत्र के लगभग 18,000 बच्चे टाइप-1 डायबीटीज से जूझ रहे हैं।
बच्चों में बढ़ रहा है खतरा
बच्चों में बढ़ते मोटापे की वजह से बच्चों में टाइप 2 डायबीटीज की तादाद लगातार बढ़ रही है। डायबीटीज के लक्षणों में ज्यादा पेशाब और प्यास लगना शामिल हैँ। अकसर वजन कम होना, कमजोरी और आलस्य, ज्यादा भूख लगना (कभी-कभी भूख मरना), रात में बिस्तर पर पेशाब जबकि पिछली ‘रात में सूखा’ रहना आदि शुरुआती लक्षण हैं जो बच्चे को लेकर अस्पताल आने से पहले एक सप्ताह से 6 माह तक माता-पिता को दिखते हैं। टाइप 1 के कुछ मरीजों (लगभग 25 फीसदी) में डायबेटिक कीटोएसीडोसिस (डीकेए) हो सकता है जो गंभीर लक्षण है। इसमें उल्टी, पेट दर्द और डिहाड्रेशन (मुंह, होंठ सूखना, आंख धंसना आदि) शामिल हैं। जानकारी हो तो माता-पिता जल्द लक्षण पकड़ लेते हैं और बच्चे को डीकेए की श्रेणी में जाने से बचा सकते हैं।
बच्चों में बढ़ते डायबीटीज के प्रमाणों के विषय में बात करते हुए हीरानंदानी और कोहीनूर अस्पताल से जुड़ी ऑबेसिटी कंसल्टेंट और लेप्रोस्कॉपी सर्जन, डॉ़ जयश्री तोड़कर बताती हैं कि बच्चों में बढ़ते मोटापे को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। बल्कि माता पिता को जल्द से जल्द इस विषय पर ध्यान देना चाहिए।
ग्लोबल अस्पताल की एन्डोक्रोनोलॉजिस्ट, डॉ़ नलिनी शाह का कहना है कि भारत में लगातार बढ़ते डायबीटीज के प्रमाण का प्रमुख कारण है जागरूकता और रोकथाम के उपायों की कमी। ऐसे में शिक्षा और जागरूकता बहुत ज्यादा जरूरी हो जाते हैं। मुंबई की बात करें तो मुंबई में डायबीटीज के मामलों में पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले 20% की वृद्धि हुई है।
डायबीटीज के प्रकार
टाइप 1 डायबीटीज: यह बचपन में या किशोर अवस्था में अचानक इंसुलिन के उत्पादन की कमी होने से पैदा होने वाली बीमारी है। इसमें इंसुलिन हॉर्मोन बनना पूरी तरह बंद हो जाता है।
टाइप 2 डायबीटीज: आमतौर पर 40 साल की उम्र के बाद यह धीरे-धीरे बढ़ता है। इससे प्रभावित ज्यादातर लोगों का वजन सामान्य से ज्यादा होता है या उन्हें पेट के मोटापे की समस्या होती है। डायबीटीज के 90 फीसदी मरीज इसी कैटिगरी में आते हैं।
14 नवंबर विश्व मधुमेह दिवस विशेष 
साभारःनवभारत टाइम्स , मुंबई  

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