स्वस्थ भारत मीडिया
समाचार / News

Ayurved में एलर्जिक राइनाइटिस का प्रभावी उपचार संभव

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया। एलर्जिक राइनाइटिस (नाक की एलर्जी), जो छींकना, नाक बहना, नाक बंद होना और आंखों में खुजली जैसे लक्षणों से परेशान करता है, भारत में लाखों लोगों को प्रभावित करता है। आधुनिक चिकित्सा में लेवोसेटिरिज़िन और मॉन्टेलुकास्ट जैसी दवाओं का इस्तेमाल आम है, लेकिन ये मुख्य रूप से लक्षणों को दबाती हैं, मूल कारण को ठीक नहीं करतीं और लंबे समय तक इस्तेमाल से साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। अब एक महत्वपूर्ण रिसर्च अध्ययन में आयुर्वेदिक हर्बो-मिनरल फॉर्मूलेशन IMMBO ने इन आधुनिक दवाओं से बेहतर परिणाम दिखाए हैं। यह अध्ययन प्रसिद्ध आयुर्वेद विशेषज्ञ वैद्य बालेंदु प्रकाश के नेतृत्व में किया गया और Cureus जर्नल (15 अक्टूबर 2023) में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन का शीर्षक है—Proof of Efficacy Study to Evaluate an Ayurvedic Formulation in the Treatment of Allergic Rhinitis: An Open Label Randomized Controlled Clinical Trial।

आयुर्वेद : डिज़ाइन और तरीका

यह एक ओपन-लेबल रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल था, जिसमें भारत के एक मेडिकल कॉलेज (GSVM मेडिकल कॉलेज, कानपुर) में 250 मरीजों को शामिल किया गया। 224 योग्य मरीजों को दो समान ग्रुप में बांटा गया:
•  एक ग्रुप को IMMBO (60 mg/kg/दिन, तीन खुराक में) दिया गया।
•  दूसरे ग्रुप को लेवोसेटिरिज़िन 2.5 mg + मॉन्टेलुकास्ट 4 mg की फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन दी गई।

इलाज 28 दिनों तक चला। प्रभावशीलता का मूल्यांकन Total Nasal Symptom Score (TNSS) और सीरम IgE लेवल (एलर्जी का प्रमुख बायोमार्कर) से किया गया। अध्ययन को नैतिक समिति की मंजूरी और CTRI रजिस्ट्रेशन प्राप्त था।

आयुर्वेद : मुख्य निष्कर्ष

•  दोनों ग्रुप में TNSS स्कोर में काफी सुधार हुआ, लेकिन IMMBO ग्रुप में सुधार ज्यादा बेहतर था (-5.70 बनाम -3.31; p<0.01)।
•  IgE लेवल में कमी भी IMMBO ग्रुप में ज्यादा थी (-351.54 बनाम -208.79; p<0.05)।
•  सभी इलाज किए गए मरीजों में नाक के लक्षणों का पूर्ण समाधान IMMBO ग्रुप में 92.98% मरीजों में हुआ, जबकि आधुनिक दवा ग्रुप में 82.73 प्रतिशत में।
•  पर प्रोटोकॉल विश्लेषण में यह अंतर और स्पष्ट था (90.35 प्रतिशत बनाम 75.45 प्रतिशत)।
•  4-12 साल के बच्चों (पेडियाट्रिक ग्रुप) में भी IMMBO प्रभावी पाया गया।
•  कोई गंभीर साइड इफेक्ट्स या लैबोरेटरी असामान्यताएं नहीं देखी गईं। दोनों उपचार सुरक्षित थे।

आयुर्वेद : IMMBO क्या है?

IMMBO एक हर्बो-मिनरल फॉर्मूलेशन है, जिसमें मंडूर भस्म (आयुर्वेदिक आयरन प्रिपरेशन) के साथ 18 जड़ी-बूटियां शामिल हैं, जैसे देवदार, हल्दी, नागरमोथा, आंवला, कुटकी, दारुहरिद्रा, पिप्पली, काली मिर्च, चित्रक, कुश्थ, हरड़, बहेड़ा, सोंठ, पुनर्नवा आदि। यह फॉर्मूलेशन 1997 से उत्तर भारत के क्लिनिक में उपयोग हो रहा है और पहले भी कई ऑब्जर्वेशनल स्टडीज में प्रभावी पाया गया था। अध्ययन के लेखकों का कहना है कि यह अध्ययन आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन IMMBO की प्रभावशीलता का प्रथम प्रमाण (prima facie evidence) प्रदान करता है। यह न केवल लक्षणों को कम करता है, बल्कि IgE जैसी मूल एलर्जिक प्रतिक्रिया को भी बेहतर ढंग से नियंत्रित करता प्रतीत होता है। हालांकि, लेखकों ने आगे बड़े पैमाने पर, डबल-ब्लाइंड और लंबे समय तक चलने वाले अध्ययनों की आवश्यकता बताई है। यह अध्ययन आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बन सकता है, खासकर उन मरीजों के लिए जो लंबे समय तक एंटीहिस्टामाइन और ल्यूकोट्रिएन इनहिबिटर्स से संतुष्ट नहीं हैं या साइड इफेक्ट्स से परेशान हैं। एलर्जिक राइनाइटिस जैसी आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या के लिए आयुर्वेदिक दृष्टिकोण की वैज्ञानिक जांच बढ़ रही है और IMMBO जैसी तैयारियां भविष्य में एक सुरक्षित, प्रभावी विकल्प साबित हो सकती हैं।

Related posts

मरणोपरांत नेत्रदान से अमर हो गयीं निर्मला देवी अग्रवाल

admin

46% Indian women take leave from work during periods: everteen Menstrual Hygiene Survey 2018

PMSMA: भारत में मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की कमी: नड्डा

admin

Leave a Comment