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स्वास्थ्य प्रबंधन : आवश्यकता एवं मार्ग

Health Management: Requirements and Routes

डॉ. रामशंकर

स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का निवास होता है। स्वस्थ शरीर, स्वस्थ विचार एवं स्वस्थ बुद्धि का मूर्त रूप ही आरोग्य है। आरोग्य वह अवस्था है जिसमें हम प्रकृति एवं वातावरण से सामंजस्य स्थापित करते हुए जीवन का आनंद लेते हैं। हम वास्तविक रूप से तभी स्वस्थ होते हैं, जब हम स्वयं को मानसिक, भौतिक, भावात्मक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक स्तर पर स्वस्थ अनुभव करते हैं।

स्वास्थ्य अभिप्राय

          स्वास्थ्य का अभिप्राय है मनुष्य का शरीर तो सही हालत में हो ही, साथ में उसका मन भी सही हालत में हो और यह मन स्वस्थ हालत में तभी रह सकेगा, जब मनुष्य की बुद्धि शुद्ध हो जाये, शांत हो जाय, स्थिर हो जाय। स्वस्थ मनुष्य वही है जो ‘स्व’ में यानी अपने में ‘स्थ’ हो, यानी टिका हुआ हो। तो ‘स्व’ में तो वही ‘टिक’ सकता है जिसके मन पर स्थिर, शांत, संतुलित बुद्धि का अंकुश हो। ऐसे व्यक्ति को गीता में ‘स्थितप्रज्ञ’ भी कहा जाता है। यदि हमारे मन में शेष सृष्टि के प्रति भय, तृष्णा, असहयोगिता या प्रतियोगिता, ईर्ष्या, द्वेष और आशंका और हार-जीत की भावना है तथा हम ईश्वर की तुलना में पद, धन तथा अमर्यादित भोग-उपभोग के शिकार हैं तो हम अस्वस्थ हैं चाहे हमारा शरीर निरोग तथा बलिष्ठ ही क्यों न हो।

          अगर हम यह माने कि जो तन का दुरुस्त है वह ‍स्वस्थ भी है तो हम थोड़ी जल्दबाज़ी कर रहे हैं। तन का मतलब है शरीर और दुरुस्त का मतलब है ठीक हालत में होना। तो तनदुरुस्त होने के लिए तो बस अपने शरीर की हालत का ठीक रहना काफी है। पर स्वस्थ होने के लिए या स्वस्थ कहलाने के लिए केवल शरीर की हालत का ठीक होना काफ़ी नहीं है, क्योंकि स्वस्थ शब्द का अर्थ ही अलग हैा स्वस्थ शब्द में शरीर का मतलब रखने वाला कोई आशय ही नहीं है।

          आज के प्रौद्योगिकी युग में प्रबंधन विज्ञान के अनुप्रयोग की विशेष उपादेयता जन्म ले चुकी है। विकास के प्रत्येक क्षेत्र में इसके अनुप्रयोग को हम देख सकते हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। जब किसी सुनियोजित कार्यक्रम को लागू किया जाता है तो इससे समाज के स्वास्थ्य को तब तक बेहतर नहीं बनाया जा सकता जब तक कि इसका प्रभावी रूप से संचालन व प्रबंधन न किया जा सके। प्रबंध के कुछ महत्त्वपूर्ण सिद्धांतों में नियोजन, परवीक्षण और मूल्यांकन शामिल होता है। प्रबंध के सिद्धांतों को विकास के प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से लागू किया जा रहा है और स्वास्थ्य क्षेत्र के मामले में इसे और विस्तारपूर्वक देखा जा सकता है।

प्रबंध की अवधारणाएं और सिद्धान्त   

विभिन्न विद्वानों ने प्रबंध की परिभाषाएं अलग-अलग रूप से दी हैं। सामान्यतः प्रबंध एक ऐसी सृजनात्मक और गतिशील प्रक्रिया है जो दल/टीम के सदस्यों के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता करती है जिसे निश्चित समयावधि में उपलब्ध के इष्टतम उपयोग प्राप्त किया जाना है। इस परिभाषा में निम्नलिखित पांच शामिल हैं-

  1. गतिशील और सुसाध्यता संबंधी प्रक्रिया : सर्वप्रथम प्रबंध एक गतिशील प्रक्रिया है जो निश्चित समय में अपना कार्य पूरा करती है।। यह नया रूप देने वाली और लचीली है क्योंकि अंतिम परिणामों की प्राप्ति के लिए प्रबंध समूह के सदस्य सोच-विचार कर उपयुक्त साधन अपनाने के लिए स्वतंत्र होते हैं। यह गतिशील है क्योंकि जो आज सृजनात्मक है, वही कल अनावश्यक हो जाता है। इसके पीछे यह कारण है कि सदस्य नित नए लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए बेहतर और नए तरीकों की खोज करते रहते हैं।
  2. दल/टीम – प्रबंध एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें लोग शामिल होते रहते हैं। किसी भी संगठन में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण संसाधन, उस टीम या संगठन में काम करने वाले लोग होते हैं। लोग अलग-अलग होकर काम नहीं कर सकते। समूह का हर सदस्य महत्वपूर्ण होता है क्योंकि वह ऐसे महत्त्वपूर्ण कौशल में निपुण होता है जिसमें दूसरा नहीं होता है। टीम का यदि कोई एक सदस्य भी कार्य या सहयोग न करे तो टीम समुचित तरीके से काम नहीं कर पाएगी। प्रबंध प्रक्रिया के रूप में टीम में कार्य करने और मिलकर कार्य करने में सुविधा प्रदान करता है।
  3. लक्षित कार्य को पूरा करना- प्रक्रिया के रूप में प्रबंध को इसलिए महत्त्व दिया जाता है क्योंकि यह सदस्यों को लक्षित कार्य को पूरा करने के काबिल बनाता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि समूह के सदस्य कुछ लक्ष्यों का निर्धारण करते हैं और इनकी प्राप्ति के लिए वे कुछ उपयुक्त साधनों को भी अपनाते हैं जिसके परिणाम स्वरूप समूह का प्रत्येक लक्ष्य प्राप्ति के लिए सजग रहता है।
  4. निर्धारित समयावधि-  लक्ष्य की यदि निश्चित समय में प्राप्ति कर ली जाए तो यह प्रशंसनीय माना जाता है। स्वास्थ्य क्षेत्र में यह और अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि पीड़ित आबादी या व्यक्ति की स्वस्थ्य स्थिति को सुधारने के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा नहीं की जा सकती है।
  5. उपलब्ध संसाधनों का उचित प्रयोग- कई बार स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम को लागू करने के लिए हमारे पास पर्याप्त संसाधनों की कमी हो जाती है और हमें उपलब्ध संसाधनों में ही स्वास्थ्य संबंधी लक्ष्य की प्राप्ति करनी होती है। यहाँ पर उचित उपयोग का मतलब उपलाभ संसाधनों का बेहतर उपयोग से है। प्रबद्ध प्रक्रिया में इसका विशिष्ट स्थान है क्योंकि परियोजना की कार्य क्षमता को निवेश उत्पादन अनुपात के रूप में मापा जा सकता है।

स्वास्थ्य प्रबंध के सिद्धांत

 प्रबंध के विभिन्न सिद्धांत हैं। हर जगह इनकी एकरूपता समान नहीं होती है लेकिन यदि हम प्रबंध के मूल सिद्धांतों को समझ लें तो प्रबंध की अवधारणा को हम बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। प्रबंध के कुछ सिद्धांत  निम्नलिखित हैं-

  1. प्रगति के प्रति वचनबद्धता- लक्ष्यों और उद्देश्यों को निर्धारित करना सरल है, लेकिन उद्देश्य की प्राप्ति वचनबद्धता के अभाव में प्राप्त करना अत्यंत कठिन है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में वचनबद्धता अधिक सार्थक और यथार्थ रूप धारण करती है, क्योंकि स्वास्थ्य का संबंध लोगों के जीवन-मरण से संबंधित है। आजकल जो प्रबंध की बात करते हैं वे इसके प्रति वचनबद्धता पर कम ध्यान देते हैं और उनमें यह धारणा है कि वचनबद्धता का मतलब केवल मिशनरियों से संबंधित है न कि प्रबंधकों से। आज भी बहुत से ऐसे चिकित्सक हैं जिन्होंने गरीबों के स्वास्थ्यवर्धन और कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। ऐसा एक उदाहरण डॉ. आर. एस. अरोले और स्व. डॉ.(श्रीमती) मैबेल अरोले का है जिन्होंने महाराष्ट्र के ग्रामीण में स्वास्थ्य अभियान चलाया।
  2. लोक प्रभावी सहभागी हैं- किसी भी स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम का प्रबंधन व्यावसायिकों द्वारा किया जाता है और ऐसा करते समय उनका लोगों के लिए विशेषकर निर्धन के लिए दृष्टिकोण क्या है? सक्षमता और बेहतर परिणाम की प्राप्ति कि भीड़ में हम जनसाधारण पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय सामग्री और धन प्रबंधन पर अधिक ध्यान देते हैं। हम उन्हें आश्रित और स्वास्थ्य सेवाओं के लाभार्थी के रूप में लेते हैं। हम उन्हें अपने कार्यक्रम के नियोजन और प्रबंधन की प्रक्रिया में भाग लेने वाले प्रतिभागी के रूप में नहीं देखते हैं। सफल प्रबंधन के लिए हमें इस धारणा को बदलना होगा।
  3. उपलब्ध संसाधनों का सक्षम उपयोग– जनसाधारण से काम करना, टीम का कार्य करना, मिले-जुले प्रयास करके उचित प्रबंधन कि बात कर सकते हैं। स्वास्थ्य टीम के पास संसाधन हैं, परंतु ये सीमित हैं। यदि संसाधनों का तरीके से इस्तेमाल करना नहीं आता तो देखभाल कार्यक्रम के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता है।           
  4. अनुभवों से सीखना- वृहद् स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू करने से पहले यह अध्ययन करना उपयोगी होता है कि उस क्षेत्र या किसी अन्य क्षेत्र में पहले किए गए प्रयास वर्तमान स्वास्थ्य टीम या व्यक्ति के लिए भायदेमंद सिद्ध हो रहे हैं या नहीं। इसके अलावा यह भी देखना चाहिए कि कौन से कारक हैं जो कार्यक्रम की सफलता या विफलता के लिए उत्तरदायी हैं।
  5. सहभागी उत्तरदायित्व– स्वास्थ्य के वांछित लक्षण की प्राप्ति के लिए सभी स्तरों पर उत्तरदायित्व में भागीदारी का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसका अर्थ एक सामान्य व्यक्ति को उत्तरदायित्व सौंपना ही नहीं बल्कि इसका अर्थ आदान-प्रदान करना भी है ताकि स्वास्थ्य देखभाल वितरण प्रणाली में ऐसा व्यक्ति जिम्मेदार हो जो संस्था या संगठन की जिम्मेदारी ले सके।

स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रमों का कार्यान्वयन

सुनियोजित कार्यक्रम की सफलता का निर्धारण इसे लागू करने के बाद ही किया जा सकता है। कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों पर नियोजन के कार्यक्रमों की परीक्षा की जाती है। इस चरण पर टीम के प्रत्येक सदस्यों को कार्य करने के लिए एक साथ लगाया जाता है ताकि कार्यक्रमों का सफल कार्यान्वयन हो सके। इसके लिए जरूरी है कि जिस भी सदस्य को जो जिम्मेदारी दी गई है, उसका निर्वहन वह उचित ढ़ंग से करे। तभी जाकर स्वास्थ्य संबंधी ऐसे कार्यक्रम पूर्ण रूप से सफल हो पाएंगे। कार्यान्वयन के कार्य किसी भी स्वास्थ्य कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए उसका बेहतर तरीके से कार्यान्वयन जरूरी होता है। कार्यान्वयन के तहत आने वाले कार्य निम्नलिखित हैं-

1.       स्वास्थ्य संबंधी क्रियाकलापों का समन्वय।

2.       स्वास्थ्य कर्मिकों के बीच कार्यों का उचित बंटवारा।

3.       स्वास्थ्य टीम या संगठन को संसाधनों का उचित आवंटन।

4.       स्वास्थ्य संबंधी सूचनाओं का सम्यक प्रचार।

स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रमों का परिवीक्षण और मूल्यांकन

परिवीक्षण और मूल्यांकन का कार्य उस स्थिति में किया जाता है, जब उचित स्वास्थ्य सूचना पद्धति प्रभावी रूप में स्थापित की जा रही हो। किसी भी कार्यक्रम की सफलता सुदृढ़ परीवीक्षण प्रणाली पर निर्भर करती है। यह एक प्रभावी स्वास्थ्य प्रबंधन साधन है, जिससे यह सुनिश्चित किया जाता  है कि सुनियोजित कार्यकलाप अनुसूची के अनुरूप किये गये हैं या नहीं। परिवीक्षण एक ऐसा साधन है जिसके द्वारा कार्यक्रम या परियोजना की वास्तविक रूप-रेखा के अनुरूप किए गए कार्यक्रम के परिणामों और क्रियाकलापों को मापा जाता है।

स्वास्थ्य प्रबंधन की आवश्यकता

 स्वास्थ्य शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। स्वस्थ मस्तिष्क में ही स्वस्थ विचार का जन्म होता है। आज के इस भागम-भाग समय में अपने को स्वस्थ रख पाना एक चुनौतीपूर्ण दायित्व है। आज का प्रत्येक नागरिक बेहतर स्वास्थ्य का यह आश्वासन भी चाहता है कि स्वास्थ्य संगठन/संस्था या सरकार उसके स्वास्थ्य का ध्यान रखे। उसके साथ आत्मीयता पूर्ण संप्रेषण करे ताकि वह अपने स्वास्थ्य को बेहतर रख सके और इस आवश्यकता की पूर्ति के लिए विविध प्रकार के स्वास्थ्य कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता रहा है। स्वास्थ्य प्रबंधन में उन समस्त कौशलों का समावेश होता है जिसके माध्यम से एक बेहतर स्वास्थ्य के लिए एक माहौल विकसित कर सकें। स्वास्थ्य प्रबंधन की आवश्यकता को निम्नांकित बिंदुओं के तहत स्पष्ट कर सकते हैं-

  1. स्वास्थ्य कार्यक्रम/ शिविरों को बेहतर तरीके से संपन्न कराने के लिए।
  2. स्वास्थ्य कार्यक्रमों /शिविरों की बेहतर डिजाइन  तथा प्लानिंग के लिए।
  3. विशेषज्ञ की सेवाओं की प्राप्ति के लिए।
  4. स्वास्थ्य संसाधनों के उचित प्रयोग के लिए।
  5.  स्वास्थ्य कार्यक्रमों एवं स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन में आने वाली परेशानी से बचाव के लिए।
  6. बेहतर स्वास्थ्य की जागरूकता एवं उचित संप्रेषण के लिए।       

स्वास्थ्य प्रबंधन के उद्देश्य

किसी भी स्वास्थ्य विषयों पर कार्यक्रम आयोजन के निर्धारित लक्ष्य होते हैं, जिसकी पूर्ति स्वास्थ्य प्रबंधन की आवश्यकता होती है। कोई भी संस्था स्वास्थ्य प्रबंधन की आवश्यकता इन्हीं कार्यक्रमों के आधार पर निर्धरित करती है कि एक बेहतर प्रबंधन की प्रक्रिया प्राप्ति की जा सके । स्वास्थ्य प्रबंधन के कुछ निर्धारित उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

  1. संप्रेषण के विभिन्न माध्यमों द्वारा प्रचार के विभिन्न लक्ष्यों की प्राप्ति।
  2. बेहतर स्वास्थ्य की प्राप्ति के उपाय।
  3. स्वास्थ्य समस्याओं के लिए लोगों को हिचकिचाहट से बाहर लाना।
  4. लोगों में स्वास्थ्य की जागरूकता का संप्रेषण करना।
  5. विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को नियंत्रित करना।
  6. स्वास्थ्य संबंधी नियमों का उचित उचित नियोजन और क्रियान्वयन करना।   

स्वास्थ्य प्रबंधन और जनमाध्यम

मीडिया जन जागरण का एक सशक्त माध्यम है। अपने प्रसारण के माध्यम से इसने आज समाज में स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान कर स्वास्थ्य प्रबंधन में नई दिशा की नींव रखी है लेकिन वर्तमान में मीडिया को और अधिक सजग होकर समाज में स्वास्थ्य सेवाओं की योजनाओं/कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन तथा नियोजन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। स्वास्थ्य रिपोर्टिंग के नाम पर मीडिया अस्पतालों पर ही केंद्रित होकर खबरों का उदघटन करती है। बल्कि समाज में घूमकर विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं को उद्धृत किया जा सकता है। कभी- कभी स्वास्थ्य विभाग किसी महामारी में विफल होने के बावजूद वह वह महामारी पर नियंत्रण की बात करता है। एक स्वास्थ्य रिपोर्टिंग के लिए जा रहे मीडिया कर्मी को समाज में टहल कर सच्चाई का पता लगाने की विशेष जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य को लेकर बहुत कम जागरूकता है। ग्रामीण जन साफ- सफाई, खानपान को लेकर को लेकर ज्यादा जागरूक नहीं रहते ऐसे में संचार के विभिन्न माध्यमों के कार्यक्रमों में उनके प्रोत्साहन एवं जागरूकता का प्रयास करना चाहिए। जन स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे लोगों के लिए अहम होते हैं। स्वास्थ्य पत्रकारिता केवल मेडिकल की ही नहीं बल्कि मेडिको सोशल पत्रकारिता भी कही जाती है। इसमें सिर्फ समाचार ही नहीं बल्कि विचार और पुनर्विचार का भी काफी महत्व होता है। स्वास्थ्य पत्रकारिता के लिए तकनीकी और सही जानकारी बहुत जरूरी है। चिकित्सा क्षेत्र की कोई भी अधूरी या गलत जानकारी जानलेवा या भयावह साबित हो सकती है। स्वास्थ्य के विभिन्न मुद्दों के सफल क्रियान्वयन तथा कुशल प्रबंधन से स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार किया जा सकता है।  

लेखक परिचय:  सहायक प्राध्यापक एवं चीफ एडिटर ‘दि एशियन थिंकर’ ऑनलाइन रिसर्च जर्नल

ईमेल-ramshankarpal108@gmail.com





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