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Vaccine: बच्चों का टीकाकरण होगा महंगा

Vaccine: बच्चों का टीकाकरण होगा महंगा

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। केंद्र सरकार ने बच्चों को लगाई जाने वाली कुछ जरूरी वैक्सीन (VACCINE) की कीमतों में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने अपनी 147वीं बैठक में इन वैक्सीनों की कीमतों में संशोधन का फैसला किया। इनमें बीसीजी (BCG), खसरा (Measles) और एमआर (Measles- Rubella) वैक्सीन शामिल हैं। ये तीनों टीके बच्चों को गंभीर और जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम का जरूरी हिस्सा माने जाते हैं। बीसीजी वैक्सीन बच्चों को टीबी जैसी गंभीर बीमारी से बचाने के लिए जन्म के बाद लगाई जाती है वहीं खसरा और एमआर वैक्सीन बच्चों को खसरा और रूबेला संक्रमण से सुरक्षा देती हैं, जो कई बार गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकते हैं। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने इनकी कीमत में वृद्धि करने के लिए समीक्षा याचिका भी दे रखी थी। उधर एंटी टिटनेस इंजेक्शन भी महंगा हो गया है।

वैक्सीन: कितने जरूरी ये टीके

1.BCG वैक्सीन-यह टीका न्यू बोर्न बेबी को टीबी के गंभीर रूपों से बचाने में मदद करता है। जन्म के तुरंत बाद या शुरुआती दिनों में इसे लगाया जाता है। इसकी कीमत 8.20 रुपये से बढ़ाकर 9.89 रुपये प्रति डोज कर दी गई है।
2. खसरा (Measles) वैक्सीन-खसरा एक बेहद संक्रामक बीमारी है, जिससे तेज बुखार, दाने, निमोनिया और कई बार मेंटल हेल्थ संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसे में समय पर टीकाकरण बच्चों को इससे सुरक्षित रखता है। इस वैक्सीन की कीमत 51.40 रुपये से बढ़ाकर 62 रुपये प्रति शीशी (vial) हो गयी है।
3. MR (Measles- Rubella) वैक्सीन- यह वैक्सीन खसरे के साथ-साथ रूबेला से भी सुरक्षा देती है। गर्भवती महिलाओं में रूबेला संक्रमण होने पर जन्म लेने वाले बच्चे में गंभीर समस्याएं हो सकती हैं इसलिए इसका टीकाकरण बेहद जरूरी माना जाता है। इसकी कीमत 72.90 रुप्ये से बढ़ाकर 87.93 रुपये प्रति शीशी कर दी है।

वैक्सीन: लागत बढ़ी तो कीमत भी

एनपीपीए के मुताबिक इन वैक्सीन का उत्पादन करने वाली कंपनियों की संख्या सीमित है और लागत बढ़ने की वजह से इनके निर्माण और सप्लाई को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो रहा था। ऐसे में अगर कीमतों में संशोधन नहीं किया जाता, तो आगे इनकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती थी। अधिकारियों का कहना है कि कीमत बढ़ाने का उद्देश्य कंपनियों को फायदा पहुंचाना नहीं, बल्कि यह तय करना है कि देश में जरूरी वैक्सीन की सप्लाई बाधित न हो और बच्चों का टीकाकरण प्रभावित न पड़े। उधर एंटी- टिटनेस इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन की कीमतों में भी 50 फीसद की बढ़ोतरी की गई है। 250 IU और 500 IU क्षमता वाले इन इंजेक्शनों को बनाने वाली कंपनियां काफी समय से कह रही थीं कि बढ़ती लागत की वजह से इनका उत्पादन करना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है।

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