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ब्रेन ट्यूमर का हाईरिस्क ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न

ब्रेन ट्यूमर का हाईरिस्क ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। राजधानी के एक अस्पताल में हाल ही हाई रिस्क सर्जरी सफलतापूर्वक हुई है जिससे 37 वर्षीय युवा महिला की जान बच सकी। यह सर्जरी द्वारिका स्थित महाराजा अग्रसेन हॉस्पीटल में हुई। महिला दो बच्चों की मां है और पिछले 8 महीनों से बढ़ते सिरदर्द की शिकायत लेकर आई थी, जिसमें चक्कर आना, मतली और देखने में कठिनाई आदि शामिल थी।

ऑपरेशन : ब्रेन में ट्यूमर

जानकारी के मुताबिक ब्रेन प्लेन के एमआरआई से पता चला कि एक बड़ा इंट्रा क्रैनियल स्थान घेरने वाला घाव था। एक विस्तृत अध्ययन में एक बड़ा (लगभग 6 x 6.1 x 6 सेमी मापने वाला) दायां ललाट शानदार रूप से विपरीत बढ़ाने वाला घाव दिखा, जो फाल्क्स, सैजिटल साइनस ललाट भाग से जुड़ा हुआ था, जिसमें ऊपरी हड्डी में घुसपैठ के कारण हड्डी मोटी हो रही थी और घाव के चारों ओर ड्यूरा बढ़ रहा था। साथ ही मस्तिष्क पैरेन्काइमा की गंभीर सूजन और मध्य रेखा बाईं ओर शिफ्ट हो गई थी। मस्तिष्क पैरेन्काइमा में कोई घुसपैठ नहीं थी। लक्षण बड़े, अत्यधिक संवहनी घाव का संकेत दे रहे थे सहमति और प्रीऑपरेटिव तैयारी के बाद मरीज को भर्ती किया गया।

ऑपरेशन : मरीज अब स्वस्थ

ऑपरेशन से पहले गंभीर एनीमिया के मद्देनजर पर्याप्त रक्त आरक्षण और रक्त आधान किया गया। निरंतर निगरानी के साथ सामान्य एनेस्थीसिया के तहत सर्जरी की गई। द्विपक्षीय त्वचा चीरा दिया गया था। ऑपरेशन थियेटर टीम को चेतावनी दी गई थी क्योंकि जैसे ही खोपड़ी को पेरीओस्टेम से अलग किया गया था, रक्तस्राव तेज हो गया था। रक्त और आयनोट्रोपिक जलसेक तैयार रखा गया था। स्ट्राइकर की मदद से क्रैनियोटॉमी किया गया। खोपड़ी के फ्लैप को सावधानीपूर्वक हटाया गया ताकि धनु साइनस को चोट न पहुंचे। उजागर घुसपैठ वाले ड्यूरा से रक्तस्राव तेज था और सर्जिकल और कॉटन और दबाव से नियंत्रित किया गया था। माइक्रोस्कोप की मदद से ड्यूरा को खोला गया और ट्यूमर को आसपास के मस्तिष्क से अलग किया और ट्यूमर का सम्पूर्ण निष्कासन-एनब्लॉक किया गया। फिर घाव को सावधानीपूर्वक बंद किया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज़ को टेबल पर जगाया गया और उसे एक्सट्यूबेट कर आईसीयू में शिफ्ट किया गया। ऑपरेशन के बाद सीटी स्कैन में पता चला कि ब्रेन पैरेन्काइमा को कोई नुकसान पहुँचाए बिना घाव को पूरी तरह से हटा दिया गया था और कोई अनावश्यक रक्त संग्रह नहीं हुआ था। उसे अगले दिन वार्ड में शिफ्ट किया गया और सामान्य आहार दिया गया। वह स्वस्थ है और ठीक हो रही है।

ऑपरेशन : सिकित्सा जगत में बना इतिहास

यह ऑपरेशन सामान्य एनेस्थेसिया के तहत हुआ। तकनीकी दृष्टि से यह जटिल ऑपरेशन था जिसकी सफलता पर ने चिकित्सा जगत में एक नया इतिहास बना दिया। ऑपरेशन करने वालों की टीम में न्यूरोसर्जन डॉ. मनीष कुमार, एनेस्थेसिया एक्सपर्ट डॉ. दिनेश और ऑपरेशन थियेटर की अनुभवी टीम थी।

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