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भारत ने स्वस्थ वृद्धावस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। केन्‍द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया सिंह पटेल ने 13 से 15 अक्टूबर के दौरान दक्षिण-पूर्व एशिया की विश्व स्वास्थ्य संगठन क्षेत्रीय समिति के कोलंबो में आयोजित 78वें सत्र के मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वहां उन्होंने ने स्वस्थ वृद्धावस्था के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत: 153 मिलियन बुजुर्ग

श्रीमती पटेल ने कहा कि 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के 153 मिलियन नागरिकों के साथ, भारत एक बड़े जनसांख्यिकीय परिवर्तन का सामना कर रहा है और यह सुनिश्चित करने के लिए कि बुजुर्गों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप समान, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त हों, सरकार ने अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय वृद्ध स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम (NPHCE), जो अब 92 प्रतिशत जिलों में चल रहा है, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा दृष्टिकोण के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों के लिए निवारक, प्रोत्साहन, उपचारात्मक और पुनर्वास सेवाएँ प्रदान करने के भारत के प्रयासों की आधारशिला है। यह कार्यक्रम परिवारों और समुदायों में सम्मानजनक वृद्धावस्था को सक्षम बनाने के लिए संरचित देखभालकर्ता प्रशिक्षण के साथ-साथ घर, समुदाय और सुविधा-आधारित हस्तक्षेपों को एकीकृत करता है।

भारत: बुजुर्गों को आयुष्मान का लाभ

आगे उन्होंने कहा कि वृद्धजनों की वित्तीय सुरक्षा को और मज़बूत करते हुए आयुष्मान भारत की प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) का विस्तार 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों को, चाहे उनकी आय कुछ भी हो, इसके अंतर्गत लाने के लिए किया गया है। इससे 4.5 करोड़ परिवारों के लगभग 6 करोड़ वृद्धजन लाभान्वित होंगे और उन्हें सार्वजनिक एवं सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख तक की कैशलेस अस्पताल देखभाल प्रदान की जाएगी।

भारत: दो राष्ट्रीय वृद्धावस्था केन्‍द्र स्थापित

केन्‍द्रीय मंत्री ने दो राष्ट्रीय वृद्धावस्था केन्‍द्रों (NCA) की स्थापना पर भी प्रकाश डाला—एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में और दूसरा मद्रास मेडिकल कॉलेज, चेन्नई और देश भर में 17 क्षेत्रीय वृद्धावस्था केन्‍द्र स्थापित किए गए हैं, जो नैदानिक ​​उत्कृष्टता, क्षमता निर्माण, अनुसंधान और नीति मार्गदर्शन केन्‍द्र के रूप में कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा, हाल ही में शुरू किए गए ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान’, जिसका अर्थ है “स्वस्थ महिलाएँ, सशक्त परिवार”, के दौरान लाखों वृद्ध व्यक्तियों, विशेषकर वृद्ध महिलाओं की गैर-संचारी और आयु-संबंधी बीमारियों जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर के लिए जाँच की गई है।

भारत: तीन क्षेत्रों का प्रस्ताव

क्षेत्रीय गोलमेज सम्मेलन में भारत ने प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल और दीर्घकालिक देखभाल (PHC-LTC) का एकीकरण मज़बूत करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया के सदस्य देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। भारत ने सहयोग के तीन प्रमुख क्षेत्रों का प्रस्ताव रखा:
1. पीएचसी-एलटीसी एकीकरण पर ज्ञान साझाकरण और नवाचार के लिए एक क्षेत्रीय मंच की स्थापना
2. विभिन्न देशों में वृद्धावस्था और देखभाल करने वाले कार्यबल के लिए क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में निवेश करना
3. वृद्धों के लिए स्वतंत्र और सम्मानजनक जीवन जीने में सहायक तकनीकी नवाचारों और स्वास्थ्य समाधानों को बढ़ावा देना।

भारत: वृद्धावस्था के साथ दशक

संयुक्त राष्ट्र के स्वस्थ वृद्धावस्था दशक (2021-2030) के साथ भारत के जुड़ाव की पुष्टि करते हुए केन्‍द्रीय मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि वृद्धावस्था को समावेशी विकास और सामाजिक परिवर्तन के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ की कल्‍पना से प्रेरित होकर, भारत यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि वृद्धावस्था सहित जीवन का हर चरण सम्मान, सुरक्षा और देखभाल के साथ जिया जाए।”

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