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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विशेष: वैश्विक होता योग

आशुतोष कुमार सिंह

बड़ी आबादी वाले अपने देश में स्वस्थ समाज के निर्माण का कार्य बहुत बड़ी चुनौती है। विकास की दौड़ में गर सबसे ज्यादा नुकसान किसी चीज का हुआ है तो वो हमारा स्वास्थ्य ही है। अपने देश में अंग्रेजी दवा बाजार तकरीबन 90 हजार करोड़ रुपये (वार्षिक) का है। पिछले दिनों स्वस्थ भारत यात्रा के दौरान देश के 29 राज्यों की तकरीबन 1 लाख 25 हजार बालिकाओं से प्रत्यक्ष रूप से संवाद करने का मौका मिला। इन बालिकाओं में महज 12 बालिकाएं ऐसी मिलीं जिन्होंने कहा कि उन्होंने अभी तक दवा का सेवन नहीं किया है। उनके स्वस्थ रहने और दवा न खाने के पीछे की सच्चाई उनकी दिनचर्या थी। उनका योग के प्रति समर्पण भाव था। 90 दिनों में 20 हजार किमी की स्वस्थ भारत यात्रा के दौरान यह बात समझ में आ गई कि अगर भारत को स्वस्थ रखना है भारतीयों को योग के महत्व को समझना होगा और उसे अपने जीवन में उतारना होगा। शायद यही कारण है कि आज वैश्विक स्तर पर योग का प्रचार-प्रसार बढ़ता जा रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत

योग के महत्व को आज दुनिया ने समझ लिया है। यही कारण है कि 21 जून 2015 से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की शुरुआत की गयी। योग के इतिहास में 27 सितंबर, 2014 का वह दिन बहुत ही ऐतिहासिक था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त राष्ट्र महासभा में योग के महत्व को दुनिया को समझा रहे थे। उन्होंने कहा था कि

“योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है यह दिमाग और शरीर की एकता का प्रतीक है; मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है; विचार, संयम और पूर्ति प्रदान करने वाला है तथा स्वास्थ्य और भलाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करने वाला है। यह व्यायाम के बारे में नहीं है, लेकिन अपने भीतर एकता की भावना, दुनिया और प्रकृति की खोज के विषय में है। हमारी बदलती जीवन शैली में यह चेतना बनकर, हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद कर सकता है।” भारत के इस इस पहल का पूरी दुनिया में स्वागत हुआ। 11 दिसम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र में 193 सदस्यों द्वारा 21 जून को “अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस” मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। अपने देश के इस प्रस्ताव को महज 90 दिनों में पूर्ण बहुमत से पारित किया गया।

योग की अवधारणा

योग एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने (योग) का काम होता है। यह शब्द,प्रक्रिया और धारणा बौद्ध धर्म, जैन धर्म और हिंदू धर्म में ध्यान प्रक्रिया से संबंधित है। योग शब्द भारत से बौद्ध धर्म के साथ चीन, जापान, तिब्बत, दक्षिण पूर्व एशिया और श्रीलंका में भी फैल गया है और इस समय पूरी दुनिया में लोग इससे परिचित हैं। भगवद्गीता में योग शब्द का कई बार प्रयोग हुआ है, कभी अकेले और कभी सविशेषण, जैसे बुद्धियोग,संन्यासयोग, कर्मयोग। वेदोत्तर काल में भक्तियोग और हठयोग नाम भी प्रचलित हो गए हैं। महात्मा गांधी ने अनासक्तियोग का व्यवहार किया है। पतंजलि योगदर्शन में क्रियायोग शब्द देखने में आता है। पाशुपत योग और माहेश्वर योग जैसे शब्दों के भी प्रसंग मिलते है। इन सब स्थलों में योग शब्द के जो अर्थ हैं वह एक दूसरे के विरोधी हैं परंतु इस प्रकार के विभिन्न प्रयोगों को देखने से यह तो स्पष्ट हो जाता है कि योग की परिभाषा करना कठिन कार्य है। परिभाषा ऐसी होनी चाहिए जो अव्याप्ति और अतिव्याप्ति दोषों से मुक्त हो।

गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है ‘योग: कर्मसु कौशलम्‌’ योग से कर्म में कुशलता आती है। साफ है कि यह वाक्य योग की परिभाषा नहीं है। कुछ विद्वानों का यह मत है कि जीवात्मा और परमात्मा के मिल जाने को योग कहते हैं। पंतजलि नेयोगदर्शन में, जो परिभाषा दी है योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः। इस वाक्य के दो अर्थ हो सकते हैं: चित्तवृत्तियों के निरोध की अवस्था का नाम योग है या इस अवस्था को लाने के उपाय को योग कहते हैं।

योग की कुछ महत्वपूर्ण परिभाषाएं

(1) चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है। (पतंजलि योग दर्शन-)

(2) पुरुष एवं प्रकृति के पार्थक्य को स्थापित कर पुरुष के स्वरूप में अवस्थित होना ही योग है। (सांख्य दर्शन)

(3) जीवात्मा तथा परमात्मा का पूर्णतया मिलन ही योग है। (विष्णु पुराण)

(4) दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत और उष्ण आदि द्वन्दों में सर्वत्र समभाव रखना योग है। (भगवद्गीता)

(5) कर्तव्य कर्म बन्धक न हो, इसलिए निष्काम भावना से अनुप्रेरित होकर कर्त्तव्य करने का कौशल योग है। (भगवद्गीता)

(6) मोक्ष से जोड़ने वाले सभी व्यवहार योग है।( आचार्य हरिभद्र)

(7) कुशल चित्त की एकाग्रता योग है। (बौद्ध धर्म)

योग के प्रकार

हठ योग- हठ का शाब्दिक अर्थ हठपूर्ण किसी कार्य करने से लिया जाता है। हठ प्रदीपिका पुस्तक में हठ का अर्थ इस प्रकार दिया है- ह का अर्थ सूर्य तथा ठ का अर्थ चन्द्र बताया गया है। सूर्य और चन्द्र की समान अवस्था हठयोग है।

लय योगचित्त का अपने स्वरूप में विलीन होना या चित्त की निरूद्ध अवस्था लय योग के अन्तर्गत आता है। साधक के चित्त में जब चलते, बैठते, सोते और भोजन करते समय हर समय ब्रहम का ध्यान रहे इसी को लययोग कहते हैं।

राज योगराज योग सभी योगों का राजा कहा जाता है, क्योंकि इसमें प्रत्येक प्रकार के योग की कुछ न कुछ तत्व अवश्य मिल जाते हैं। राजयोग का विषय चित्तवृत्तियों का निरोध करना है। महर्षि पतंजलि के अनुसार योग समाहित चित्त वालों के लिए अभ्यास और वैराग्य तथा विक्षिप्त चित्त वालों के लिए क्रियायोग का सहारा लेकर आगे बढ़ने का रास्ता है। इन साधनों का उपयोग करके साधक के क्लेशों का नाश होता है, चित्तप्रसन्न होकर ज्ञान का प्रकाश फैलता है। योग के आठ अंगों में प्रथम पाँच बहिरंग तथा अन्य तीन अन्तरंग में आते हैं।

पतंजलि का अष्टांगयोग

महर्षि पतंजलि ने आठ अंगों की योग साधना का उल्लेख किया है-

यम- अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह

नियम- शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर प्रार्थना

आसन-स्थिरता और सुख से बैठना

प्राणायाम- योग के यथेष्ठ भूमिका के लिए नाड़ी साधन और उनके जागरण के लिए किया जाने वाला श्वास और प्रश्वास का नियम प्राणायाम है।

प्रत्याहार- इंद्रियों को विषयों से हटाने का नाम ही प्रत्याहार है।

धारणा-चित्त को किसी भी स्थान विशेष पर केंद्रित करना ही धारणा है।

ध्यान- किसी स्थान में ध्येय वस्तु का ज्ञान, जब एक ही प्रवाह में लगातार बहा जाय और किसी भी संसार का भान न रहे तो वो ध्यान कहलाता है।

समाधी- यह चित्त की अवस्था है जिसमें चित्त ध्येय वस्तु के चिंतन में पूरी तरह लीन हो जाता है। योग दर्शन समाधि के द्वारा ही मोक्ष प्राप्ति को संभव मानता है।

निष्कर्षः

योग की तमाम अवधारणाओं को समझने के बाद यह साफ हो जाता है कि योग हमारे दिनचर्या को अनुशासित करने का सर्वोत्म मार्ग है।योग को संपूर्णता में स्वीकारने वाले कभी बीमार नहीं पड़ते। ऐसे में यह जरूरी है कि देश का हर नागरिकयोग के महत्व को समझे और उसे अपने जीवन में अंगीकार करें।

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लेखक परिचयः

स्वस्थ भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक एवं स्वस्थ भारत (न्यास) के चेयरमैन हैं। ‘कंट्रोल मेडिसिन मैक्सिमम् रिटेल प्राइस’, ‘जेनरिक लाइए पैसा बचाइए’, ‘तुलसी लगाइए रोग भगाइए’, ‘अपनी दवा को जानें’ और ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ जैसे कैंपेनों के माध्यम से स्वास्थ्य के बारे में लोगों को जागरूक करते रहे हैं। हाल ही में 90 दिनों में 20 हजार किमी की स्वस्थ भारत यात्रा पूरी कर लौटे हैं।

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