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लिम्फैटिक फ़ाइलेरिया उन्मूलन के लिए वार्षिक अभियान का शुभारंभ

लिम्फैटिक फ़ाइलेरिया उन्मूलन के लिए वार्षिक अभियान का शुभारंभ

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 12 चिन्हित लिम्फैटिक फाइलेरिया (Lymphatic filariasis) प्रभावित राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए लिम्फैटिक फाइलेरिया (एलएफ) उन्मूलन हेतु वार्षिक राष्ट्रव्यापी सामूहिक औषधि एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) अभियान का शुभारंभ किया। यह अभियान एलएफ को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम को दर्शाता है। इस राष्ट्रव्यापी अभियान का उद्देश्य रोग के प्रसार को रोकने, रुग्णता को कम करने और देश भर में संवेदनशील आबादी के लिए निवारक स्वास्थ्य देखभाल उपायों तक न्‍यायसंगत पहुंच सुनिश्चित करने के प्रयासों में तेजी लाना है। इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव, सुश्री आराधना पटनायक, एएस एवं एमडी, एनएचएम, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव (वीबीडी) श्री निखिल गजराज उपस्थित थे।

फाइलेरिया: एक साल में निर्मूल करेंगे

लिम्फैटिक फाइलेरिया (एलएफ), जिसे आमतौर पर हाथीपांव के नाम से जाना जाता है, एक वेक्टर-जनित रोग है, जो मादा क्यूलेक्स मच्छर द्वारा फैलता है। यह मच्छर प्रदूषित और स्थिर जल में पनपता है। संक्रमण लसीका तंत्र को नुकसान पहुंचाता है और दीर्घकालिक रुग्णता, दिव्‍यांगता और सामाजिक कलंक का कारण बन सकता है। भारत सरकार ने वैश्विक सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) 2030 के लक्ष्य से पहले, 2027 के अंत तक एलएफ को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने को उच्च प्राथमिकता दी है। वर्तमान में एलएफ से 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 348 जिलों प्रभावित हैं। इनमें से 41 प्रतिशत (143 जिले) ने संचरण आकलन सर्वेक्षण (TAS-1) को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद सामूहिक औषधि एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) बंद कर दिया है, जबकि 50 प्रतिशत (14 राज्यों के 174 जिले) में माइक्रोफिलेरिया की दर 1 प्रतिशत से अधिक होने के कारण वार्षिक एमडीए लागू किया जा रहा है। शेष 9 प्रतिशत (31 जिले) संचरण आकलन के विभिन्न चरणों में हैं। 2024 तक प्रभावित जिलों से लिम्फोएडेमा के 6.20 लाख से अधिक मामले और हाइड्रोसील के 1.21 लाख मामले सामने आए हैं, जो निरंतर और गहन प्रयासों की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

फाइलेरिया: सामाजिक अनिवार्यता भी

इस अवसर पर श्री नड्डा ने 2027 तक लिम्फैटिक फाइलेरिया (एलएफ) के उन्मूलन के लिए भारत सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया, जो वैश्विक सतत विकास लक्ष्य (SDG) के 2030 के लक्ष्य से काफी पहले है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि एलएफ न केवल रोगियों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, बल्कि यह उनकी आजीविका, आर्थिक उत्पादकता और सामाजिक कल्याण पर भी गंभीर प्रभाव डालता है, जो अक्सर सामाजिक कलंक और पूरे परिवार के लिए दीर्घकालिक कठिनाई के रूप में सामने आता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एलएफ का उन्मूलन केवल एक स्वास्थ्य संबंधी उद्देश्य नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक अनिवार्यता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने सामूहिक औषधि एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान के मिशन-मोड कार्यान्वयन के माध्यम से हासिल की गई महत्वपूर्ण प्रगति को भी रेखांकित किया, विशेष रूप से प्रत्यक्ष निगरानी उपचार के माध्यम से, जिससे जमीनी स्तर पर उत्साहजनक परिणाम प्राप्त हुए हैं। उन्होंने रोग संचरण को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए निरंतर एमडीए के साथ-साथ वेक्टर नियंत्रण संबंधी इकोसिस्‍टम को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। अंतिम छोर की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए श्री नड्डा ने बताया कि दवा सेवन की प्रत्यक्ष निगरानी सुनिश्चित करना और दवा के प्रति जनता की झिझक को दूर करना प्रमुख चिंताएं बनी हुई हैं, जिन्हें गहन जागरूकता, सामुदायिक भागीदारी, शिकायत निवारण और विश्वास निर्माण उपायों के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।

फाइलेरिया: 12 राज्य प्रभावित

श्री नड्डा ने प्रभावित व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए रुग्णता प्रबंधन और दिव्‍यांगता निवारण (एमएमडीपी) के महत्व पर जोर दिया, जिसमें समय पर हाइड्रोसील सर्जरी और दवाओं का एडमिनिस्ट्रेशन शामिल है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एएएम) प्रारंभिक जांच, पहचान और शीघ्र उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जिससे रोग को बढ़ने से रोका जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि हाइड्रोसील सर्जरी को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) में शामिल किया गया है, जो रोगियों के लिए वित्तीय सुरक्षा और बेहतर चिकित्सा सुविधा तक पहुंच सुनिश्चित करती है। उन्होंने 12 राज्यों के 124 जिलों के 719 ब्लॉकों में चल रहे मौजूदा अभियान का जिक्र करते हुए सभी प्रभावित क्षेत्रों में माइक्रोफिलेरिया के प्रसार की दर को लगातार एक प्रतिशत से नीचे लाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सुचारू कार्यान्वयन, मजबूत सामुदायिक भागीदारी और 2027 तक फाइलेरिया मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में त्वरित प्रगति सुनिश्चित करने के लिए सरकार और समाज के समग्र दृष्टिकोण का आह्वान किया, जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों, विशेष रूप से सभी 719 ब्लॉकों के प्रधानों, साथ ही संबद्ध मंत्रालयों और विभागों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

फाइलेरिया: जानें एमडीए अभियान

भारत ने उन्नत पंचसूत्री रणनीति अपनाकर लिम्फैटिक फाइलेरिया (एलएफ) उन्मूलन के प्रयासों को तेज कर दिया है, जिसमें भारत एमडीए अभियान इसका मुख्य आधार है। फरवरी 2026 से राष्ट्रीय एलएफ कार्यक्रम एक एकीकृत वार्षिक एमडीए अभियान में बदल गया गया है, जो राष्ट्रीय कृमिनाशक दिवस (एनडीडी) के साथ पहले 10 फरवरी और 10 अगस्त को आयोजित किया जाता था। यह रणनीतिक परिवर्तन मानसून की बाधाओं, रसद संबंधी समस्याओं, निगरानी के लिए सीमित समय और पहले के द्विवार्षिक आयोजनों के परिचालन भार से संबंधित चुनौतियों को संबोधित करता है, साथ ही यह सुव्यवस्थित संचालन, मजबूत पर्यवेक्षण, व्यापक कवरेज और रात्रि रक्त सर्वेक्षण, प्री-टीएएस, टीएएस, प्रभाव सर्वेक्षण और रुग्णता प्रबंधन एवं दिव्‍यांगता निवारण (एमएमडीपी) हस्तक्षेप जैसी महत्वपूर्ण निगरानी गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय सुनिश्चित करता है। इस परिवर्तन का उद्देश्य कार्यक्रम की दक्षता में सुधार करना और 2027 तक एलएफ उन्मूलन को हासिल करने के दिशा में प्रगति को और आगे बढ़ाना है।

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