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Rajyasabha—वायु प्रदूषण से रोगों पर विशेषज्ञ समूह गठित: जाधव

राज्यसभा—वायु प्रदूषण से रोगों पर विशेषज्ञ समूह गठित: जाधव

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। वायु प्रदूषण श्वसन संबंधी बीमारियों और उनसे जुड़ी समस्याओं को बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में से एक है, हालांकि इस कारण होने वाली बीमारियों के बीच सीधा संबंध स्थापित करने वाले कोई पुख्ता आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव कई कारकों का संयुक्त परिणाम हैं जिनमें व्यक्ति की खान-पान की आदतें, व्यावसायिक आदतें, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, चिकित्सा इतिहास, रोग प्रतिरोधक क्षमता और आनुवंशिकता आदि शामिल हैं। फिर भी स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के महानिदेशक की अध्यक्षता में एक तकनीकी विशेषज्ञ समूह का गठन किया गया है, जो दीर्घकालिक श्वसन रोगों (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) और अस्थमा) से संबंधित विशिष्ट तकनीकी मुद्दों पर विशेष विशेषज्ञ मार्गदर्शन और सिफारिशें प्रदान करेगा। वैसे भारत सरकार ने वायु प्रदूषण की समस्याओं के समाधान के लिए कई कदम उठाए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह बात कही।

राज्यसभा: 80 फीसद डॉक्टर

श्री जाधव ने एक और प्रश्न पर बताया है कि देश में 13,88,185 पंजीकृत एलोपैथिक डॉक्टर और 7,51,768 पंजीकृत आयुष चिकित्सक हैं। यदि एलोपैथिक और आयुष दोनों प्रणालियों में पंजीकृत चिकित्सकों का 80 प्रतिशत उपलब्ध माना जाए, तो डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात 1:811 होने का अनुमान है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के 1:1000 के मानक से बेहतर है। उनके मुताबिक भारतीय नर्सिंग परिषद (आईएनसी) की रिपोर्ट है कि देश में 39.40 लाख नर्सिंग कर्मी हैं और यदि इनमें से 80 प्रतिशत सक्रिय हैं, तो प्रति हजार जनसंख्या पर 2.23 नर्सों का अनुपात बनता है। देश में नर्सिंग कर्मियों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए 806 सरकारी संस्थानों सहित 5310 नर्सिंग संस्थान हैं जहां से प्रतिवर्ष लगभग 3.82 लाख नर्सिंग कर्मी निकल रहे हैं। जहां तक रिक्तियों की बात है तो सरकारी अस्पतालों में रिक्त पदों को भरने सहित सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सुदृढ़ करने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है। स्वास्थ्य मंत्रालय प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए राज्यों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करता है। भारत की स्वास्थ्य गतिशी‍लता (एचडीआई) (बुनियादी ढांचा एवं मानव संसाधन), 2022-23 की रिपोर्ट में सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में डॉक्टर नर्स और विशेषज्ञ की उपलब्धता का विवरण दर्ज है।

राज्यसभा: आरोग्य मंदिर भी पर्याप्त

उन्होंने बताया कि मानदंडों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में, मैदानी इलाकों में पांच हजार और पहाड़ी तथा आदिवासी क्षेत्रों में तीन हजार की आबादी के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर-उप स्वास्थ्य केंद्र, मैदानी इलाकों में तीस हजार और पहाड़ी एवं आदिवासी क्षेत्रों में बीस हजार की आबादी के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर-प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और मैदानी इलाकों में 1 लाख 20 हजार और पहाड़ी एवं आदिवासी क्षेत्रों में 80 हजार की आबादी के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना का सुझाव दिया गया है। इसके अतिरिक्त, जिला अस्पताल, उप-जिला अस्पताल और प्रथम रेफरल इकाई, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए द्वितीयक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत निःशुल्क निदान सेवा पहल कार्यक्रम संचालित करता है। इसका उद्देश्य समुदाय के निकट सुलभ और सस्‍ती दर पर पैथोलॉजिकल और रेडियोलॉजिकल निदान सेवाएं प्रदान करना है, जिससे व्यय कम हो। आयुष्मान आरोग्य मंदिर – उप स्वास्थ्य केंद्र में 14 परीक्षण, आयुष्मान आरोग्य मंदिर – प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 63 परीक्षण, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 97 परीक्षण, उप जिला अस्पतालों में 111 परीक्षण और जिला अस्पतालों में 134 परीक्षण उपलब्‍ध कराए गए हैं।

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