नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। मेडिकल शिक्षा की निगरानी करने वाली संस्था नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने MBBS को पूरा करने की अधिकतम समय सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन (संशोधन) रेगुलेशन, 2026 के नए ड्राफ्ट के मुताबिक अब मेडिकल छात्रों को एमबीबीएस की डिग्री और अनिवार्य रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप पूरी करने के लिए अधिकतम 10 साल का समय दिया जाएगा। 2023 में इस समय सीमा को घटाकर 9 साल कर दिया गया था। एनएमसी ने यह साफ कर दिया है कि वह मेडिकल शिक्षा की क्वॉलिटी और स्टैंडर्ड से कोई समझौता नहीं करेगा। एमबीबीएस के पहले साल की परीक्षा को लेकर सख्त नियम अब भी जस का तस लागू रहेगा। खबरों के मुताबिक एनएमसी के सचिव डॉ. राघव लंगर की तरफ से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार अब कोई भी छात्र एमबीबीएस पाठ्यक्रम में एडमिशन लेने के दिन से लेकर अधिकतम 10 वर्षों से अधिक समय तक अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाएगा। इस निर्धारित 10 साल की समय सीमा के अंदर ही छात्र को 4.5 साल की मुख्य अकादमिक पढ़ाई के साथ-साथ एक साल की अनिवार्य रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप भी हर हाल में पूरी करनी होगी।
NMC: पहले साल के लिए चार प्रयास ही
एनएमसी ने एमबीबीएस फर्स्ट ईयर को पास करने के नियमों में रत्ती भर भी ढील नहीं दी है। नए ड्राफ्ट में साफ लिखा है कि छात्रों को फर्स्ट ईयर की परीक्षा क्लियर करने के लिए अधिकतम केवल 4 मौके ही मिलेंगे। अगर कोई इन 4 प्रयासों में भी फर्स्ट ईयर पास नहीं कर पाता है तो उसका मेडिकल कॉलेज से दाखिला हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाएगा। 10 साल का फायदा उठाने के लिए भी पहले साल की ‘लक्ष्मण रेखा’ को पार करना अनिवार्य होगा। नए प्रस्ताव के अनुसार 10 साल की समय सीमा उस दिन से गिनी जाएगी, जिस दिन छात्र आधिकारिक तौर पर ‘फर्स्ट एमबीबीएस’ पाठ्यक्रम की कक्षाओं में शामिल होता है।
NMC: 27 जून तक देनी होगी राय
मेडिकल एक्सपर्ट का मानना है कि इस फैसले से उन मेडिकल छात्रों को सबसे ज्यादा मदद मिलेगी जो पढ़ाई के दौरान किसी अनपेक्षित हादसे, मानसिक या शारीरिक बीमारी का शिकार हो जाते थे। इसके अलावा, यह उन चालाक प्रवृत्तियों पर भी रोक लगाएगा जहां कई छात्र NEET PG / NEXT) की तैयारी के लिए जानबूझकर अपनी अनिवार्य मेडिकल इंटर्नशिप को महीनों तक घसीटते और टालते रहते थे। एनएमसी ने इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को पब्लिक डोमेन में रखकर सभी मेडिकल कॉलेजों, प्रिंसिपल्स, स्टूडेंट्स और अभिभावकों से सुझाव और आपत्तियां 27 जून तक मांगी है। इस दौरान मिले सुझावों की समीक्षा करने के बाद ही इस 10 साल वाले नियम को अंतिम रूप देकर पूरे देश में कानूनी रूप से लागू किया जाएगा।
