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सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन चालू

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन 2047 की शुरुआत मध्यप्रदेश के शहडोल में की। यह बीमारी विशेषकर आदिवासियों के लिए गंभीर चिंता का कारण रही है। एक अनुमान के मुताबिक सात करोड़ से अधिक आदिवासी लोगों में यह गंभीर बीमारी देखी जा रही है। 2023 के बजट में 2047 तक इस रोग को भारत से जड़ से खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

रक्त से संबंधित वंशानुगत बिकार

यह रक्त से संबंधित विकार है। यह वंशानुगत विकारों के समूह में से एक है जिसे सिकल सेल रोग के रूप में जाना जाता है। यह दोषपूर्ण हीमोग्लोबिन से संबंधित मानी जाती है, जिसमें ऊतकों तक ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है, जो कई गंभीर रोगों का कारण बनती है। सामान्य तौर पर स्वस्थ हीमोग्लोबिन वाली लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी) डोनट की तरह चिकनी, डिस्क के आकार की और लचीली होती हैं। हालांकि सिकल सेल हीमोग्लोबिन वाली कोशिकाएं कड़ी और चिपचिपी हो जाती हैं, जिससे ऑक्सीजन का संचार प्रभावित हो सकता है। ये कोशिकाएं आपस में चिपक जाती हैं और ऑक्सीजन ले जाने वाले रक्त की गति को अवरुद्ध कर सकती हैं। यह बीमारी रक्त वाहिकाओं में समस्या के साथ एनीमिया, पीलिया, स्ट्रोक जैसी बीमारियों के जोखिमों को भी बढ़ाने वाली हो सकती हैं।

सिकल सेल से कई अन्य रोगों का खतरा

एक रिपोर्ट के मुताबिक यह जीन में किसी दोष या परिवर्तन के कारण होती है, जो शरीर को लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद हीमोग्लोबिन बनाने के लिए आवश्यक होती है। जिन लोगों में यह बीमारी होती है उन्हें कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। एनीमिया के कारण अत्यधिक थकान या कमजोरी बने रहना, किडनी से संबंधित समस्याएं, अधिक बार बिस्तर गीला करना, बार-बार पीलिया होना, हाथों और पैरों में सूजन और दर्द, बार-बार संक्रमण होना, स्ट्रोक का खतरा आदि।

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