नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया0। कोरोना मामलाों में तेजी को देखते हुए केंद्र सरकार ने पत्र लिखकर राज्यों को जरूरी कदम उठाने को कहा है। याद रहे कि 31 मई तक देश में 3783 एक्टिव मामले हो गए जबकि 22 संक्रमितों की मौत हो चुकी है।
कोरोला : संक्रमण में केरल टॉप पर
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित केरल जहां 1,147 एक्टिव मामले हैं। 227 नए संक्रमण के मामले सामने आए हैं। महाराष्ट्र में 424 एक्टिव मामले हैं। पिछले 24 घंटों में 40 मामले बढ़े हैं। दिल्ली में भी कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। 56 नए मामले सामने आए हैं, जिससे कुल संख्या 294 हो गई है। जिन राज्यों में मौतें हुई हैं, उनमें महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा दो मौतें हुई हैं। एक 67 वर्षीय पुरुष मरीज को बाएं फेफड़े में निमोनिया और डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां थीं। उनकी कोविड-19 रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। एक और मौत 21 वर्षीय पुरुष की हुई। उन्हें कुठ अन्य रोग भी थे। इसी तरह तमिलनाडु में एक 60 वर्षीय पुरुष की मौत हो गई। दिल्ली में एक 60 वर्षीय महिला की मौत की खबर है। पटना एम्स के एक डॉक्टर, कुछ नर्स समेत तकरीबन 10 लोग संक्रमित हैं।
कोरोना : संक्रमण गंभीर नहीं
इधर स्वास्थ्य सचिव पुण्या सलिला श्रीवास्तव ने राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों को पत्र लिखकर कहा है कि मौसम बदलने के साथ ही सांस की बीमारियां बढ़ जाती हैं। ये बीमारियां इन्फ्लूएंजा, SARSCoV-2 और RSV जैसे वायरस की वजह से होती हैं। पत्र में लिखा है कि देश के कुछ हिस्सों में SARS-CoV-2 की वजह से होने वाली सांस की बीमारियों के मामलों में थोड़ी बढ़ोतरी देखी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि ज्यादातर संक्रमण हल्के हैं। अभी ओमिक्रॉन के JN 1, XFG और LF 7.9 वेरिएंट ही मिल रहे हैं। इनसे बुखार, खांसी और गले में खराश जैसे लक्षण होते हैं, जो अपने आप ठीक हो जाते हैं।
कोरोना : अस्पतालों में रहे तैयारी
मंत्रालय ने राज्यों को अस्पतालों की तैयारी जांचने के लिए कहा है। इसमें जिला और उप-जिला स्तर के अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, और दूसरे स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। अस्पतालों में जांच की सुविधा, ज़रूरी दवाएं, PPE किट, आइसोलेशन वार्ड, ऑक्सीजन सप्लाई, क्रिटिकल केयर बेड और वेंटिलेटर जैसी सुविधाएं होनी चाहिए। ऑक्सीजन की तैयारी को जांचने के लिए मॉक ड्रिल भी करनी होगी। इसकी रिपोर्ट 2 जून तक भेजनी है। मंत्रालय ने टेस्टिंग प्रोटोकॉल का पालन करने पर भी जोर दिया है। सभी SARI मामलों और 5 फीसद ILI मामलों की जांच होनी चाहिए। SARI पॉजिटिव सैंपल को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए VRDL सेंटर भेजना होगा। जिला सर्विलांस यूनिट को ILI/SARI के ट्रेंड पर नज़र रखनी होगी। साथ ही, मामलों में SARI के अनुपात को भी ट्रैक करना होगा। इन सभी का डेटा पोर्टल पर नियमित रूप से डालना होगा।
